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तालाब तो खुदे लेकिन पानी नदारत

Thu, 29 Jun 2017 12:39 AM IST
Updated Thu, 29 Jun 2017 12:39 AM IST
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तालाब तो खुदे लेकिन पानी नदारत
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मिर्जापुर। गांवों में तालाब तो खोदे गए हैं लेकिन उनमें पानी ही नदारद है। इस साल सिंचाई विभाग ने तालाबों में पानी ही नहीं भरवाया। तमाम तालाबों पर सूखे होने के कारण लोगों ने अतिक्रमण करना शुरू कर दिया है। उनका आकार में सिकुड़ता चला जा रहे हैं। प्रशासन एक तरफ नए तालाब खोदने पर जोर दे रहा है जबकि मौजूदा तालाबों पर तालाबों पर अतिक्रमण हटाने के प्रति जरा भी संजीदा नहीं है।
सिंचाई, भूजल स्तर बढ़ाने और पशुओं को पानी उपलब्ध कराने के लिए तालाबों और पोखरों का निर्माण कराया जाता है। मगर तालाबों में पानी न हो तो सभी मकसद विफल हो जाते हैं। जिले में 2288 तालाब हैं। उनमें बरसाती पानी भरता था लेकिन ज्यादातर तालाबों की जल संग्रह की प्रणाली नष्ट हो गई है। हर साल गर्मी के दिनों में उनमें नहरों से पानी भरा जाता था। मगर इस साल तालाबों को भरने की समुचित व्यवस्था नहीं होने से तालाबों की तलहटी से धूल उड़ रही है। सदर तहसील के विकास खंड सिटी में लगभग 200, पहाड़ी में 142, कोन में 38, छानबे में 317 तथा मझवां में 275 तालाब हैं। वहीं चुनार तहसील के विकास खंड सीखड़ में 93, नरायनपुर में 252, जमालपुर में 327 तथा राजगढ़ में 107 तालाब हैं। इसी प्रकार मड़िहान तहसील में पड़ने वाले राजगढ़ में 52 तथा पटेहरा कला में 138 तालाब तथा लालगंज तहसील के विकास खंड लालगंज में 147 तथा हलिया में 200 तालाब हैं। इन तालाबों को बनाने और इनके जीर्णोद्घार पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। जिनमें से लगभग 300 तालाबों पर अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं। वहीं मनरेगा के तहत खोदे गए लगभग 716 तालाबों की सीबीआई द्वारा जांच की जा रही है। सीबीआई जांच के चलते इस वर्ष महज 36 तालाबों का ही जीर्णोद्घार कराया गया है।
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तालाबों पर मनबढ़ों का कब्जा
पड़री। विकास खंड पहाड़ी में 142 तालाबों में वर्तमान समय में धूल उड़ रही है। जिससे पशुपालकों के सामने पशुओं को पानी के लिए मात्र बेलवन नदी ही सहारा बची है। बरसात नहीं हुई तो वह भी सूखने के कगार पर पहुंच जाएगी । वर्तमान समय में 30 तालाबों पर मनबढ़ों द्वारा कब्जा किया गया है। जिससे बरसात का पानी तालाबों में नही पहुंच पाता है। फलस्वरूप बरसात के दो चार महीने बाद ही तालाब सूखने लगते हैं। गर्मी के दिनों में धूल उड़ने लगता है। पिछले वर्ष जिला प्रशासन द्वारा तालाबों को भरने की व्यवस्था की गई लेकिन इस वर्ष अभी तक तालाबों को भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिससे ग्रामीणों की आस ईश्वर पर टिकी हुई है।
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90 फीसदी तालाबों में पानी नहीं
जिगना। मनरेगा के तहत 85 तालाबों की खुदाई करा कर आदर्श तालाब बनाया गया है। वर्तमान समय में 90 फीसदी तालाबों में पानी नहीं है। क्षेत्र के विजयपुर, पाली, सुमतिया, चेहरा, कामापुर, सिहावल सहित कई गांवों में तालाब सूखे पड़े हैं जिससे पशु को भी पिलाने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है।
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