UP: वर्क फ्राॅम होम का फ्लैट कल्चर पर असर, सपनों का आशियाना बनवाने से पहले इस बात का ध्यान रख रहे लोग
कोरोना काल के बाद बढ़े वर्क फ्राॅम होम के कल्चर से मकानों के निर्माण में भी बदलाव आया है। वास्तु के आधार पर भी निर्माण पर जोर दिया जा रहा है वहीं घर पर ऑफिस जैसी फीलिंग देने वाली बैठक बनवाने का चलन बढ़ा है।
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घर के नक्शे को लेकर लोगों की सोच में काफी बदलाव आया है। कोरोना काल के बाद बढ़े वर्क फ्रॉम होम के कल्चर के बाद लोग अब घर की बैठक को ऐसा रूप दे रहे हैं कि वहां बैठकर काम करने में ऑफिस वाली फीलिंग आए। इसके साथ ही अब नक्शा तैयार कराते समय प्रवेश द्वार, लॉबी, लिविंग एरिया और ओपन एरिया को ज्यादा स्पेश देने की मांग है।
वास्तु के अनुसार निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। टैरिस गार्डन को प्राथमिकता से नक्शे में शामिल किया जा रहा है। यह बदलाव आर्किटेक्ट एसोसिएशन के सर्वे में निकलकर सामने आया है।
आर्किटेक्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जागेश कुमार बताते हैं कि लोग ऐसा नक्शा बनाने की मांग कर रहे हैं जिसमें ग्राउंड फ्लोर को किराए पर देने के लिहाज से बेडरूम, किचन और अटैच बाथरूम के साथ ही पार्किंग हो। दूसरे तल पर रिहाइश हो। इसके अलावा फैक्टरी में सर्वेंट क्वार्टर के लिए भी अलग से प्रपोजल तैयार किए जा रहे हैं।
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फ्लैट के प्रति रुझान घटा
मेडा और आवास विकास के मुताबिक लोगों का फ्लैट के रुझान तेजी से घटा है। आलम यह है कि आवास विकास के जागृति विहार एक्सटेंशन में 2304 फ्लैट हैं। लोग इन्हें खरीदने के बाद भी सरेंडर कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में आवास विकास ने फ्लैट की कीमतें कम की है, बावजूद इसके लोगों का रुझान इस ओर नहीं बढ़ा है।
घर बनवाने में ये आए बदलाव
पहले
-रसोई घर पिछले हिस्से में मुख्य द्वार की सीध में बनाई जाती थी।
-पौधे बालकनी या छत पर रखे जाते थे, भीतर कुछ प्लांट का ही था चलन।
-घर के मध्य में आंगन के पार बाथरूम बनाया जाता था।
अब
-घर में सेपरेट कमरा अटैच बाथरूम।
-धूप और हवा के लिए हर कमरे में प्रॉपर बैंड वेंटीलेशन और ओपन स्पेस भी बनवा रहे।
-मुख्य द्वार के पास पार्किंग, रेस्ट रूम और सटकर रसोई।
-वर्क फ्रॉम के चलन में आने से ऑफिस की फीलिंग को बैठक को ऑफिस जैसा लुक।
-वास्तु के हिसाब से निर्माण का चलन बढ़ा।
-घर के नक्शे में टैरेस गार्डन और फैक्टरी के ओपन स्पेस में भी गार्डन।
रैपिड कॉरीडोर के तेजी से आयाम लेने का असर घरों के नक्शों पर दिख रहा है। लोग ग्राउंड फ्लोर में पार्किंग के साथ ही सेपरेट रूम सेट तैयार करवा रहे हैं। दूसरी मंजिल के लिए सीढि़यां बाहर से लेना चाहते हैं। -देवेंद्र मोहन शर्मा, आर्किटेक्ट
लिविंग एरिया और लॉबी पहले छोटे ही होते थे, लेकिन अब लोगों की सोच बदली है। सूरज की रोशनी घर में आए, इसलिए लिविंग रूम और लॉबी का क्षेत्र बढ़ गया है। छत पर टेरिस गार्डन बनवाना चाहते हैं। -चिराग गुप्ता, अध्यक्ष मेरठ आर्किटेक्ट एसोसिएशन