{"_id":"5a6239714f1c1b6b268b56bb","slug":"181516386673-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिल्म पद्मावत के विरोध में क्षत्रिय समाज ने किया पैदल मार्च","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिल्म पद्मावत के विरोध में क्षत्रिय समाज ने किया पैदल मार्च
Updated Sat, 20 Jan 2018 12:56 AM IST
विज्ञापन
पद्मावत फिल्म के विरोध में प्रदर्शन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मिर्जापुर। पद्मावत फिल्म के विरोध में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के लोगों ने शुक्रवार को घंटाघर से जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च किया। इस दौरान नारेबाजी करते हुए फिल्म के प्रदर्शन कर भावना को आहत करने वाली फिल्मों पर रोक लगाने के लिए कानून बनाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा।
पत्रक में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारियों ने कहा है कि फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली की ओर से बनाई गई फिल्म पद्मावती का नाम बदलकर पद्मावत कर दिया गया है। इसमें ऐसे दृश्यों का फिल्मांकन किया गया है जो ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाते हैं। साथ ही भारतीय आस्था व जनभावना को ठेस पहुंचाते हैं। फिल्म में देश की संस्कृति एवं इतिहास को विकृत करके प्रस्तुत किया गया है। यह भी कहा कि महारानी पद्मावती देश व हिंदू समाज के गौरव एवं मान रही हैं। क्षत्रिय समाज उन्हें देवी तुल्य मानता है, उनका जौहर एवं बलिदान विश्व प्रसिद्ध है। कहा कि कुछ लोग जानबूझ कर क्षत्रिय समाज को आहत करने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रपति से मांग किया है की है कि संसद में सर्वसम्मति से कानून पारित करके ऐसी फिल्में बनाने पर रोक लगाई जाएं। ऐसी फिल्में जो किसी जात व भाषा की भावना एवं आस्था को चोट पहुंचाती हो तो फिल्मों का प्रदर्शन अपराध की श्रेणी में रखा जाए। पत्रक सौंपने वालों में जिलाध्यक्ष प्रमोद सिंह, राजेश कुमार सिंह, संजय सिंह गहरवार, अनिल सिंह, विनय सिंह, कान्हा सिंह गहरवार, प्रियांशु, अखिलेश सिंह, विवेक सिंह, अशोक सिंह, पंकज सिंह, अमरदीप सिंह, दीपेंद्र सिंह, सज्जन सिंह, शशांक सिंह आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
पत्रक में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारियों ने कहा है कि फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली की ओर से बनाई गई फिल्म पद्मावती का नाम बदलकर पद्मावत कर दिया गया है। इसमें ऐसे दृश्यों का फिल्मांकन किया गया है जो ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाते हैं। साथ ही भारतीय आस्था व जनभावना को ठेस पहुंचाते हैं। फिल्म में देश की संस्कृति एवं इतिहास को विकृत करके प्रस्तुत किया गया है। यह भी कहा कि महारानी पद्मावती देश व हिंदू समाज के गौरव एवं मान रही हैं। क्षत्रिय समाज उन्हें देवी तुल्य मानता है, उनका जौहर एवं बलिदान विश्व प्रसिद्ध है। कहा कि कुछ लोग जानबूझ कर क्षत्रिय समाज को आहत करने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रपति से मांग किया है की है कि संसद में सर्वसम्मति से कानून पारित करके ऐसी फिल्में बनाने पर रोक लगाई जाएं। ऐसी फिल्में जो किसी जात व भाषा की भावना एवं आस्था को चोट पहुंचाती हो तो फिल्मों का प्रदर्शन अपराध की श्रेणी में रखा जाए। पत्रक सौंपने वालों में जिलाध्यक्ष प्रमोद सिंह, राजेश कुमार सिंह, संजय सिंह गहरवार, अनिल सिंह, विनय सिंह, कान्हा सिंह गहरवार, प्रियांशु, अखिलेश सिंह, विवेक सिंह, अशोक सिंह, पंकज सिंह, अमरदीप सिंह, दीपेंद्र सिंह, सज्जन सिंह, शशांक सिंह आदि शामिल रहे।
विज्ञापन