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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mirzapur News ›   135 millimeters of rain in three days, the highest rainfall in October in 15 years with 271.5 mm

Mirzapur News: तीन दिन में 135 मिलीमीटर हुई बारिश, 15 साल में अक्तूबर में हुई सबसे अधिक 271.5 एमएम बरसात

Fri, 31 Oct 2025 12:56 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 31 Oct 2025 12:56 AM IST
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135 millimeters of rain in three days, the highest rainfall in October in 15 years with 271.5 mm
राजगढ़ क्षेत्र में पानी में डूबी काटकर खेतो में पड़ी धान की फसल।- संवाद।
मिर्जापुर। मोंथा चक्रवात के प्रकोप के कारण बुधवार की देर रात में शुरू हुई तेज बारिश बृहस्पतिवार को सुबह नौ बजे तक होती रही। लालगंज में सबसे कम और चुनार क्षेत्र में सबसे अधिक बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार तीन दिन में 135 मिलीमीटर बारिश हुई है।
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15 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने के कारण धान की फसल बर्बाद हो गई है। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा भू-भौतिकी विभाग बीएचयू वाराणसी के नोडल अधिकारी प्रो. रविशंकर सिंह व तकनीकी अधिकारी (मौसम वैज्ञानिक) शिव मंगल सिंह ने बताया कि अक्टूबर महीने में साल 2010 से 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 में सबसे अधिक 271.5 मिलीमीटर बारिश हुई है।
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वैज्ञानिकों ने सक्रिय मोंथा चक्रवात के प्रभाव से आसमान में बादल छाए रहने के साथ हल्की वर्षा तथा तेज गरज-चमक की संभावना जताई है। 31 अक्तूबर को भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी की है।
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चना, मटर, मसूर की बोआई भी प्रभावित :
बेमौसम बरसात से धान और बाजरा की फसल तो बर्बाद हो गई है। चना, मटर, मसूर की बोआई भी प्रभावित हो रही है। हलिया क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। तेज हवाओं के झोके से धान की फसलें गिर गईं हैं।

सोनगढ़ा, राजपुर, सिकटा, बैधा, थोथा, नौगवा, कोलहा, बीरपुर, पवारी कला, पवारी खुर्द, बरबसा, बनवा, मझिगवां, गड़बड़ा, छतरिहा, हलिया सहित पूरे क्षेत्र में चार दिन से लगातार बारिश से काटकर रखी धान की फसलें चौपट हो गई हैं। ड्रमंडगंज क्षेत्र में कई दिनों से तेज हवा के साथ हो रही बारिश के कारण खेतों में पककर तैयार हो चुकी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे मंहगी लागत लगाकर धान की खेती करने वाले किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। नौगवां (अमहा) निवासी किसान कन्हैया पटेल, परमानंद पटेल, रामचंद्र पटेल ने बताया कि बेमौसम की बारिश और हवा के कारण खेत में गिरी और काटकर पड़ी धान की फसल अब खेत में अंकुरित होकर नष्ट हो रही है।
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