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परमात्मा तीनों कालों में सत्य, शाश्वत व सनातन है: अड़गड़ानंद
Updated Tue, 13 Jun 2017 12:11 AM IST
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कछवां। सभी धर्मों की चिंता को छोड़कर एक परमात्मा की शरण में भजन करने वाला संपूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है। गीता के अनुसार एक परमात्मा की शरण होकर भजन ही एक मात्र धर्म है। जिस दिन यथार्थ गीता घर घर पहुंच जाएगी समाज में फैली कुरीतियां, भ्रांतियां एवं आतंकवाद स्वत: समाप्त हो जाएगा। सत्य वस्तु का तीनों कालों में अभाव नहीं है और असत्य वस्तु का कोई अस्तित्व नहीं है। परमात्मा ही तीनों कालों में सत्य, शाश्वत एवं सनातन है। यह बातें सोमवार को दोपहर में स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी ने कछवां के बरैनी गांव में स्थित पप्पू सिंह के अहाते में आयोजित प्रवचन के दौरान कहीं। विकास खंड मझवां के बरैनी गांव स्थित रमेश सिंह उर्फ पप्पू सिंह के अहाते में आयोजित दिव्य सत्संग व प्रवचन का श्रवण करने यूपी के वाराणसी, इलाहाबाद, चंदौली, गोरखपुर, लखनऊ सहित राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश आदि प्रांतों से बड़ी संख्या में भक्तजन पहुंचे थे। प्रवचन के दौरान परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि चार प्रकार के भक्त मुझे भजते हैं, जिसमें आर्त, जिज्ञासु, ज्ञानी एवं अर्थार्थी हैं। स्वामी जी ने का कि मांगना है तो भगवान से मांगों, वह जरूर देंगे। मांगने वाले स्वर्गलोक तक की कामना करते हैं, जिसे भगवान देते भी हैं, लेकिन जब पुण्य क्षीण हो जाता है तो पुन: भक्त अपनी पुरानी स्थिति अर्थात मृत्युलोक में आ जाता है। महाराज जी ने कहा कि तीर्थव व्रत व्यर्थ नहीं है, सभी तीर्थों का परिणाम हरि की भक्ति ही है। देवी और देवताओं को समर्पित भाव से पुकारने पर वे खड़े होकर अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। परमात्मा का भजन दो-ढाई अक्षर का नाम राम या ओम का जप करें। सदगुरु ही भक्तजनों को भगवान के समीप ला सकता है। स्वामी जी ने श्रीमद् भागवत गीता की शाश्वत व्याख्या यथार्थ गीता के श्रवण-मनन पर विशेष बल देते हुए कहा कि परमात्मा में प्रवेश दिलाने वाले क्रियात्मक अनुशासन के नियमों का संकलन ही शास्त्र है। इस दृष्टि से भगवान श्री कृष्णोक्त गीता सनातन, शाश्वत धर्म का शुद्ध शास्त्र है, जो चारों वेद, उपनिषद, समस्त योगशास्त्र, रामचरित मानस तथा विश्व के सभी दर्शनशास्त्रों का अकेले ही प्रतिनिधित्व करती है।
प्रवचन के दौरान विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। सत्संग स्थल परिसर में भंडारा सुबह 10 बजे से संत महात्माओं को प्रसाद ग्रहण कराने के बाद शुरू हुआ, जो देर शाम तक अनवरत चलता रहा। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक रमेश उर्फ पप्पू सिंह, दिनेश सिंह सहित संत नारद जी महाराज, सोहन बाबा, लाले बाबा, आशीष बाबा, तानसेन बाबा, संते महाराज, सर्वानंद , टीएन बाबा, डी राय, दिनेश सिंह, रामबाबू सिंह, राजकुमार उपाध्याय, अजय, बबलू सिंह रामजी सिंह, घुरहू पाल, शिवपाल, शिवम उपाध्याय, कृष्ण मोहन सहित संत-महात्मा व दूरदराज से बड़ी संख्या में आए भक्तजन उपस्थित रहे।
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वीरेंद्र