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वैज्ञानिक युग में मनुष्य चांद पर है लेकिन शांति नहीं है:चिन्मयानंद
Updated Sat, 07 Oct 2017 12:59 AM IST
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मिर्जापुर। भक्तों के प्रेम से विवश होकर भगवान अवतरित होते हैं। समाज के हर वर्ग को भागवत कथा सुननी चाहिए। आज के वैज्ञानिक युग में मनुष्य चांद पर पहुंच गया है, लकिन उसके पास शांति नहीं है। राजा परिक्षित के ऊपर कलयुग सवार होना, वामन अवतार, नरसिंग अवतार आदि कथा का रसपान चिन्मयानंद बापू ने सिटी क्लब में चल रहे भागवत कथा के चौथे दिन सुनाई।
उन्होंने कहा कि कथा श्रवण में कोई भेदभाव नहीं है। भागवत कथा सभी वर्ग के लोगों को सुनना चाहिए। आज के आधुनिक युग में मनुष्य भले ही चांद तक पहुंच गया है, लेकिन सब कुछ होते हुए भी मनुष्य के पास शांति नही है। शांति प्राप्त करने के लिए लोग पूरी दुनिया में भटकते हैं, जबकी शांति मात्र भागवत कथा के श्रवण से पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने वालों का हर दुख दर्द दूर हो जाता है। महाभारत में पांडवों को स्वर्गारोहण और परिक्षित के जन्म एवं कलयुग का निग्रह और राजा परिक्षित के ऊपर कलयुग के सवार होने पर उनके द्वारा समीक ऋषि के अपमान की कथा सुनाई। इस दैैरान बापू ने जड़ भरत, अजामिल, नरसिंग अवतार, वामन अवतार, मत्स्य अवतार, राम अवतार की कथा सुनाई। उसके बाद धूमधाम के साथ भगवान श्री कृष्ण की जन्मोत्सव मनाया गया। कथा मु मुख्य अजमान अखिलेश मिश्रा, रोहित शुक्ला, निलेश शुक्ला, केके दूबे, हरिराम सिंह, रमाकांत दूबे आदि मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि कथा श्रवण में कोई भेदभाव नहीं है। भागवत कथा सभी वर्ग के लोगों को सुनना चाहिए। आज के आधुनिक युग में मनुष्य भले ही चांद तक पहुंच गया है, लेकिन सब कुछ होते हुए भी मनुष्य के पास शांति नही है। शांति प्राप्त करने के लिए लोग पूरी दुनिया में भटकते हैं, जबकी शांति मात्र भागवत कथा के श्रवण से पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने वालों का हर दुख दर्द दूर हो जाता है। महाभारत में पांडवों को स्वर्गारोहण और परिक्षित के जन्म एवं कलयुग का निग्रह और राजा परिक्षित के ऊपर कलयुग के सवार होने पर उनके द्वारा समीक ऋषि के अपमान की कथा सुनाई। इस दैैरान बापू ने जड़ भरत, अजामिल, नरसिंग अवतार, वामन अवतार, मत्स्य अवतार, राम अवतार की कथा सुनाई। उसके बाद धूमधाम के साथ भगवान श्री कृष्ण की जन्मोत्सव मनाया गया। कथा मु मुख्य अजमान अखिलेश मिश्रा, रोहित शुक्ला, निलेश शुक्ला, केके दूबे, हरिराम सिंह, रमाकांत दूबे आदि मौजूद रहे।
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