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नगर पालिका ने नवरात्र मेला के आयोजन से खींचा हाथ
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मिर्जापुर। चैत्र नवरात्र की तैयारियों में जुटे प्रशासन को नगर पालिका परिषद ने झटका दिया है। नपाध्यक्ष मनोज जायसवाल ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कहा कि मेला प्रांतीयकरण अनुदान की राशि पालिका को न मिलने से वह आर्थिक संकट से जूझ रही है। इसलिए वह अपनी स्वेच्छा से किसी अन्य विभाग से मेले की व्यवस्था करा सकते हैं। पालिका नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं ही दे सकेगी।
नवरात्र मेला में लाखों दर्शनार्थियों की भीड़ होती है। नपाध्यक्ष मनोज जायसवाल का कहना है कि पिछली बार से नवरात्र मेला का प्रांतीयकरण कर दिया गया है। इससे राज्य सरकार की ओर से अनुदान भी दिया गया है लेकिन उनका आरोप है कि जिला प्रशासन उस अनुदान को नहीं दे रहा है जिससे कार्य में लगे ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। वहीं जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने पत्र का उत्तर देते हुए कहा कि नवरात्र मेला में सभी कार्य नगर पालिका नहीं कराती है, अन्य कई विभाग भी इसमें कार्य करते हैं। इसलिए उनको भी भुगतान करना होता है। डीएम ने कहा कि नगर पालिका ने कभी भी खर्च किए गए धन का इस्टीमेट न तो सक्षम अधिकारी से बनवाकर शासन से मांग की और न ही कार्यवार आगणन सक्षम अधिकारी अनुमोदित कराकर प्रस्तुत किया गया। देनदारी के बारे में डीएम ने कहा कि जो साढ़े चार करोड़ रुपये की देनदारी पालिका की है उसकी जानकरी जिला प्रशासन को नहीं दी गई। प्रांतीयकरण की धनराशि अन्य विभागों ने प्राप्त कर ली है लेकिन नगर पालिका ने नहीं लिया था। जिस पर मंगलवार को अधिकारी को बुलाकर उसे प्राप्त कराया गया।
नवरात्र मेला में लाखों दर्शनार्थियों की भीड़ होती है। नपाध्यक्ष मनोज जायसवाल का कहना है कि पिछली बार से नवरात्र मेला का प्रांतीयकरण कर दिया गया है। इससे राज्य सरकार की ओर से अनुदान भी दिया गया है लेकिन उनका आरोप है कि जिला प्रशासन उस अनुदान को नहीं दे रहा है जिससे कार्य में लगे ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। वहीं जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने पत्र का उत्तर देते हुए कहा कि नवरात्र मेला में सभी कार्य नगर पालिका नहीं कराती है, अन्य कई विभाग भी इसमें कार्य करते हैं। इसलिए उनको भी भुगतान करना होता है। डीएम ने कहा कि नगर पालिका ने कभी भी खर्च किए गए धन का इस्टीमेट न तो सक्षम अधिकारी से बनवाकर शासन से मांग की और न ही कार्यवार आगणन सक्षम अधिकारी अनुमोदित कराकर प्रस्तुत किया गया। देनदारी के बारे में डीएम ने कहा कि जो साढ़े चार करोड़ रुपये की देनदारी पालिका की है उसकी जानकरी जिला प्रशासन को नहीं दी गई। प्रांतीयकरण की धनराशि अन्य विभागों ने प्राप्त कर ली है लेकिन नगर पालिका ने नहीं लिया था। जिस पर मंगलवार को अधिकारी को बुलाकर उसे प्राप्त कराया गया।
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