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योगेश तो मोहरा, अफसर और सफेदपोश भी शामिल

Mon, 26 Sep 2016 07:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Mon, 26 Sep 2016 07:09 PM IST
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yogesh to mohra
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
 कैंट बोर्ड की भर्ती में घूस लेता पकड़ा गया सेनेटरी इंस्पेक्टर योगेश यादव महज एक मोहरा है। इस घूसखोरी में कई अहम किरदार और सामने आ रहे हैं। इसमें विभागीय लोगों के अलावा सफेदपोश भी हैं। सीबीआई रिमांड पर योगेश से जो जानकारी हासिल हो रही है, वह चौंकाने वाली है। एक सीट की बोली तो 22 लाख रुपये तक पहुंची। उसकी डील भी हुई। सीबीआई को योगेश की जेब से एक डायरी मिली है। जिसमें घूस से जुड़ी जानकारी और किरदारों का जिक्र है। मौखिक रूप से योगेश ने कुछ अहम जानकारी दी हैं। भर्ती ही नहीं इसके अलावा कई अन्य मामलों में भी डील के बारे में जानकारी सामने आई है।
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योगेश यादव सीबीआई के पास दो दिन की रिमांड पर है। शुक्रवार को सीबीआई योगेश को कोर्ट में पेश करेगी। इसके बाद वह योगेश द्वारा दी गई जानकारी और सुबूतों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। सूत्रों के मुताबिक भर्ती में कई पदों पर बोली लगी थी। कई पदों की रकम की डिलीवरी भी हुई। लालकुर्ती क्षेत्र के एक दूधिया के बेटे का चयन होने के नाम पर 22 लाख रुपये की डील हुई। डील में कैंट बोर्ड के एक कर्मचारी का और नाम सामने आया है। डील और डिलीवरी में इसका महत्वपूर्ण योगदान बताया है।
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डायरी खोलेगी राज
बोर्ड भर्ती में सफेदपोशों के नाम भी सामने आ रहे हैं। इन्होंने ने भी बहती गंगा में हाथ धोने में कसर नहीं छोड़ी। कुछ छोटे तो कुछ बड़े लोगों के नाम लिए हैं। एक सफेदपोश के पास साढ़े चार लाख रुपये जाने और कई के पास डेढ़ लाख रुपये जाने की जानकारी सामने आई है। इन सूचनाओं पर टीम काम कर रही है। योगेश के जेब से एक डायरी मिली है। जिसमें भर्ती से जुड़ी डील की अहम जानकारी दर्ज है। कोड वर्ड में डील को दर्ज किया गया था। सूत्रों की माने तो योगेश के पास जो पैसे बरामद किए गए वह उसके हिस्से में आने थे। बाकी डील दूसरे लोग अपनी तरह से कर रहे थे। भर्ती के अलावा भी योगेश ने कई अहम मामलों की जानकारी सीबीआई को दी है। लाइसेंस देने से लेकर म्यूटेशन तक मामले हैं।   
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नियुक्ति प्रक्रिया होल्ड पर
कैंट बोर्ड ने 14 क्लर्क, छह शिक्षक, दो मोटर पंप अटेंडेंट और एक हिंदी ट्रांसलेटर की पद पर नियुक्ति निकाली है। सीबीआई की रेड और रिश्वत पकड़े जाने के बाद बोर्ड ने प्रक्रिया को होल्ड पर रख दिया है। सीबीआई की कार्रवाई आगे बढ़ने के बाद ही बोर्ड प्रक्रिया के बारे में निर्णय करेगा।

घूसखोर सेनेटरी इंस्पेक्टर सस्पेंड
आरोपी सेनेटरी इंस्पेक्टर योगेश यादव को बृहस्पतिवार को कैंट बोर्ड के सीईओ ने सस्पेंड कर दिया। इस कार्रवाई से कैंट बोर्ड के अफसरों और कर्मचारियों में इस समय हड़कंप मचा है। क्योंकि वे सीबीआई के अगले एक्शन के इंतजार में सहमे हैं।
सीबीआई टीम ने बीते मंगलवार को सेनेटरी इंस्पेक्टर योगेश यादव को मोटर पंप अटेंडेंट के पद पर नियुक्ति कराने के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते दबोचा था। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आरोपी के घर पर भी छापा मारा। योगेश की पत्नी गीता यादव जो कैंट बोर्ड के जूनियर हाईस्कूल तोपखाना में शिक्षक हैं, उनका भी खाता और लॉकर चेक किया गया था। सीबीआई गाजियाबाद की विशेष कोर्ट ने बुधवार को आरोपी को दो दिन की रिमांड पर दिया था।
इस रिश्वत कांड में कौन-कौन शामिल हैं और पैसा आगे कहां जाता, इसकी जांच चल रही है। बृहस्पतिवार को सीईओ राजीव श्रीवास्तव ने योगेश यादव को सस्पेंड करने की पुष्टि करते हुए बताया कि सीबीआई मामले में जांच कर रही है और प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए विभागीय जांच नहीं कराई जा रही है। अभी लिखित परीक्षा हुई थी। उत्तर पुस्तिका भी चेक नहीं हुई है। लिखित परीक्षा के बाद स्किल टेस्ट होना है। उसके बाद मेरिट बनती। प्रक्रिया के कई चरण बाकी हैं। सीईओ का कहना है कि योगेश की पत्नी उनसे छुट्टी की मांग को लेकर मिली थी।

पूछताछ पर टिकी नजर
इस कार्रवाई के बाद से कैंट बोर्ड में तमाम चर्चाएं हैं। योगेश पूछताछ में सीबीआई को क्या-क्या बताता है, या कोई खुलासा करता है इस पर सबकी नजर टिकी है। किसी और का नाम सामने आया तो सीबीआई का शिकंजा उस पर भी कसेगा। कैंट बोर्ड दफ्तर के कुछ अधिकारी सहमे हुए हैं। कुछ को डर भी सता रहा है। चर्चा यह है कि योगेश इतने पैसे अकेले अपने दम पर नहीं ले सकता।


अध्यक्ष बनने के बाद बदलाव
योगेश छावनी परिषद कर्मचारी यूनियन का अध्यक्ष भी है। अध्यक्ष बनने के बाद उसके व्यवहार में काफी बदलाव आया था। सेनेटरी इंस्पेक्टर के तौर पर वार्ड चार, पांच और छह के कुछ हिस्सों की सफाई का जिम्मा योगेश पर था। इनमें आबूलेन और सदर बाजार आता है। यहां गंदगी की शिकायतें बोर्ड को मिलती रही थीं।
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