कौन हैं अनिल? : योगी सरकार में बने मंत्री, BJP-RLD गठबंधन ने दलित चेहरे पर चला बड़ा दांव, चुनाव में दिखेगा असर
UP News : योगी सरकार में मंत्री बनाए गए अनुल कुमार आखिर कौन हैं? भाजपा ने उन्हें मंत्री बनाकर पश्चिमी यूपी में दलित कार्ड खेल दिया है।
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रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह ने इंडिया गठबंधन से मुंह मोड़ा तो उत्तर प्रदेश में चुनावी समीकरण ही बदल गए। एनडीए में शामिल हुए रालोद को बारी-बारी से तोहफे पर तोहफे मिल रहे हैं। जहां मोदी सरकार ने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर पूरे चौधरी परिवार को खुश किया था तो वहीं लोकसभा चुनाव के लिए जाटों को भी साधने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है।
वहीं, मंगलवार को योगी के मंत्रिमंडल में रालोद के विधायक अनिल कुमार को मंत्री बनाकर पूरे वेस्ट यूपी में दलिद कार्ड खेल दिया है। मंत्रिमंडल में अनिल कुमार को जगह मिलने से लोकसभा चुनाव में भी असर देखने को मिलेगा। वहीं, चौधरी जयंत ने पीएम मोदी के 400 पार के सपने को साकार करने का इरादा ठान लिया है।
कौन हैं अनिल कुमार
मंत्री बनाए गए अनिल कुमार ने राजनीति का सफर ननिहाल के गांव कसियारा से शुरू किया। मामा जसवीर सिंह गांव के प्रधान और रोहाना गन्ना समिति के चेयरमैन रहे। दो दशक पहले अनिल कुमार यहीं से बसपा की राजनीति में सक्रिय हुए और पहली बार चरथावल से 2007 में टिकट मिलने के बाद विधायक चुने गए थे।
वर्ष 2007 में चरथावल सुरक्षित सीट से बसपा के टिकट पर अनिल कुमार ने 35417 वोट हासिल कर भाजपा के रामपाल सिंह को 1873 मतों से हरा दिया था। दिलचस्प बात यह रही कि तत्कालीन मंत्री उमा किरण सिर्फ 15425 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रही थी।
वर्ष 2012 में परिसीमन के बाद सुरक्षित सीट पुरकाजी बनाई गई। बसपा के टिकट पर अनिल कुमार ने 53491 वोट हासिल किए और कांग्रेस के पूर्व मंत्री दीपक कुमार को 8908 मतों से हराया। सपा प्रत्याशी उमा किरण तीसरे और भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्राची आर्या चौथे स्थान पर रही थीं।
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद साल 2017 में भाजपा की लहर में हुए चुनाव में तीसरी बार बसपा के टिकट पर ही अनिल मैदान में उतरे, लेकिन भाजपा के प्रमोद ऊटवाल के सामने हार गए थे। दूसरे स्थान पर कांग्रेस के पूर्व मंत्री दीपक कुमार और तीसरे स्थान पर अनिल कुमार रहे थे। पूर्व मंत्री उमा किरण की जमानत जब्त हो गई थी।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले अनिल कुमार सपा में शामिल हुए। गठबंधन में पुरकाजी सुरक्षित सीट रालोद के हिस्से में चली गई, जिसके चलते वह रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़े और भाजपा के प्रमोद ऊटवाल को हरा दिया।