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Meerut News: विश्व शांति महायज्ञ का शुभारंभ, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा रघुनाथ महल
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पांडव टीले पर स्थित राजा रघुनाथ महल पर होली के अवसर पर विश्व शांति महायज्ञ में शामिल यजमान स्रो
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। प्राचीन पांडव टीले पर स्थित रघुनाथ महल में होली पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय सार्वजनिक विश्व शांति महायज्ञ का सोमवार को विधि-विधान पूर्वक शुभारंभ हो गया। 106वें महायज्ञ एवं वार्षिकोत्सव का आरंभ प्रथम आहुति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
यज्ञ के मुख्य यजमान सुधीर कुमार व अंजू देवी और सह यजमान यशपाल चावला व प्रीति चावला सहित अन्य श्रद्धालु रहे। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य वेदपाल शास्त्री ने मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान प्रारंभ कराया। वेदपाठ व्योम आर्य एवं अमित आर्य द्वारा किया गया। श्रद्धालुओं ने आहुति देकर विश्व शांति व जनकल्याण की कामना की।
आश्रम महंत स्वामी भीष्म रमन ने कहा कि यज्ञ हमारी प्राचीन पौराणिक परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। हमें समय-समय पर ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन करते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि यज्ञ दो प्रकार के होते हैं—एक, अग्नि में घी व हवन सामग्री की आहुति देकर और दूसरा वेद पाठ के माध्यम से। अग्नि यज्ञ से वायु शुद्ध होती है, जिससे जल व वातावरण भी शुद्ध होता है।
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संचालन आश्रम संयोजक वेद प्रकाश रमन ने किया। उन्होंने महंत के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रंगोत्सव के दिन बुधवार को पूर्णाहुति के साथ महायज्ञ का समापन होगा। यज्ञ में अंकित सिवाच, दीपक, विजित, शुभम, रोहन, मोहित कसाना, विनय कौशिक, लोकेश सिरोही सहित अन्य श्रद्धालुओं ने आहुति प्रदान की।
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हस्तिनापुर। प्राचीन पांडव टीले पर स्थित रघुनाथ महल में होली पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय सार्वजनिक विश्व शांति महायज्ञ का सोमवार को विधि-विधान पूर्वक शुभारंभ हो गया। 106वें महायज्ञ एवं वार्षिकोत्सव का आरंभ प्रथम आहुति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
यज्ञ के मुख्य यजमान सुधीर कुमार व अंजू देवी और सह यजमान यशपाल चावला व प्रीति चावला सहित अन्य श्रद्धालु रहे। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य वेदपाल शास्त्री ने मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान प्रारंभ कराया। वेदपाठ व्योम आर्य एवं अमित आर्य द्वारा किया गया। श्रद्धालुओं ने आहुति देकर विश्व शांति व जनकल्याण की कामना की।
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आश्रम महंत स्वामी भीष्म रमन ने कहा कि यज्ञ हमारी प्राचीन पौराणिक परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। हमें समय-समय पर ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन करते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि यज्ञ दो प्रकार के होते हैं—एक, अग्नि में घी व हवन सामग्री की आहुति देकर और दूसरा वेद पाठ के माध्यम से। अग्नि यज्ञ से वायु शुद्ध होती है, जिससे जल व वातावरण भी शुद्ध होता है।
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संचालन आश्रम संयोजक वेद प्रकाश रमन ने किया। उन्होंने महंत के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रंगोत्सव के दिन बुधवार को पूर्णाहुति के साथ महायज्ञ का समापन होगा। यज्ञ में अंकित सिवाच, दीपक, विजित, शुभम, रोहन, मोहित कसाना, विनय कौशिक, लोकेश सिरोही सहित अन्य श्रद्धालुओं ने आहुति प्रदान की।