कहां जाएं बेघर: रैन बसेरे में आराम फरमा रहे श्वान, सड़कों पर खुले में सोने को मजबूर इंसान, तस्वीर है गवाह
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में आधी रात निरीक्षण पर निकले डीएम उमेश मिश्रा को खताैली के रैन बसेरा यानी आश्रय स्थल की व्यवस्था बेहाल मिली।
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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में आधी रात निरीक्षण पर निकले डीएम उमेश मिश्रा को खताैली के रैन बसेरा यानी आश्रय स्थल की व्यवस्था बेहाल मिली। रात गुजारने के लिए लोगों को दिए गए बिस्तर मैले थे। जबकि बसेरे के बाहर ही लोग खुले आसमान के नीचे सड़क पर सोते मिले।
डीएम ने ईओ पालिका का स्पष्टीकरण तलब किया। खताैली में रैन बसेरे में बिस्तर पर कुत्ता लेटा दिखाई दिया। नगर पालिका क्षेत्र में तीन रैन बसेरे संचालित हो रहे हैं। रेलवे स्टेशन के समीप स्थित रैन बसेरा का संचालन एनजीओ के माध्यम से कराया जा रहा है। पालिका प्रशासन की ओर से एनजीओ को प्रतिमाह तय भुगतान किया जाता है।
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गुरुवार आधी रात डीएम उमेश मिश्र रैन बसेरों की व्यवस्था को परखने के लिए निरीक्षण किया। रेलवे स्टेशन स्थित पालिका के आश्रय स्थल पर पहुंचे। वहां पर 10-12 लोग ठहरे हुए मिले। इनमें एक छत्तीसगढ़ का भी व्यक्ति था, जो सफर के लिए यहां रुका था।
डीएम ने बताया कि निरीक्षण के दौरान आश्रय स्थल पर अव्यवस्था मिली। ईओ पालिका को निर्देश दिए गए हैं कि वह एक सप्ताह के भीतर वहां तमाम व्यवस्था दुरूस्त कराएं। कंबल और रजाईयों का प्रबंध करते हुए बिस्तर गुणवत्तापूर्ण किए जाएं। सुनिश्चित किया जाए कि शहर में सड़कों पर कोई भी बेसहारा व्यक्ति सोता हुआ नहीं पाया जाना चाहिए।
ईओ ने बताया कि एई निर्माण अखंड प्रताप सिंह, टीएस नरेश शिवालिया को कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए थे। एनजीओ आदर्श सेवा समिति से भी स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके बाद रैन बसेरे में मरम्मत और अन्य कार्य शुरू हुए हैं।