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भीषण गर्मी में टंकी से उबलता पानी देख भड़की आशाएं
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राजगढ़। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रशिक्षण के लिए आई आशाओं ने शुक्रवार को जमकर हंगामा किया। बल्कि प्रभारी चिकित्साधिकारी के सामने पहुंचकर सूखी पूड़ियां और खाली बोतल के साथ प्रदर्शन किया। आरोप था कि दोपहर में लंच के समय टंकी का गर्म पानी पीने को विवश होना पड़ता है।
यह तब हुआ जब सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर शुक्रवार को महिला हिंसा रोकने पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण चल रहा था। दोपहर लंच के समय आशाओं के सामने जब सूखी पूड़ियां आई तो कुछ आशाओं ने तो चुपचाप ग्रहणकर लिया। लेकिन जब प्यास बुझाने के लिए बोतल के साथ नल टोटी के पास पहुंची तो टंकी से उबलता पानी देखकर वह भड़क उठी। लामबंद हुई आशाएं प्रभारी चिकित्साधिकारी के सामने पहुंचकर न सिर्फ हंगामा मचाने लगी। खाली बोतल के साथ हंगामा मचाते हुए प्रदर्शन कर दिया। महिलाओं ने कहा, भीषण गर्मी में वैसे ही सभागार में बैठना कठिन है, उपर से प्यास बुझाने तक की व्यवस्था नहीं है। आशाओं ने प्रशिक्षण के नाम पर आए धन का बंदरबाट किए जाने का आरोप लगाया। कहा अबतक हम बहुत अन्याय सहन कर चुके पर अब नहीं करेंगी। जब हम अपनी रक्षा और सुरक्षा नहीं कर सकते तो दुसरों की कहां तक कर सकते हैं। आशाओं के उग्र प्रदर्शन को देख प्रभारी चिकित्साधिकारी अपने कक्ष की ओर भाग खड़े हुए। प्रदर्शन के दौरान हेमलता, शकुंतला, माधुरी, विमला, इंद्रावती, कमला, सोना देवी, आशा, निर्मला, संजू, शांति, प्रभावती, सुशीला, जीरा, श्याम दुलारी, अनिता, रंजना, सुमन, सव्या, शशी प्रभा, शीला, चिरौंजी सहित दर्जनों की संख्या में आशा कार्यकत्री मौजूद रहीं।
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यह तब हुआ जब सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर शुक्रवार को महिला हिंसा रोकने पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण चल रहा था। दोपहर लंच के समय आशाओं के सामने जब सूखी पूड़ियां आई तो कुछ आशाओं ने तो चुपचाप ग्रहणकर लिया। लेकिन जब प्यास बुझाने के लिए बोतल के साथ नल टोटी के पास पहुंची तो टंकी से उबलता पानी देखकर वह भड़क उठी। लामबंद हुई आशाएं प्रभारी चिकित्साधिकारी के सामने पहुंचकर न सिर्फ हंगामा मचाने लगी। खाली बोतल के साथ हंगामा मचाते हुए प्रदर्शन कर दिया। महिलाओं ने कहा, भीषण गर्मी में वैसे ही सभागार में बैठना कठिन है, उपर से प्यास बुझाने तक की व्यवस्था नहीं है। आशाओं ने प्रशिक्षण के नाम पर आए धन का बंदरबाट किए जाने का आरोप लगाया। कहा अबतक हम बहुत अन्याय सहन कर चुके पर अब नहीं करेंगी। जब हम अपनी रक्षा और सुरक्षा नहीं कर सकते तो दुसरों की कहां तक कर सकते हैं। आशाओं के उग्र प्रदर्शन को देख प्रभारी चिकित्साधिकारी अपने कक्ष की ओर भाग खड़े हुए। प्रदर्शन के दौरान हेमलता, शकुंतला, माधुरी, विमला, इंद्रावती, कमला, सोना देवी, आशा, निर्मला, संजू, शांति, प्रभावती, सुशीला, जीरा, श्याम दुलारी, अनिता, रंजना, सुमन, सव्या, शशी प्रभा, शीला, चिरौंजी सहित दर्जनों की संख्या में आशा कार्यकत्री मौजूद रहीं।
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