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West UP Weather: मार्च में ही मई जैसी गर्मी, गेहूं की फसल पर संकट, किसानों की बढ़ी चिंता
Sat, 14 Mar 2026 03:13 PM IST
Dimple Sirohi
मोहित कुमार,संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
मोहित कुमार,संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Sat, 14 Mar 2026 03:13 PM IST
सार
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मार्च में बढ़ती गर्मी से गेहूं की फसल पर संकट गहराने लगा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार तापमान बढ़ने से दाना भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और उत्पादन में कमी आ सकती है।
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खेतों में लहलहाती गेहूं की फसल।
विस्तार
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम ने इस बार समय से पहले ही करवट ले ली है। फरवरी और मार्च में अपेक्षित बारिश और ठंडक नहीं मिलने से तापमान तेजी से बढ़ रहा है। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल दाना भरने की अहम अवस्था में है, लेकिन बढ़ती गर्मी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यदि जल्द मौसम में बदलाव नहीं हुआ तो अन्नदाता की मेहनत पर असर पड़ सकता है और उत्पादन में गिरावट की आशंका भी जताई जा रही है।
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मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी महीने में सामान्यतः चार से पांच पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होते हैं, जिनसे हल्की बारिश और ठंडक बनी रहती है। इससे खेतों में नमी भी बनी रहती है लेकिन इस बार केवल एक-दो पश्चिमी विक्षोभ ही सक्रिय हुए और वे भी कमजोर रहे। बारिश कम होने और बादल न बनने के कारण तापमान लगातार बढ़ता गया। मार्च के पहले सप्ताह तक कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं हुआ, जिससे मौसम शुष्क बना हुआ है।
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परिणामस्वरूप दिन का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने लगा है, जो गेहूं की फसल के लिए नुकसानदेह माना जाता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राजस्थान क्षेत्र में निचले स्तर पर गर्म हवाएं चल रही हैं। इसके अलावा पहाड़ों पर इस बार अपेक्षित बर्फबारी भी नहीं हुई। ऐसे में वातावरण में नमी कम हो गई और तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
गेहूं की उपज पर पड़ सकता है असर
मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर और बिजनौर जिलों में इस बार गेहूं की बुवाई सामान्य से पहले कर दी गई थी। अब फसल दाना भरने की महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है। इस समय यदि तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है तो दाना अच्छी तरह भरता है और उत्पादन बेहतर मिलता है। लेकिन तापमान 30 डिग्री से ऊपर पहुंचने पर टर्मिनल हीट स्ट्रेस की स्थिति बन जाती है।
इससे पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है और दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। परिणामस्वरूप दाने छोटे और हल्के रह जाते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मार्च में बारिश नहीं हुई तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की उपज में 10 से 20 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। शुक्रवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला पर दिन का अधिकतम तापमान 32.2 और न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर और बिजनौर जिलों में इस बार गेहूं की बुवाई सामान्य से पहले कर दी गई थी। अब फसल दाना भरने की महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है। इस समय यदि तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है तो दाना अच्छी तरह भरता है और उत्पादन बेहतर मिलता है। लेकिन तापमान 30 डिग्री से ऊपर पहुंचने पर टर्मिनल हीट स्ट्रेस की स्थिति बन जाती है।
इससे पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है और दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। परिणामस्वरूप दाने छोटे और हल्के रह जाते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मार्च में बारिश नहीं हुई तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की उपज में 10 से 20 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। शुक्रवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला पर दिन का अधिकतम तापमान 32.2 और न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
किसानों के लिए बचाव के उपाय
कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. एम शमीम का कहना है कि किसान कुछ उपाय अपनाकर गर्मी के प्रभाव को कम कर सकते हैं। खेतों में सिंचाई शाम के समय करने से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है। इसके अलावा फसल पर पुआल या नीम की पत्तियों का हल्का छिड़काव करने से तापमान का असर कम हो सकता है। इन उपायों से ऊष्मा तनाव को लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है।
कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. एम शमीम का कहना है कि किसान कुछ उपाय अपनाकर गर्मी के प्रभाव को कम कर सकते हैं। खेतों में सिंचाई शाम के समय करने से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है। इसके अलावा फसल पर पुआल या नीम की पत्तियों का हल्का छिड़काव करने से तापमान का असर कम हो सकता है। इन उपायों से ऊष्मा तनाव को लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है।