यूपी: कोरोना काल में चीन के वुहान से गांव लौटे योग गुरु, शुरू किया खुद का कारोबार
- - चीन में योग का प्रशिक्षण देते थे कुड़ाना गांव के 25 युवक
- - कोरोना के चलते फरवरी माह में लौट आए थे अधिकांश युवक
- - गांव लौटने के बाद तीन युवकों ने शुरू किया खुद का कारोबार
विस्तार
कोरोना महामारी में अपने गांव कुड़ाना लौटे योग गुरुओं को फिलहाल वापसी की उम्मीद नहीं है। इसलिए उन्होंने यहीं अपने कारोबार शुरू कर दिए हैं। दो योग प्रशिक्षकों ने क्रशर और कोल्हू लगाकर राब और गुड़ बनाना शुरू कर दिया है जबकि तीसरा फ्लोर मिल लगा रहा है। हालांकि तीनों का कहना है कि इस काम से उन्हें योग प्रशिक्षण के बराबर आय नहीं हो पाएगी लेकिन फिलहाल चीन वापसी की उम्मीद ही नहीं है तो कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा।
गांव कुड़ाना निवासी कुलदीप मलिक पुत्र ब्रजवीर सिंह, कुलदीप पुत्र देशपाल, विकास कुमार चीन के वुहान शहर में योग का प्रशिक्षण देते थे। चीन में कोरोना के चलते तीनों फरवरी माह में गांव लौटकर आए थे। तब से फ्लाइट बंद होने के कारण वापस चीन नहीं जा सके। नौ माह बाद भी वापसी की उम्मीद न देख उन्होंने अपने कारोबार शुरू कर दिए हैं।
कुलदीप ने खांडसारी इकाई लगाई है और इसमें राब तैयार करते हैं। वह बताते हैं कि सात साल चीन में रहकर योग का प्रशिक्षण दिया। महामारी के दौर में गांव आए थे, अब वापस जाने की उम्मीद नहीं नजर आ रही।
करीब 80 लाख रुपये इन्वेस्ट कर खांडसारी इकाई की स्थापना की है। वह बताते हैं कि चीन में उनकी मासिक आमदनी लगभग दो लाख रुपये थी लेकिन खांडसारी इकाई से इतनी आमदनी नहीं होगी। फिलहाल तो यह भी नहीं कह सकते कि गन्ने का यह सीजन फायदेमंद रहेगा या नहीं।
कुलदीप पुत्र देशपाल बताते हैं कि मार्च तक तो चीन ने ही किसी के आने पर रोक लगा रखी है। घर पर खाली रहने से क्या फायदा। इसलिए करीब डेढ़ माह पहले कोल्हू का संचालन शुरू कर गुड़ बना रहे हैं।
कोल्हू का उन्हें कोई अनुभव तो नहीं है लेकिन परिवार खेती से जुड़ा है तो उन्हें जानकारी है। वह 2018 में चीन के वुहान शहर में गए थे। वहां पर योग का प्रशिक्षण देते थे लेकिन फरवरी माह में कोरोना महामार के चलते गांव लौटना पड़ा।
विकास लगा रहे फ्लोर मिल
गांव कुड़ाना के ही विकास भी वुहान में योग का प्रशिक्षण देते थे। गांव लौटने के बाद अब उन्होंने खुद का ही काम शुरू करने की ठानी है। परिवार के ईट भट्ठे की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसके साथ ही फ्लोर मिल लगा रहे हैं।
फिलहाल फ्लोर मिल का निर्माण कार्य चल रहा है। मशीनें आदि नहीं लगी हैं। वह बताते हैं कि उन्हें चीन में अच्छी आय थी लेकिन खुद का काम शुरू करने में समय लगेगा। वह शुरुआत तो कर रहे हैं कि किसी भी कारोबार को जमाने में मेहनत और समय लगता है।
गांव के 25 युवा थे चीन में, अब पांच ही रहे
शामली। गांव कुड़ाना को योग गुरुओं के गांव के नाम से जाना जाता है। इस गांव के करीब 25 युवा चीन के बीजिंग, शंघाई, ग्वांगझू एवं वुहान आदि शहरों में रहकर योग का प्रशिक्षण दे रहे थे।
सबसे पहले सन 2001 में गांव से धर्मेंद्र मलिक योग प्रशिक्षक के रूप में चीन गए थे। इसके बाद अन्य युवा भी गए। वर्तमान में चीन में धर्मेंद्र मलिक, सुभाष पुत्र बाबूराम, कपिल पुत्र मांगेराम, ऊधम पुत्र विक्रम, कय्यूम पुत्र इकबाल ही रह गए हैं। अन्य सभी कोरोना महामारी के चलते गांव लौट आए हैं।