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Meerut News: जब कोई नहीं आता तब मेरे घनश्याम आते हैं...
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- श्रद्धापुरी सेक्टर चार और जागृति विहार एक्सटेंशन में हुई श्रीमद्भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। श्रद्धापुरी सेक्टर चार में श्रीमद्भागवत कथा हुई। कथा व्यास आचार्य श्याम सुंदर पांडेय ने जब कोई नहीं आता तब मेरे घनश्याम आते हैं...भजन के साथ कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा के गर्भ की रक्षा की थी।
कथा व्यास ने बताया कि जब अभिमन्यु की वीरगति के बाद उसकी पत्नी उत्तरा गर्भवती थीं। तब अश्वत्थामा ने पांडव वंश को समाप्त करने के उद्देश्य से ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। यह अस्त्र सीधे उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को नष्ट करने के लिए छोड़ा गया। भयभीत होकर उत्तरा ने श्रीकृष्ण की शरण ली और अपने गर्भस्थ शिशु की रक्षा की प्रार्थना की। श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को निष्फल कर दिया। यही बालक आगे चलकर परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुआ। जो पांडव वंश के अंतिम राजा बने।
कथा में राजा परीक्षित जन्म, शुकदेव जन्म, परीक्षित श्राप आदि प्रसंग सुनाए गए। कथा में मुख्य यजमान डॉ. दिनेश और प्रोफेसर विरेंद्र सिंह रहे। कथा में अजय शर्मा, राजेंद्र ठाकुर, जगमोहन, रविंद्र शर्मा, एमएम शर्मा, डॉ. दिनेश, गजेंद्र नैगी, चित्रा रहीं।
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वहीं, जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित वेदांत आश्रम में वेदांत सत्संग समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के तीसरे दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती ने महाराज परीक्षित और कलियुग संवाद का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि परीक्षित ने ऋषि का अपमान किया। ऋषि ने उन्हें सर्पदंश से मृत्यु का श्राप दिया। इसके पश्चात महाराज परीक्षित ने मुनि शुकदेव की शरण ग्रहण कर उनसे जीवन और धर्म से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न किए। स्वामी अभयानंद ने कहा कि जहां अभिमान होता है, वहीं कलियुग का वास होता है। मुख्य यजमान बीडी पांडेय, बीना पांडेय रहीं।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। श्रद्धापुरी सेक्टर चार में श्रीमद्भागवत कथा हुई। कथा व्यास आचार्य श्याम सुंदर पांडेय ने जब कोई नहीं आता तब मेरे घनश्याम आते हैं...भजन के साथ कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा के गर्भ की रक्षा की थी।
कथा व्यास ने बताया कि जब अभिमन्यु की वीरगति के बाद उसकी पत्नी उत्तरा गर्भवती थीं। तब अश्वत्थामा ने पांडव वंश को समाप्त करने के उद्देश्य से ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। यह अस्त्र सीधे उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को नष्ट करने के लिए छोड़ा गया। भयभीत होकर उत्तरा ने श्रीकृष्ण की शरण ली और अपने गर्भस्थ शिशु की रक्षा की प्रार्थना की। श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को निष्फल कर दिया। यही बालक आगे चलकर परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुआ। जो पांडव वंश के अंतिम राजा बने।
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कथा में राजा परीक्षित जन्म, शुकदेव जन्म, परीक्षित श्राप आदि प्रसंग सुनाए गए। कथा में मुख्य यजमान डॉ. दिनेश और प्रोफेसर विरेंद्र सिंह रहे। कथा में अजय शर्मा, राजेंद्र ठाकुर, जगमोहन, रविंद्र शर्मा, एमएम शर्मा, डॉ. दिनेश, गजेंद्र नैगी, चित्रा रहीं।
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वहीं, जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित वेदांत आश्रम में वेदांत सत्संग समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के तीसरे दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती ने महाराज परीक्षित और कलियुग संवाद का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि परीक्षित ने ऋषि का अपमान किया। ऋषि ने उन्हें सर्पदंश से मृत्यु का श्राप दिया। इसके पश्चात महाराज परीक्षित ने मुनि शुकदेव की शरण ग्रहण कर उनसे जीवन और धर्म से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न किए। स्वामी अभयानंद ने कहा कि जहां अभिमान होता है, वहीं कलियुग का वास होता है। मुख्य यजमान बीडी पांडेय, बीना पांडेय रहीं।