{"_id":"5a92f57d4f1c1bcb268bbe62","slug":"51519580541-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शब्दों की जमीन पर हल चलाते थे डा. भवदेव पांडेय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शब्दों की जमीन पर हल चलाते थे डा. भवदेव पांडेय
Updated Sun, 25 Feb 2018 11:38 PM IST
विज्ञापन
डा.भवदेव पांडेय की पुण्यतिथि पर उपस्थित साहित्यकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मिर्जापुर। साहित्यकार डा. भवदेव पांडेय की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार को तिवरानी टोला में साहित्य की परंपरा और वर्तमान चुनौतियां विषयक संगोष्ठी हुई। इसमें साहित्य में डा. पांडेय के योगदान पर प्रकाश डाला गया।
नगर पालिका अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने डा. भवदेव पांडेय को श्रद्धांजलि दी। मुख्य अतिथि नगर मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप मिश्र ने कहा कि मिर्जापुर साहित्य के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। डा. बैजनाथ पांडेय ने कहा कि केवल कुछ लिख देना ही साहित्य नहीं है। साहित्य वह है जो गतिशीलता प्रदान करे। डा. लालमणि ओझा ने कहा कि शब्दों की जमीन पर हल चलाने का काम डा. भवदेव पांडेय करते रहे। प्रो. केएम सिंह ने कहा कि प्राचीन काल में वेद को इतना जटिल कर दिया गया कि वह लोक से दूर हो गया। मध्यकाल में साहित्यकारों ने इसे लोक के अनुकूल बनाया। गीतकार गणेश गंभीर ने कहा कि केवल एक पक्ष पर ध्यान देने वाले साहित्य को समय खारिज कर देगा। इस मौके पर साहित्यकार बृजदेव पांडेय, रमाशंकर चौधरी, प्रो. प्रभुनारायण श्रीवास्तव, देवीचरन पांडेय, भोलानाथ कुशवाहा, केदार नाथ सविता, हसन जौनपुरी, इरफान कुरैशी, गफ्फार नियाजी, उद्यमी सीपी गुप्ता, शंभूनाथ अग्रवाल, आशीष ने डा. भवदेव पांडेय को श्रद्धांजलि अर्पित की। संचालन डा. रमाशंकर शुक्ल व धन्यवाद ज्ञापन डा. भवदेव पांडेय शोध संस्थान के संयोजक सलिल पांडेय ने किया। कार्यक्रम में जलज नेत, प्रसून पांडेय, गोपाल तिवारी, आशुतोष बरनवाल, नन्दू, अंकित हिंदुस्तानी, दिनेश तिवारी, टीएन शुक्ला, साकेत पांडेय, योगेंद्र मिश्र, विभाव पांडेय आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
नगर पालिका अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने डा. भवदेव पांडेय को श्रद्धांजलि दी। मुख्य अतिथि नगर मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप मिश्र ने कहा कि मिर्जापुर साहित्य के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। डा. बैजनाथ पांडेय ने कहा कि केवल कुछ लिख देना ही साहित्य नहीं है। साहित्य वह है जो गतिशीलता प्रदान करे। डा. लालमणि ओझा ने कहा कि शब्दों की जमीन पर हल चलाने का काम डा. भवदेव पांडेय करते रहे। प्रो. केएम सिंह ने कहा कि प्राचीन काल में वेद को इतना जटिल कर दिया गया कि वह लोक से दूर हो गया। मध्यकाल में साहित्यकारों ने इसे लोक के अनुकूल बनाया। गीतकार गणेश गंभीर ने कहा कि केवल एक पक्ष पर ध्यान देने वाले साहित्य को समय खारिज कर देगा। इस मौके पर साहित्यकार बृजदेव पांडेय, रमाशंकर चौधरी, प्रो. प्रभुनारायण श्रीवास्तव, देवीचरन पांडेय, भोलानाथ कुशवाहा, केदार नाथ सविता, हसन जौनपुरी, इरफान कुरैशी, गफ्फार नियाजी, उद्यमी सीपी गुप्ता, शंभूनाथ अग्रवाल, आशीष ने डा. भवदेव पांडेय को श्रद्धांजलि अर्पित की। संचालन डा. रमाशंकर शुक्ल व धन्यवाद ज्ञापन डा. भवदेव पांडेय शोध संस्थान के संयोजक सलिल पांडेय ने किया। कार्यक्रम में जलज नेत, प्रसून पांडेय, गोपाल तिवारी, आशुतोष बरनवाल, नन्दू, अंकित हिंदुस्तानी, दिनेश तिवारी, टीएन शुक्ला, साकेत पांडेय, योगेंद्र मिश्र, विभाव पांडेय आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन