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देश के गौरवशाली इतिहास को जरूर जानें युवा : सुरेंद्र सिंह
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मेरठ। सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से सोमवार को स्वराज दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता आरएसएस मेरठ प्रांत प्रचार प्रमुख सुरेंद्र सिंह और विशिष्ट वक्ता अरुण जिंदल रहे। सुरेंद्र सिंह ने कहा कि युवाओं को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। युवा भारत के गौरवशाली इतिहास के बारे में जरूर जानें।
इस दौरान समूह संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि हमें नेताजी के अखंड भारत के सपने को साकार करना है। यह कार्य मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं है। संयुक्त भारत गणराज्य को बनाना होगा। इसमें सभी पड़ोसी देश स्वायत्त रूप से शामिल हों, केवल इनकी सेना, मुद्रा, विदेश नीति तथा संचार व्यवस्था कॉमन हो। इसकी पहल के लिए सभी राष्ट्रों को आगे आना होगा।
मुख्य वक्ता सुरेंद्र सिंह ने कहा कि छात्र नेताजी सुभाषचंद्र बोस के मूल्यों का पालन करके अपना जीवन साकार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें गौरवशाली इतिहास से अवगत होना जरूरी है ताकि हम देश को आजाद कराने के लिए बलिदान देने वाले महापुरुषों को श्रद्धांजलि दे सकें। उन्होंने ने कहा कि नेताजी भारत के पहले युवा थे, जिसने आइसीएस की परीक्षा पास करने के बाद भी उसे ज्वाइन नहीं किया था। वे गुलामी के समझौते को स्वीकार नहीं करना चाहते थे।
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अरुण जिंदल ने कहा कि नेताजी ने ब्रिटिश सैनिकों से लड़ते हुए भारत की पावन धरती पर पहली बार अपना झंडा फहराकर अखंड भारत के स्वराज की घोषणा की थी, लेकिन इस दिन को इतिहास में उचित स्थान न मिलने के कारण देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को भुला दिया गया। नेताजी सुभाषचंद्र बोस पीठ के अध्यक्ष डॉ. देशराज सिंह ने स्वराज दिवस का महत्व बताया।
कुलपति मेजर जनरल डॉ जीके थपलियाल ने कहा कि असंख्य महापुरुषों ने अपने खून से देश को सींचकर हमें आजादी दिलाई है। शहीदों को श्रद्धांजलि देकर राष्ट्रहित में योगदान देना हमारा कर्तव्य है। इसके अलावा नेताजी सुभाषचंद्र बोस का संपूर्ण जीवन हमें राष्ट्रप्रेम, नेतृत्व और साहस की सीख देता है। सुभारती विवि ऐसे विभूतियों के जीवन से विद्यार्थियों को निरंतर परिचित करा रहा है।
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इस दौरान समूह संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि हमें नेताजी के अखंड भारत के सपने को साकार करना है। यह कार्य मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं है। संयुक्त भारत गणराज्य को बनाना होगा। इसमें सभी पड़ोसी देश स्वायत्त रूप से शामिल हों, केवल इनकी सेना, मुद्रा, विदेश नीति तथा संचार व्यवस्था कॉमन हो। इसकी पहल के लिए सभी राष्ट्रों को आगे आना होगा।
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मुख्य वक्ता सुरेंद्र सिंह ने कहा कि छात्र नेताजी सुभाषचंद्र बोस के मूल्यों का पालन करके अपना जीवन साकार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें गौरवशाली इतिहास से अवगत होना जरूरी है ताकि हम देश को आजाद कराने के लिए बलिदान देने वाले महापुरुषों को श्रद्धांजलि दे सकें। उन्होंने ने कहा कि नेताजी भारत के पहले युवा थे, जिसने आइसीएस की परीक्षा पास करने के बाद भी उसे ज्वाइन नहीं किया था। वे गुलामी के समझौते को स्वीकार नहीं करना चाहते थे।
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अरुण जिंदल ने कहा कि नेताजी ने ब्रिटिश सैनिकों से लड़ते हुए भारत की पावन धरती पर पहली बार अपना झंडा फहराकर अखंड भारत के स्वराज की घोषणा की थी, लेकिन इस दिन को इतिहास में उचित स्थान न मिलने के कारण देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को भुला दिया गया। नेताजी सुभाषचंद्र बोस पीठ के अध्यक्ष डॉ. देशराज सिंह ने स्वराज दिवस का महत्व बताया।
कुलपति मेजर जनरल डॉ जीके थपलियाल ने कहा कि असंख्य महापुरुषों ने अपने खून से देश को सींचकर हमें आजादी दिलाई है। शहीदों को श्रद्धांजलि देकर राष्ट्रहित में योगदान देना हमारा कर्तव्य है। इसके अलावा नेताजी सुभाषचंद्र बोस का संपूर्ण जीवन हमें राष्ट्रप्रेम, नेतृत्व और साहस की सीख देता है। सुभारती विवि ऐसे विभूतियों के जीवन से विद्यार्थियों को निरंतर परिचित करा रहा है।