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चार घंटे अम्मी अम्मी.. चिल्लाती रही नन्हीं परी दीपा
Updated Wed, 04 Apr 2018 12:14 AM IST
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पोस्टमार्टम हाउस पर बैठे दीपांजली के परिवार की महिलाएं
चार घंटे अम्मी अम्मी.. चिल्लाती रही नन्ही परी दीपा
बोरवेल से दीपांजलि के जीवित निकलने की आस में भोर तक बैठी रही मां संजू
बारह घंटे बाद सरिया की मदद से निकाला गया दीपा का शव
अमर उजाला ब्यूरो
मिर्जापुर। लालगंज के सहरसा में सोमवार की दोपहर बोरवेल में गिरी नन्हीं दीपा चार घंटे तक अम्मी अम्मी चिल्लाती रही। रह-रह कर बोरवेल से उसके रोने की आवाज सुनाई देती रही। दीपा के जीवित निकलने की आस में उसकी मां संजू रात भर बोरवेल के बाहर बैठी रही। वह भगवान से नन्हीं परी केे लिए प्रार्थना करती रही लेकिन शायद ईश्वर को ये मंजूर नहीं था। करीब 12 घंटे की मशक्कत के बाद एनडीआरएफ के जवानों ने आखिरकार सरिया की मदद से दीपा के शव को निकाला।
लालगंज थाना क्षेत्र केे सहरसा गांव निवासी सूर्यलाल कालीन बुन कर परिवार की जीविका चलाता है। घर में पत्नी संजू के अलावा तीन बच्चों में दो साल की दीपांजलि सबसे छोटी थी। दीपांजलि अपने माता, पिता की सबसे दुलारी बेटी थी। घरवाले दीपाजंलि को प्यार से दीपा कहकर पुकारते थेे। मां घर से बाहर निकलती तो वह मां के साथ ही चल पड़ती थी। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे संजू बैल बांधने के लिए घर से बाहर निकली थी। घर के पास ही खुला बोरवेल है। संजू के बैल बांधने के दौरान ही बेटी दीपा बोरवेल की ओर तरफ चली गई और फिसल कर उसमें गिर गई। मां का ध्यान गया तो वह बेटी को खोजने लगी। बेटी के इधर उधर न दिखाई देने पर वह बोरवेल की तरफ गई तो बेटी के रोने की आवाज सुनाई दी। बाद में सूर्यलाल और आसपास के लोग पहुंचे। सौ नंबर पर फोन करने के बाद पुलिस भी पहुंची और इसके बाद बचाव कार्य शुरू हुआ। सूर्यलाल अपनी पत्नी संजू के साथ बेटी का पोस्टमार्टम कराने मंगलवार की सुबह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। दोनों का कहना था कि उन्हें आस थी कि बेटी को जीवित को निकाल लिया जाएगा। डीएम विमल दुबे और एसपी आशीष तिवारी समेत अमला मौके पर मौजूद था। करीब 12 घंटे के अथक प्रयास के बाद मंगलवार की भोर में करीब साढ़े तीन बजे दीपा को सरिया की मदद से बाहर निकाला गया। दरअसल सोमवार की शाम करीब सात बजे के बाद से ही दीपा की आवाज आनी बंद हो गई थी। देर रात तक उसकी मौत की आशंका जताई जा रही थी। सरिया की मदद से उसे कपड़े में फंसाकर बाहर निकालने का प्रयास किया जाता रहा लेकिन कपड़ा फट गया। बाद में सरिया पेट के किनारे में फंसा तब जाकर शव को बाहर निकाला जा सका।
सहरसा गांव में सूर्यलाल के घर के पास ही गांव के नजीर ने तीन स्थानों पर बोरिंग कराई थी। दो स्थानों पर पाइप डाली गई और एक को खुला छोड़ दिया गया। सूर्यलाल ने बताया कि रामनवमी के दिन ही गाय बांधते समय बछड़ा बोरवेल में गिरने से बचा था। उसी दिन लोगों ने नजीर से बोरवेल पटवाने की बात कही थी लेकिन नजीर ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आखिरकार नजीर की लापरवाही से दीपा की मौत हो गई।
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बोरवेल से दीपांजलि के जीवित निकलने की आस में भोर तक बैठी रही मां संजू
बारह घंटे बाद सरिया की मदद से निकाला गया दीपा का शव
अमर उजाला ब्यूरो
मिर्जापुर। लालगंज के सहरसा में सोमवार की दोपहर बोरवेल में गिरी नन्हीं दीपा चार घंटे तक अम्मी अम्मी चिल्लाती रही। रह-रह कर बोरवेल से उसके रोने की आवाज सुनाई देती रही। दीपा के जीवित निकलने की आस में उसकी मां संजू रात भर बोरवेल के बाहर बैठी रही। वह भगवान से नन्हीं परी केे लिए प्रार्थना करती रही लेकिन शायद ईश्वर को ये मंजूर नहीं था। करीब 12 घंटे की मशक्कत के बाद एनडीआरएफ के जवानों ने आखिरकार सरिया की मदद से दीपा के शव को निकाला।
लालगंज थाना क्षेत्र केे सहरसा गांव निवासी सूर्यलाल कालीन बुन कर परिवार की जीविका चलाता है। घर में पत्नी संजू के अलावा तीन बच्चों में दो साल की दीपांजलि सबसे छोटी थी। दीपांजलि अपने माता, पिता की सबसे दुलारी बेटी थी। घरवाले दीपाजंलि को प्यार से दीपा कहकर पुकारते थेे। मां घर से बाहर निकलती तो वह मां के साथ ही चल पड़ती थी। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे संजू बैल बांधने के लिए घर से बाहर निकली थी। घर के पास ही खुला बोरवेल है। संजू के बैल बांधने के दौरान ही बेटी दीपा बोरवेल की ओर तरफ चली गई और फिसल कर उसमें गिर गई। मां का ध्यान गया तो वह बेटी को खोजने लगी। बेटी के इधर उधर न दिखाई देने पर वह बोरवेल की तरफ गई तो बेटी के रोने की आवाज सुनाई दी। बाद में सूर्यलाल और आसपास के लोग पहुंचे। सौ नंबर पर फोन करने के बाद पुलिस भी पहुंची और इसके बाद बचाव कार्य शुरू हुआ। सूर्यलाल अपनी पत्नी संजू के साथ बेटी का पोस्टमार्टम कराने मंगलवार की सुबह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। दोनों का कहना था कि उन्हें आस थी कि बेटी को जीवित को निकाल लिया जाएगा। डीएम विमल दुबे और एसपी आशीष तिवारी समेत अमला मौके पर मौजूद था। करीब 12 घंटे के अथक प्रयास के बाद मंगलवार की भोर में करीब साढ़े तीन बजे दीपा को सरिया की मदद से बाहर निकाला गया। दरअसल सोमवार की शाम करीब सात बजे के बाद से ही दीपा की आवाज आनी बंद हो गई थी। देर रात तक उसकी मौत की आशंका जताई जा रही थी। सरिया की मदद से उसे कपड़े में फंसाकर बाहर निकालने का प्रयास किया जाता रहा लेकिन कपड़ा फट गया। बाद में सरिया पेट के किनारे में फंसा तब जाकर शव को बाहर निकाला जा सका।
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सहरसा गांव में सूर्यलाल के घर के पास ही गांव के नजीर ने तीन स्थानों पर बोरिंग कराई थी। दो स्थानों पर पाइप डाली गई और एक को खुला छोड़ दिया गया। सूर्यलाल ने बताया कि रामनवमी के दिन ही गाय बांधते समय बछड़ा बोरवेल में गिरने से बचा था। उसी दिन लोगों ने नजीर से बोरवेल पटवाने की बात कही थी लेकिन नजीर ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आखिरकार नजीर की लापरवाही से दीपा की मौत हो गई।
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