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आरटीओ विभाग पर दलालों का कब्जा
Updated Wed, 14 Jun 2017 12:47 AM IST
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मिर्जापुर। चंदौली के एआरटीओ आएस यादव के पकड़ने जाने के बाद जिले के आरटीओ विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सतर्क हो गए हैं। अब चोरी छिपे गलत कार्य हो रहे हैं। सूत्रों की माने तो दलाल भी कार्यालय से दूरी बना लिए हैं। हालांकि अभी भी विभाग में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। गाड़ी छुड़ाने से लेकर लाइसेंस बनवाने तक का काम दलाल ही कराते हैं।
बता दें कि जनपद के जसोवर स्थित संभागीय परिवहन विभाग में दलालों का कब्जा हो गया था। फार्म विरतरण से लेकर लाइसेंस बनवाने व अन्य कार्य दलालों के ही माध्यम से कराया जाता था। जिससे उसके एवज में हजारों रुपया आवेदकों से वसूला जाता है। बगैर पैसे के कोई काम नहीं होता था। कई सालों से विभाग में जमे लिपिक खुद अधिकारी बन गए हैं। बिना उनकी मर्जी के अधिकारी भी कुछ नहीं कर पाते हैं। लाइसेंस बनवाने में निर्धारित शुल्क से तीन सौ रुपये अधिक लिया जाता है। इसके अलावा अन्य कार्य में भी शुल्क निर्धारित किया गया है। गत दिनों मामले की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी बिमल कुमार दूबे खुद आम आदमी बन कर विभाग की हकीकत जानने पहुंच गए थे। लाइन में खड़े होकर लाइसेंस बनवाने लगे इसी बीच एक कर्मचारी ने उनको पहचान लिया। जिससे विभाग में हड़कंप मच गया था। जिलाधिकारी के छापेमारी के बाद दलाल विभाग से गायब हो गए हैं। उधर सूत्रों की मानें तो पूर्व सरकार में बालू और गिट्टी लदे वाहनों से लाल व हरा कार्ड विरतण कर इंट्री फीस वसूली जाती थी। फिलहाल यह खेल जिले में बंद चल रहा है।
बता दें कि जनपद के जसोवर स्थित संभागीय परिवहन विभाग में दलालों का कब्जा हो गया था। फार्म विरतरण से लेकर लाइसेंस बनवाने व अन्य कार्य दलालों के ही माध्यम से कराया जाता था। जिससे उसके एवज में हजारों रुपया आवेदकों से वसूला जाता है। बगैर पैसे के कोई काम नहीं होता था। कई सालों से विभाग में जमे लिपिक खुद अधिकारी बन गए हैं। बिना उनकी मर्जी के अधिकारी भी कुछ नहीं कर पाते हैं। लाइसेंस बनवाने में निर्धारित शुल्क से तीन सौ रुपये अधिक लिया जाता है। इसके अलावा अन्य कार्य में भी शुल्क निर्धारित किया गया है। गत दिनों मामले की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी बिमल कुमार दूबे खुद आम आदमी बन कर विभाग की हकीकत जानने पहुंच गए थे। लाइन में खड़े होकर लाइसेंस बनवाने लगे इसी बीच एक कर्मचारी ने उनको पहचान लिया। जिससे विभाग में हड़कंप मच गया था। जिलाधिकारी के छापेमारी के बाद दलाल विभाग से गायब हो गए हैं। उधर सूत्रों की मानें तो पूर्व सरकार में बालू और गिट्टी लदे वाहनों से लाल व हरा कार्ड विरतण कर इंट्री फीस वसूली जाती थी। फिलहाल यह खेल जिले में बंद चल रहा है।
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