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नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी से निकाले जाने पर गरमाई राजनीति, अब इस नेता ने दिया इस्तीफा

Thu, 11 May 2017 12:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Thu, 11 May 2017 12:51 PM IST
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When Nasimuddin Siddiqui was expelled from the party, now this leader resigns
नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी से निकाला

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी के निष्कासन के बाद मेरठ में भी बसपा की राजनीति गरमा गई है। पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष ने भी इस्तीफा दे दिया है। चर्चा है कि कई अन्य बसपाइयों को भी नसीमुद्दीन ने बुलावा भेजा है। हालांकि वर्तमान जिलाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी इसे बसपा सुप्रीमो का बेहतर निर्णय बता रहे हैं। 

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विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद पार्टी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी का विरोध हो रहा था। पिछले माह नसीमुद्दीन मेरठ आए तो यहां पार्टी कार्यालय पर उनका तगड़ा विरोध हुआ। पुतले तक फूंके गए। दरअसल पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप था कि नसीमुद्दीन ने पार्टी में केवल अपने चाहने वालों और अपने बेटे को ही आगे बढ़ाने का काम किया। इससे आम कार्यकर्ता पार्टी से दूर हो गया। चुनावी आंकड़ों से पता चला कि बसपा उम्मीदवारों को दलितों के तो खूब वोट मिले, लेकिन मुस्लिम उनसे कन्नी काट गए। 

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सभी बसपा के लिए कर रहे काम

When Nasimuddin Siddiqui was expelled from the party, now this leader resigns
बसपा नेता ने दिया इस्तीफा

आरोप लगे कि वेस्ट यूपी प्रभारी होने के बावजूद नसीमुद्दीन बसपा को मुस्लिमों का वोट नहीं दिला पाए। इसके अलावा चुनाव के ऐन पहले तक टिकट काटने का दौर चला। ऐसे में वेस्ट यूपी में काम करने के लिए पिछले माह ही पूर्वी उप्र में काम कर रहे सांसद बाबू मुनकाद अली को लगा दिया गया था। निष्कासन के बाद अब मेरठ में भी हलचल है। पूर्व जिलाध्यक्ष अश्वनी जाटव ने भी इस्तीफा दे दिया है। दावे किए जा रहे हैं कि एक दर्जन से ज्यादा कार्यकर्ताओं को नसीमुद्दीन ने बुलाया है। उनसे भी इस्तीफे के लिए कहा जाएगा। देखना यह है कि ऊंट किस करवट बैठता है। 

जिलाध्यक्ष बसपा योगेंद्र जाटव ने कहा कि पूर्व जिलाध्यक्ष अश्वनी जाटव बसपा के नहीं, नसीमुद्दीन के सिपाही थे। तभी तो इस्तीफा दिया है। और कोई कार्यकर्ता इस्तीफा नहीं देगा क्योंकि सभी बसपा के लिए काम कर रहे हैं। नसीमुद्दीन को बाहर करने का बसपा सुप्रीमो का फैसला अच्छा है। 

पार्टी का है शानदार ‌निर्णय 
वहीं पूर्व सांसद हाजी शाहिद अखलाक ने कहा, 'मेरे साथ जो नसीमुद्दीन ने किया था अब वही उसके साथ हुआ। सबसे ज्यादा नसीमुद्दीन ने ही बसपा का नुकसान किया। खुद तो मुस्लिमों को पार्टी से जोड़ नहीं पाए, किसी दूसरे मजबूत मुस्लिम को पार्टी में पैर नहीं जमाने दिए। यह पार्टी का शानदार निर्णय है लेकिन यह और पहले होना चाहिए था। इस निर्णय से पार्टी को लाभ मिलेगा।'

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