अलविदा 2018: पूरा साल हादसों के नाम, मेरठ जोन में गई 2585 लोगों की जान
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साल 2018 अपने अंतिम पड़ाव पर है। सड़क सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन ने तमाम अभियान चलाए, लेकिन मेरठ जोन की सड़कों पर 11 माह में 2585 लोगों की जान चली गई। सड़क दुघर्टनाओं से तो यही लग रहा है कि सड़क सुरक्षा समिति के जो दावे किए गये थे, वह कमजोर रहे। सबसे ज्यादा बुलंदशहर की सड़कों पर लोगों की जान गई है। गौतमबुद्घनगर दूसरे नंबर पर है।
सड़क दुघर्टनाओं को रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस के साथ एनएचएआई, विकास प्राधिकरण, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी की भी जिम्मेदारी है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा मौत हाईवे पर हो रहीं हैं। रोजाना तीन से चार सड़क दुघर्टनाएं होती हैं, जिनमें एक की मौत और करीब चार घायल होते हैं। दुघर्टनाओं के यह आंकड़े वह हैं जिनकी एफआईआर होती है, जबकि बड़ी संख्या ऐसी भी दुघर्टनाओं की हैं, जिनकी कोई शिकायत दर्ज नहीं होती या जिन घायलों की उपचार के दौरान मृत्यु हो जाती है।
ओवर स्पीड में सबसे ज्यादा मौत
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के डॉ. गौरव गुप्ता बताते हैं कि ओवर स्पीड भी सड़क दुघर्टनाओं का एक मुख्य कारण है जिसके कारण हाईवे पर सबसे ज्यादा मौत होती हैं। ब्लैक स्पॉट, भारी वाहन, दो पहिया वाहनों पर बिना हेलमेट भी मौत के कारण हैं।
चलाया जाए प्रभावी अभियान
एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी का कहना है कि सबसे ज्यादा मौत हाईवे पर हो रही हैं। ट्रैफिक पुलिस स्कूल, कॉलेज में ट्रैफिक नियमों के बारे में लगातार जागरूक भी कर रही है। ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जाती है। उनका कहना है कि भारी वाहनों के लिए मेरठ में अमर उजाला द्वारा चलाए गये सफल अभियान से शहर में हादसों की संख्या में कमी हुई है।
हादसों का ब्योरा
जिला मौतें घायल दुर्घटनाएं
- बुलंदशहर 468 676 853
- गौतमबद्धनगर 410 691 980
- मेरठ 394 659 920
- गाजियाबाद 376 713 942
- मुजफ्फरनगर 292 396 502
- सहारनपुर 238 290 386
- हापुड़ 203 289 331
- बागपत 110 227 227
- शामली 94 170 203
(यह आंकड़े ट्रैफिक पुलिस के अनुसार एक जनवरी 2018 से 30 नवंबर 2018 तक के हैं।)
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