{"_id":"5ac66a5c4f1c1bd3618b59e7","slug":"171522952796-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानवेंट स्कूलों में पढ़ने का सपना पूरा कर रही सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानवेंट स्कूलों में पढ़ने का सपना पूरा कर रही सरकार
Updated Fri, 06 Apr 2018 12:08 AM IST
विज्ञापन
मिर्जापुर। शिक्षा का अधिकार के तहत प्रदेश सरकार गरीब बच्चों के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ने का सपना साकार कर रही है। सरकार की योजना के तहत गरीब परिवार के बच्चों का प्रवेश अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में कराया जा रहा है। इसके तहत हुए ऑनलाइन आवेदन के बाद पहले चरण में चयनित 402 बच्चों की सूची प्रवेश के लिए स्कूलों में पहुंच चुकी है। वहीं दूसरे चरण के लिए शहरी क्षेत्रों में ऑनलाइन और ग्रामीण क्षेत्रों में आफलाइन आवेदन की प्रक्रिया चल रही है।
नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम -2009 के तहत अभिभावकों का प्रवेश कराया जा रहा है। सत्र 2018-19 में प्रवेश के लिए पहले चरण में 682 अभिभावकों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इसमें लाटरी से 402 बच्चों का चयन करने के बाद सूची जारी की गई। योजना के तहत गरीब बच्चों के अलावा अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग, सामाजिक दृष्टि से पिछड़ा वर्ग, एचआइवी पीड़ित, कैंसर पीड़ित और निराश्रित (बेघर) बच्चों को तथा दुर्बल वर्ग के बच्चे (जिनके अभिभावक की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम हो) के अभिभावक आवेदन कर सकते है। शहरी क्षेत्र के अभिभावक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद और ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावक आफलाइन आवेदन की हार्ड कापी बीएसए कार्यालय में जमा करानी होगी। ऐसा नहीं करने पर ऑनलाइन आवेदन रजिस्ट्रेशन स्वत: निरस्त माना जाता है। सरकार की योजना वर्ष 2016-17 मेें लागू हुई थी, जिसमें पहले वर्ष 284 बच्चों का चयन होने के बाद प्रवेश कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2017-18 में कुल 1007 बच्चों का प्रवेश कान्वेंट स्कूलों में कराया गया था। वहीं सत्र 2018-19 में पहले चरण में लाटरी द्वारा चयनित 402 बच्चों का चयन किया गया है। जिला समन्वयक मातेश्वरी प्रसाद ने बताया कि योजना के तहत प्रवेश के लिए प्रत्येक स्कूल में कक्षावार 25 प्रतिशत सीट निर्धारित होता है। इन सीटों पर चयनित बच्चों का प्रवेश होता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में 284, वर्ष 2017 में 1007 और वर्ष 2018 में पहले चरण में प्रवेश के लिए 402 बच्चों का चयन किया गया है।
बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि सरकार गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा देेने की योजना चला रही है। पात्र अभिभावक समय से आवेदन प्रक्रिया पूरी करें जिससे योजना का लाभ उठाया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम -2009 के तहत अभिभावकों का प्रवेश कराया जा रहा है। सत्र 2018-19 में प्रवेश के लिए पहले चरण में 682 अभिभावकों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इसमें लाटरी से 402 बच्चों का चयन करने के बाद सूची जारी की गई। योजना के तहत गरीब बच्चों के अलावा अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग, सामाजिक दृष्टि से पिछड़ा वर्ग, एचआइवी पीड़ित, कैंसर पीड़ित और निराश्रित (बेघर) बच्चों को तथा दुर्बल वर्ग के बच्चे (जिनके अभिभावक की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम हो) के अभिभावक आवेदन कर सकते है। शहरी क्षेत्र के अभिभावक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद और ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावक आफलाइन आवेदन की हार्ड कापी बीएसए कार्यालय में जमा करानी होगी। ऐसा नहीं करने पर ऑनलाइन आवेदन रजिस्ट्रेशन स्वत: निरस्त माना जाता है। सरकार की योजना वर्ष 2016-17 मेें लागू हुई थी, जिसमें पहले वर्ष 284 बच्चों का चयन होने के बाद प्रवेश कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2017-18 में कुल 1007 बच्चों का प्रवेश कान्वेंट स्कूलों में कराया गया था। वहीं सत्र 2018-19 में पहले चरण में लाटरी द्वारा चयनित 402 बच्चों का चयन किया गया है। जिला समन्वयक मातेश्वरी प्रसाद ने बताया कि योजना के तहत प्रवेश के लिए प्रत्येक स्कूल में कक्षावार 25 प्रतिशत सीट निर्धारित होता है। इन सीटों पर चयनित बच्चों का प्रवेश होता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में 284, वर्ष 2017 में 1007 और वर्ष 2018 में पहले चरण में प्रवेश के लिए 402 बच्चों का चयन किया गया है।
विज्ञापन
बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि सरकार गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा देेने की योजना चला रही है। पात्र अभिभावक समय से आवेदन प्रक्रिया पूरी करें जिससे योजना का लाभ उठाया जा सके।
विज्ञापन