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ज्ञान जहां भी मिले, उसे ग्रहण करें : अंश वशिष्ठ
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नर नारायण सेवा संस्थान के तत्वावधान में प्रह्लाद नगर स्थित गीता भवन मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य एवं करुणामयी चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने भक्तों को धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश दिया।
कथा व्यास ने दत्तात्रेय भगवान के 24 गुरुओं की कथा सुनाते हुए कहा कि ज्ञान जहां से भी प्राप्त हो उसे ग्रहण करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति और परिस्थिति से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में भगवान के नाम का स्मरण ही सबसे सरल और श्रेष्ठ साधन है। जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ता है तब भगवान अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं।
सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य को कभी भी दूसरे के धन की इच्छा नहीं करनी चाहिए। सुदामा ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति सच्ची मित्रता और निस्वार्थ भाव रखा। इसके फलस्वरूप भगवान ने उनकी दरिद्रता दूर कर उन्हें समृद्धि प्रदान की। ध्रुवाचार्य वशिष्ठ के निर्देशन में हुए कार्यक्रम में यजमान भावेश मेहता, दीपक बुद्धिराजा, सरदार गुरुप्रीत सिंह और नीरज अरोड़ा रहे।
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मेरठ। नर नारायण सेवा संस्थान के तत्वावधान में प्रह्लाद नगर स्थित गीता भवन मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य एवं करुणामयी चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने भक्तों को धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश दिया।
कथा व्यास ने दत्तात्रेय भगवान के 24 गुरुओं की कथा सुनाते हुए कहा कि ज्ञान जहां से भी प्राप्त हो उसे ग्रहण करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति और परिस्थिति से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में भगवान के नाम का स्मरण ही सबसे सरल और श्रेष्ठ साधन है। जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ता है तब भगवान अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं।
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सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य को कभी भी दूसरे के धन की इच्छा नहीं करनी चाहिए। सुदामा ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति सच्ची मित्रता और निस्वार्थ भाव रखा। इसके फलस्वरूप भगवान ने उनकी दरिद्रता दूर कर उन्हें समृद्धि प्रदान की। ध्रुवाचार्य वशिष्ठ के निर्देशन में हुए कार्यक्रम में यजमान भावेश मेहता, दीपक बुद्धिराजा, सरदार गुरुप्रीत सिंह और नीरज अरोड़ा रहे।
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