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बीएचयू बरकछा
Updated Sat, 01 Sep 2018 12:24 AM IST
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प्रो. वीएन मिश्र का घेराव करते छात्र
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मिर्जापुर। बीएचयू के बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के नेचुरोपैथी एंड योगा साइंसेज (बीएनवाईएस) के छात्रों ने शुक्रवार को ओपीडी संचालन की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे एमएस प्रो. विजय नाथ मिश्र का घेराव किया। छात्रों ने कहा कि परिसर में बीएनवाईएस का कोर्स तो चल रहा है लेकिन इसका कोई अस्पताल नहीं है जिससे वे प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे हैं। अस्थायी शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई चल रही है। नाराज छात्राओं ने हो-हल्ला भी किया। वहीं डीन प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी ने पर्याप्त सुविधाएं मिलने तक बीएनवाईएस कोर्स सस्पेंड करने की बात कही है। कहा कि इस मुद्दे पर कोई फैसला कुलपति ही करेंगे।
बैचलर आफ नेचुरौपैथी एंड योगा साइंसेज का कोर्स बरकछा में 2012 में शुरू किया गया था। साढ़े पांच साल का कोर्स कर दो बैच पास आउट हो चुके हैं। कोर्स शुरू करते समय छात्रों को बताया गया था कि बरकछा परिसर में नेचुरौपथी का सौ बेड का अस्पताल खुलेगा जहां उन्हें सीखने को मिलेगा। अब तक ये अस्पताल नहीं बन पाया। इस संबंध में छात्र बीएचयू के कुलपति और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल से भी मिल चुके हैं। हर जगह से उन्हें आश्वासन ही मिला। छात्रों को पता चला कि नौ सितंबर से हेल्थ सेंटर में ओपीडी शुरू होने के सिलसिले में सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक आए हैं तो छात्रों का दल हेल्थ सेंटर पहुंचकर एमएस प्रो. विजयनाथ मिश्र का घेराव किया। छात्रों ने एमएस से कहा कि वे कोर्स तो कर रहे हैं लेकिन अस्पताल न होने से वह प्रायोगिक कार्य नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उनका भविष्य अधर में है। छात्रों की मांग थी कि अगर बरकछा में पांच सौ बेड का अस्पताल बने तो उसके साथ ही सौ बेड का नेचुरौपैथी का भी अस्पताल बने। एमएस ने छात्रों को आश्वासन दिया था कि नौ सितंबर को केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ओपीडी का शुभारंभ करने आएंगे। उस दौरान छात्रों की मांग मंत्री और कुलपति के समक्ष रखी जाएगी। घेराव करने वालों में अश्विनी मिश्र, आदित्य पांडेय, अनूप सैनी, सुमित, गोविंद, देव वर्मा, सुशील, मिथिलेश, भागवत प्रसाद मिश्र, चंदन आदि शामिल थे।
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कोर्स पर खर्च होते हैं तीन लाख से अधिक : बरकछा परिसर में वर्तमान में 120 छात्र बैचलर आफ नेचुरौपैथी एंड योगा साइंसेज की पढ़ाई कर रहे हैं। साढ़े पांच साल का कोर्स करने में तकरीबन तीन लाख से ज्यादा का खर्च होता है। प्रायोगिक की सुविधा न होने से छात्रों का कोर्स अधूरा रहता है। शुक्रवार को ही डीन प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी भी बरकछा आए थे। छात्रों ने अपनी समस्या के बाबत उनसे बात की तो उन्होंने पूरी सुविधाएं मिलने तक कोर्स को सस्पेंड करने की बात कही। यह भी कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसला कुलपति ही करेंगे।
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बैचलर आफ नेचुरौपैथी एंड योगा साइंसेज का कोर्स बरकछा में 2012 में शुरू किया गया था। साढ़े पांच साल का कोर्स कर दो बैच पास आउट हो चुके हैं। कोर्स शुरू करते समय छात्रों को बताया गया था कि बरकछा परिसर में नेचुरौपथी का सौ बेड का अस्पताल खुलेगा जहां उन्हें सीखने को मिलेगा। अब तक ये अस्पताल नहीं बन पाया। इस संबंध में छात्र बीएचयू के कुलपति और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल से भी मिल चुके हैं। हर जगह से उन्हें आश्वासन ही मिला। छात्रों को पता चला कि नौ सितंबर से हेल्थ सेंटर में ओपीडी शुरू होने के सिलसिले में सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक आए हैं तो छात्रों का दल हेल्थ सेंटर पहुंचकर एमएस प्रो. विजयनाथ मिश्र का घेराव किया। छात्रों ने एमएस से कहा कि वे कोर्स तो कर रहे हैं लेकिन अस्पताल न होने से वह प्रायोगिक कार्य नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उनका भविष्य अधर में है। छात्रों की मांग थी कि अगर बरकछा में पांच सौ बेड का अस्पताल बने तो उसके साथ ही सौ बेड का नेचुरौपैथी का भी अस्पताल बने। एमएस ने छात्रों को आश्वासन दिया था कि नौ सितंबर को केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ओपीडी का शुभारंभ करने आएंगे। उस दौरान छात्रों की मांग मंत्री और कुलपति के समक्ष रखी जाएगी। घेराव करने वालों में अश्विनी मिश्र, आदित्य पांडेय, अनूप सैनी, सुमित, गोविंद, देव वर्मा, सुशील, मिथिलेश, भागवत प्रसाद मिश्र, चंदन आदि शामिल थे।
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कोर्स पर खर्च होते हैं तीन लाख से अधिक : बरकछा परिसर में वर्तमान में 120 छात्र बैचलर आफ नेचुरौपैथी एंड योगा साइंसेज की पढ़ाई कर रहे हैं। साढ़े पांच साल का कोर्स करने में तकरीबन तीन लाख से ज्यादा का खर्च होता है। प्रायोगिक की सुविधा न होने से छात्रों का कोर्स अधूरा रहता है। शुक्रवार को ही डीन प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी भी बरकछा आए थे। छात्रों ने अपनी समस्या के बाबत उनसे बात की तो उन्होंने पूरी सुविधाएं मिलने तक कोर्स को सस्पेंड करने की बात कही। यह भी कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसला कुलपति ही करेंगे।
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