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दुष्कर्म के आरोपी को दस वर्ष कठोर कैद
Updated Wed, 26 Sep 2018 12:57 AM IST
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मिर्जापुर। बालिका से दुष्कर्म मामले में न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश पीएन श्रीवास्तव ने दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त को मंगलवार को दस वर्ष का सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार जिगना थाना क्षेत्र के एक गांव की पीड़िता के पिता ने 24 जुलाई 2017 को लिखित तहरीर थाने में दी थी जिसमें बताया था कि वह पत्नी के साथ बाहर गया था। घर में उसकी नौ वर्ष की पुत्री अकेेली थी। आरोप है कि पड़ोसी राहुल बिंद उसे बुलाकर अपने कमरे में ले गया जहां उसके साथ दुराचार किया। बालिका के शोर करने पर लोग पहुंचे तो आरोपी भाग निकला। बाहर से आने पर जानकारी हुई तो पुत्री के साथ थाने पहुंचकर आरोपी के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल कराने के बाद आरोपी के खिलाफ दुराचार एवं पास्को एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमेद्र कुमार शुक्ल ने छह गवाह प्रस्तुत कराए। मामले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं की दलील, पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर अदालत ने आदेश में कहा कि लैंगिक अपराध एक विकृत मस्तिष्क में उपजी हीनता का परिणाम है। नाबालिग बालिका से बलात्कार घृणित अपराध है। दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने राहुल बिंद कठोर दस वर्ष का सश्रम कारावास और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अर्थदंड की राशि से 75 हजार रुपये पीड़िता को देने का आदेश दिया। यह भी आदेशित किया है कि पीड़िता को राज्य सरकार से निमयानुसार क्षतिपूर्ति कराएं।
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अभियोजन के अनुसार जिगना थाना क्षेत्र के एक गांव की पीड़िता के पिता ने 24 जुलाई 2017 को लिखित तहरीर थाने में दी थी जिसमें बताया था कि वह पत्नी के साथ बाहर गया था। घर में उसकी नौ वर्ष की पुत्री अकेेली थी। आरोप है कि पड़ोसी राहुल बिंद उसे बुलाकर अपने कमरे में ले गया जहां उसके साथ दुराचार किया। बालिका के शोर करने पर लोग पहुंचे तो आरोपी भाग निकला। बाहर से आने पर जानकारी हुई तो पुत्री के साथ थाने पहुंचकर आरोपी के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल कराने के बाद आरोपी के खिलाफ दुराचार एवं पास्को एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमेद्र कुमार शुक्ल ने छह गवाह प्रस्तुत कराए। मामले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं की दलील, पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर अदालत ने आदेश में कहा कि लैंगिक अपराध एक विकृत मस्तिष्क में उपजी हीनता का परिणाम है। नाबालिग बालिका से बलात्कार घृणित अपराध है। दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने राहुल बिंद कठोर दस वर्ष का सश्रम कारावास और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अर्थदंड की राशि से 75 हजार रुपये पीड़िता को देने का आदेश दिया। यह भी आदेशित किया है कि पीड़िता को राज्य सरकार से निमयानुसार क्षतिपूर्ति कराएं।
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