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विश्व जल दिवस: काली नदी में बहाया जा रहा छह करोड़ लीटर शोधित पानी, पढ़िए खास रिपोर्ट
Mon, 22 Mar 2021 03:44 PM IST
कपिल kapil
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Mon, 22 Mar 2021 03:44 PM IST
सार
- काली नदी में बहाया जा रहा छह करोड़ लीटर शोधित पानी
- किसानों को सिंचाई के लिए और धूल पर छिड़काव के काम आ सकता है यह पानी
- पूरी क्षमता से चले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तो बंद हो सकते हैं 40 नलकूप
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पानी
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विस्तार
विश्व जल दिवस पर सरकारी विभाग जल दोहन रोकने और शुद्ध पेयजल लोगों तक पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं। वहीं, सरकारी विभाग ही जल संरक्षण में लापरवाही बरत रहे हैं। शहरी विकास मंत्रलाय द्वारा सीवेज के शोधित पानी के दोबारा उपयोग में लाने के निर्देश के बाद भी नगर निगम ध्यान नहीं दे रहा है।
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कमालपुर में बने 72 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से रोजाना 60 एमएलडी (छह करोड़ लीटर) शोधित पानी काली नदी में बहाया जा रहा है, जबकि शहर के डिवाइडरों पर लगे पौधों की सिंचाई, धुलाई और धूल पर छिड़काव के लिए इस पानी का प्रयोग किया जा सकता है। फिलहाल इन कार्यों के लिए करीब 20 हजार लीटर पानी अलग से खर्च किया जा रहा है।
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सहायक नगर आयुक्त प्रथम ब्रजपाल सिंह का कहना है कि इस पानी को किसानों के खेतों तक पहुंचाने के साथ ही शहर पार्कों आदि तक लाने की कार्ययोजना पर काम हो रहा है। फिलहाल निगम एक साथ तीन टैंकरों में शोधित पानी भरने की व्यवस्था करने में जुटा है।
शहर की जनसंख्या और पानी की मांग
2011 की जनगणना अनुसार 13.05 लाख
वर्तमान जनसंख्या 15.90 लाख
पेयजल की कुल मांग (वेस्टेज सहित) 246.45 एमएलडी
उत्पादित जल की मात्रा
नलकूपों द्वारा 211 एमएलडी
गंगाजल 58 एमएलडी
483 मिनी नलकूप 10 एचपी 91 एमएलडी
कुल मात्रा 360 एमएलडी
15 फीसदी वेस्टेज -57.13 एमएलडी
पेयजल की उपलब्धता 323.76 एमएलडी
प्रति व्यक्ति पेयजल आपूर्ति 203 एलपीसीडी
पूरी क्षमता से चले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तो बंद हो सकते हैं 40 नलकूप
भोला की झाल पर नगर निगम के 100 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को केवल 40 फीसदी क्षमता पर चलाया जा रहा है। प्लांट से जुड़ने वाले चार भूमिगत जलाशयों शास्त्रीनगर, नौचंदी, प्रहलादनगर और बच्चा पार्क को अभी तक नहीं जोड़ा जा सका है। अगर इस प्लांट को पूरी क्षमता से चलाया जाए तो शहर में भूजल दोहन कर रहे 40 नलकूप बंद किए जा सकते हैं। इन नलकूपों द्वारा रोजाना करीब 60 एमएलडी यानी छह करोड़ लीटर पानी बचाया जा सकता है। लेकिन नगर निगम और जल निगम इस और ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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