{"_id":"5ac122794f1c1b95618b4de5","slug":"141522606713-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धूमधाम से हुआ महाघटा अभिषेक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धूमधाम से हुआ महाघटा अभिषेक
Updated Mon, 02 Apr 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विंध्याचल। वैशाख प्रतिपदा के दिन रविवार को श्रद्धा के साथ जगत जननी मां विंध्यवासिनी मंदिर, अष्टभुजा, कालीखोह स्थित मां काली का महाघटा अभिषेक किया गया। जयघोष के साथ हजारों भक्तों ने गंगा से घड़ों में पानी भर कर मां के मंदिरों की सफाई की। इस कार्य में बाहर से आए भक्त भी लगे रहे। देर रात मां की निकासी निकाली गई।
विंध्य धाम में सुबह मंगला आरती के बाद साढे़ नौ बजे तक मां के दर्शन और पूजन का दौर चलता रहा। इसके बाद दर्शन पूजन स्थगित कर दिया गया। विंध्याचल के लोगों के अलावा बाहर से आये हजारों भक्त कंधे पर घड़ा लेकर गंगा घाटों पर पहुंचे। गुदारा घाट, पक्का घाट, दीवान घाट पर भक्तों की लंबी कतार लगी हुई थी। लगभग दस बजे से एक बजे तक मां के मंदिर का घटाभिषेक हुआ। श्रद्धा विश्वास के साथ माता के भक्त मां गंगा में गोता लगा कर मिट्टी के पात्र घड़ा एवं विभिन्न जलपात्र में गंगा जल भर उस पात्र पर माता का नाम, ओम, स्वास्तिक बना कर विभिन्न मंत्र लिख कर फूल माला कलावा बांध कर मां विंध्यवासिनी के दरबार में जलाभिषेक करने पहुंचे थे। प्राचीन समय से मिट्टी के घड़े का जल चढ़ाने के बाद लोग अपने घर ले जाकर उस घड़े का पानी पूरे परिवार को पिलाते हैं। मान्यता है कि यह जल पीने से लोग साल भर स्वस्थ रहते हैं और तमाम तरह की बीमारियां मां दूर होती हैं और माता का प्रकोप परिवार में नहीं होता। मां की कृपा पूरे परिवार पर बनी रहती है। तमाम भक्त जिसकी मन्नतें पूरी हो जाती हैं वे पांच, 11 से लेकर 51 घड़े तक मां गंगा के तट से जल भर कर मां विंध्यवासिनी के दरबार में अभिषेक करते हैं। मां विंध्यवासिनी के साथ-साथ विंध्य क्षेत्र के सभी मंदिरों में सफाई की गई। देर रात श्री विंध्य पंडा समाज के तत्वावधान में विशेष निकासी पूजन किया गया ताकि पूरे क्षेत्र को सकारात्मक ऊर्जा मिल सके। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र में कुछ ऐसे साधक आते हैं और ऐसी अघोर साधना करते हैं। इससे नकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र में प्रभावित कर देती हैं। इसी नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के लिए निकासी निकाली गई जो तीन किलोमीटर दक्षिण दिशा में जा कर समाप्त हुई।
विज्ञापन
विंध्य धाम में सुबह मंगला आरती के बाद साढे़ नौ बजे तक मां के दर्शन और पूजन का दौर चलता रहा। इसके बाद दर्शन पूजन स्थगित कर दिया गया। विंध्याचल के लोगों के अलावा बाहर से आये हजारों भक्त कंधे पर घड़ा लेकर गंगा घाटों पर पहुंचे। गुदारा घाट, पक्का घाट, दीवान घाट पर भक्तों की लंबी कतार लगी हुई थी। लगभग दस बजे से एक बजे तक मां के मंदिर का घटाभिषेक हुआ। श्रद्धा विश्वास के साथ माता के भक्त मां गंगा में गोता लगा कर मिट्टी के पात्र घड़ा एवं विभिन्न जलपात्र में गंगा जल भर उस पात्र पर माता का नाम, ओम, स्वास्तिक बना कर विभिन्न मंत्र लिख कर फूल माला कलावा बांध कर मां विंध्यवासिनी के दरबार में जलाभिषेक करने पहुंचे थे। प्राचीन समय से मिट्टी के घड़े का जल चढ़ाने के बाद लोग अपने घर ले जाकर उस घड़े का पानी पूरे परिवार को पिलाते हैं। मान्यता है कि यह जल पीने से लोग साल भर स्वस्थ रहते हैं और तमाम तरह की बीमारियां मां दूर होती हैं और माता का प्रकोप परिवार में नहीं होता। मां की कृपा पूरे परिवार पर बनी रहती है। तमाम भक्त जिसकी मन्नतें पूरी हो जाती हैं वे पांच, 11 से लेकर 51 घड़े तक मां गंगा के तट से जल भर कर मां विंध्यवासिनी के दरबार में अभिषेक करते हैं। मां विंध्यवासिनी के साथ-साथ विंध्य क्षेत्र के सभी मंदिरों में सफाई की गई। देर रात श्री विंध्य पंडा समाज के तत्वावधान में विशेष निकासी पूजन किया गया ताकि पूरे क्षेत्र को सकारात्मक ऊर्जा मिल सके। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र में कुछ ऐसे साधक आते हैं और ऐसी अघोर साधना करते हैं। इससे नकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र में प्रभावित कर देती हैं। इसी नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के लिए निकासी निकाली गई जो तीन किलोमीटर दक्षिण दिशा में जा कर समाप्त हुई।
विज्ञापन