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Meerut News: बोलीं महिलाएं-जनप्रतिनिधियों ने बनाई दूरी अधिकारियों की करनी का दंड भोग रहे परिवार
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मेरठ..कंवलजीत..सेंट्रल मार्किट प्रकरण में सेक्टर 2 में धरने पर बैठे स्थानीय लोग महिलाओं ने संभा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शास्त्रीनगर के परिवार चिंता में डूबे है। 44 भवनों पर सीलिंग की कार्रवाई के बाद अब मकानों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटकती देख लोगों के पसीने छूट रहे हैं। हालत यह है कि भविष्य की चिंता में कई घरों में चूल्हे तक नहीं जल रहे हैं और लोग घर के बाहर बैठकर रातें गुजारने को मजबूर हैं।
अमर उजाला की टीम शनिवार को शास्त्रीनगर के परिवारों के बीच पहुंची तो महिलाओं का सब्र टूट गया। सवाल पूछते ही उनकी आंखों से आंसू छलक आए और गला रुंध गया। महिलाओं ने एक ही सवाल दोहराया- दुकानों पर तो सील लगा दी, अब अगर मकान भी टूटेंगे तो हम कहां जाएंगे? बच्चों का क्या होगा? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के सांसद, विधायक और मंत्रियों ने संकट की इस घड़ी में उनसे दूरी बना ली है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीनगर के निवासी स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। जिस आशियाने को उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी लगाकर बनाया आज उसे ही अवैध बताकर तोड़ने की तैयारी है जिससे पूरे क्षेत्र में हताशा और आक्रोश का माहौल है।
अधिकारियों की करनी भर रहे हैं परिवार
आवास विकास के भ्रष्ट अधिकारियों की करनी का फल हमारे परिवार भुगत रहे हैं। हमारे संस्थानों को सील किया जा रहा है और मकानों को तोड़ने की धमकी दी जा रही है लेकिन उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही जिनकी शह पर यह सब बना। -सिम्मी निवासी, सेक्टर-2
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हमारे ऊपर आफतों का पहाड़ टूट गया है। कारोबार गया और अब आशियाने की बारी है। इस आदेश के बाद मोहल्ले के अधिकतर घरों में खाना नहीं बन रहा है। सरकार को हमारी सुध लेनी चाहिए। -अरुणा
मेरा मात्र 25 मीटर का मकान है। पेट काटकर और पाई-पाई जोड़कर इसे खरीदा था। अब अधिकारी कह रहे हैं कि मकान गलत बना है और इसे तोड़ा जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो हम बर्बाद हो जाएंगे। नेताओं ने भी हमारा साथ छोड़ दिया है। -कृष्णा
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अमर उजाला की टीम शनिवार को शास्त्रीनगर के परिवारों के बीच पहुंची तो महिलाओं का सब्र टूट गया। सवाल पूछते ही उनकी आंखों से आंसू छलक आए और गला रुंध गया। महिलाओं ने एक ही सवाल दोहराया- दुकानों पर तो सील लगा दी, अब अगर मकान भी टूटेंगे तो हम कहां जाएंगे? बच्चों का क्या होगा? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के सांसद, विधायक और मंत्रियों ने संकट की इस घड़ी में उनसे दूरी बना ली है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीनगर के निवासी स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। जिस आशियाने को उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी लगाकर बनाया आज उसे ही अवैध बताकर तोड़ने की तैयारी है जिससे पूरे क्षेत्र में हताशा और आक्रोश का माहौल है।
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अधिकारियों की करनी भर रहे हैं परिवार
आवास विकास के भ्रष्ट अधिकारियों की करनी का फल हमारे परिवार भुगत रहे हैं। हमारे संस्थानों को सील किया जा रहा है और मकानों को तोड़ने की धमकी दी जा रही है लेकिन उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही जिनकी शह पर यह सब बना। -सिम्मी निवासी, सेक्टर-2
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हमारे ऊपर आफतों का पहाड़ टूट गया है। कारोबार गया और अब आशियाने की बारी है। इस आदेश के बाद मोहल्ले के अधिकतर घरों में खाना नहीं बन रहा है। सरकार को हमारी सुध लेनी चाहिए। -अरुणा
मेरा मात्र 25 मीटर का मकान है। पेट काटकर और पाई-पाई जोड़कर इसे खरीदा था। अब अधिकारी कह रहे हैं कि मकान गलत बना है और इसे तोड़ा जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो हम बर्बाद हो जाएंगे। नेताओं ने भी हमारा साथ छोड़ दिया है। -कृष्णा