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पीएचसी पर धमके अपर मुख्य चिकित्साधिकारी
Updated Sun, 15 Apr 2018 12:12 AM IST
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मड़िहान। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पटेहरा पर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी वीके तिवारी ने पहुंचकर स्वास्थ्य केन्द्र का निरीक्षण किया। इस दौरान साफ - सफाई व रख रखाव देख काफी संतुष्ट दिखे और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर ही अपर मुख्य चिकित्साधिकारी ने पीएचसी प्रभारी व समस्त कर्मचारियों के साथ डा. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर बाबा साहब का 127 वीं जयंती मनाया।
ततपश्चात पटेहरा ब्लाक में चल रहे मेले का भी निरीक्षण किए। वही अस्पताल पर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के आने की खबर लगते ही अस्पताल पर समस्त कर्मचारी समय पर भागकर अस्पताल पहुंच गए व अस्पताल की साफ सफाई के सारी व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने में लग गये। जबकि अन्य दिनों यही डॉक्टर अस्पताल से मरीजों को आये दिन गायब मिलते थे। क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि शायद अपर मुख्य चिकित्साधिकारी बिना जानकारी दिये अचानक अस्पताल का औचक निरीक्षण किये होते तो खुल सकती थी अस्पताल की पोल, किन्तु आजकल के अधिकारी तो अपने कार्यालय से निकलते ही जानकारी दे देते है। जिससे कर्मचारी भी सतर्क होकर ड्यूटी पर तैनात मिलते है।जबकि यही अस्पताल है जहाँ इलाज के अभाव में कई लोगों को अपनी जान भी गवानी पड़ी है। आये दिन डाक्टरों के ना रहने व समय से ना आने पर मरीजों को मजबूर होकर झोलाछाप डाक्टरों के शरण मे जाना होता है व कई मरीजों को इलाज के अभाव में अपने जान से भी हाथ धोना पड़ा है।
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ततपश्चात पटेहरा ब्लाक में चल रहे मेले का भी निरीक्षण किए। वही अस्पताल पर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के आने की खबर लगते ही अस्पताल पर समस्त कर्मचारी समय पर भागकर अस्पताल पहुंच गए व अस्पताल की साफ सफाई के सारी व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने में लग गये। जबकि अन्य दिनों यही डॉक्टर अस्पताल से मरीजों को आये दिन गायब मिलते थे। क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि शायद अपर मुख्य चिकित्साधिकारी बिना जानकारी दिये अचानक अस्पताल का औचक निरीक्षण किये होते तो खुल सकती थी अस्पताल की पोल, किन्तु आजकल के अधिकारी तो अपने कार्यालय से निकलते ही जानकारी दे देते है। जिससे कर्मचारी भी सतर्क होकर ड्यूटी पर तैनात मिलते है।जबकि यही अस्पताल है जहाँ इलाज के अभाव में कई लोगों को अपनी जान भी गवानी पड़ी है। आये दिन डाक्टरों के ना रहने व समय से ना आने पर मरीजों को मजबूर होकर झोलाछाप डाक्टरों के शरण मे जाना होता है व कई मरीजों को इलाज के अभाव में अपने जान से भी हाथ धोना पड़ा है।
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