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बिना बीमा के सरकारी वाहन, कौन जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Mar 2017 03:28 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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स्थानीय निकायों के वाहन बिना बीमा के दौड़ रहे हैं। सरकारी विभाग होने के कारण इनका रजिस्ट्रेशन तो नि:शुल्क हो जाता है। लेकिन बीमा कराने के नाम पर निकाय प्रबंधन पूरी तरह लापरवाही कर जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि यदि इन वाहनों से कोई दुघर्टना हो जाये तो पीड़ित को क्लेम कहां से मिलेगा।
जिले में एक नगर निगम, दो नगर पालिकाएं और 10 नगर पंचायतें हैं। प्रत्येक नगर पंचायतों में कूड़ा उठाने वाले और पानी के टैंकर आदि सहित छोटे बड़े औसतन 10-10 वाहन हैं। जबकि दोनों पालिकाओं में यह संख्या 70 से ज्यादा है। वहीं, निगम के पास तमाम तरह के वाहनों की संख्या करीब 175 है। इस तरह जिले में स्थानीय निकायों के पास करीब पौने चार सौ वाहन हैं।
जरूरी नियम भी दरकिनार
शासनादेश के अनुसार प्रत्येक सरकारी वाहन का पंजीकरण आरटीओ से नि:शुल्क होता है। कोई रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जाता। लेकिन सरकारी नंबर पर जारी इन वाहनों का पंजीकरण करने में विभाग इतना दयावान हो जाता है कि बीमे के जरूरी नियम को भी दरकिनार कर देता है और फिर इन वाहनों की सड़कों पर फिटनेस या बीमा आदि की जांच भी नहीं होती है।
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व्यावसायिक होगा बीमा
यदि निकाय अपने वाहनों का बीमा कराए तो वह व्यावसायिक वाहन के तौर पर होगा। ऐसे में औसतन एक वाहन का बीमा एक वर्ष के लिए लगभग बीस हजार रुपये में होगा। ऐसे में स्थानीय निकाय के वाहनों का प्रति वर्ष बीमा कराने के लिए करीब 7 करोड़ रुपयों की जरूरत होगी। जिसे बचाने के लिए निकाय वाहनों का बीमा नहीं होता।
जंग खा रहा वाहन
नगर निगम के एक वाहन से थाना नौचंदी क्षेत्र में दुघर्टना हो गयी थी। बीमा न होने के कारण यह वाहन कोर्ट से आज तक रिलीज नहीं हो पाया और थाने में खड़ा जंग खा रहा है।
कौन देगा क्लेम
यदि नगर निगम के इन वाहनों से कोई दुघर्टना होती है और इसमें जनता या विभाग के व्यक्ति को क्षति पहुंचती है तो इसका जवाब किसी के पास नहीं है कि उसका क्लेम कौन और किस मद से देगा। क्योंकि एक भी वाहन का बीमा नहीं है।
तीन दिन पहले ही लापरवाही
नगर निगम ने अभी कुछ वाहन खरीदे हैं। लेकिन इनका भी बीमा नहीं है। रजिस्ट्रेशन के लिए विभाग में कागज दे दिए गए। लेकिन बीमा एक का भी नहीं है। ऐसे में एक बार फिर से बिना बीमा के वाहनों की एक और खेप सड़कों पर उतारने की तैयारी है।
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जिले में एक नगर निगम, दो नगर पालिकाएं और 10 नगर पंचायतें हैं। प्रत्येक नगर पंचायतों में कूड़ा उठाने वाले और पानी के टैंकर आदि सहित छोटे बड़े औसतन 10-10 वाहन हैं। जबकि दोनों पालिकाओं में यह संख्या 70 से ज्यादा है। वहीं, निगम के पास तमाम तरह के वाहनों की संख्या करीब 175 है। इस तरह जिले में स्थानीय निकायों के पास करीब पौने चार सौ वाहन हैं।
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जरूरी नियम भी दरकिनार
शासनादेश के अनुसार प्रत्येक सरकारी वाहन का पंजीकरण आरटीओ से नि:शुल्क होता है। कोई रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जाता। लेकिन सरकारी नंबर पर जारी इन वाहनों का पंजीकरण करने में विभाग इतना दयावान हो जाता है कि बीमे के जरूरी नियम को भी दरकिनार कर देता है और फिर इन वाहनों की सड़कों पर फिटनेस या बीमा आदि की जांच भी नहीं होती है।
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व्यावसायिक होगा बीमा
यदि निकाय अपने वाहनों का बीमा कराए तो वह व्यावसायिक वाहन के तौर पर होगा। ऐसे में औसतन एक वाहन का बीमा एक वर्ष के लिए लगभग बीस हजार रुपये में होगा। ऐसे में स्थानीय निकाय के वाहनों का प्रति वर्ष बीमा कराने के लिए करीब 7 करोड़ रुपयों की जरूरत होगी। जिसे बचाने के लिए निकाय वाहनों का बीमा नहीं होता।
जंग खा रहा वाहन
नगर निगम के एक वाहन से थाना नौचंदी क्षेत्र में दुघर्टना हो गयी थी। बीमा न होने के कारण यह वाहन कोर्ट से आज तक रिलीज नहीं हो पाया और थाने में खड़ा जंग खा रहा है।
कौन देगा क्लेम
यदि नगर निगम के इन वाहनों से कोई दुघर्टना होती है और इसमें जनता या विभाग के व्यक्ति को क्षति पहुंचती है तो इसका जवाब किसी के पास नहीं है कि उसका क्लेम कौन और किस मद से देगा। क्योंकि एक भी वाहन का बीमा नहीं है।
तीन दिन पहले ही लापरवाही
नगर निगम ने अभी कुछ वाहन खरीदे हैं। लेकिन इनका भी बीमा नहीं है। रजिस्ट्रेशन के लिए विभाग में कागज दे दिए गए। लेकिन बीमा एक का भी नहीं है। ऐसे में एक बार फिर से बिना बीमा के वाहनों की एक और खेप सड़कों पर उतारने की तैयारी है।