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Meerut News: शाबाश...खेलों के बाद पढ़ाई में भी बेटियों ने बिखेरी सोने की चमक

Thu, 12 Oct 2023 02:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ Updated Thu, 12 Oct 2023 02:55 AM IST
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Well done...after sports, daughters shined in studies also
मेरठ। शाबाश....लाड़ली बेटियों। आपकी हर क्षेत्र में जोश, उत्साह, उमंग, लगन, निष्ठा, प्रतिभा, हुनर से स्वर्णमयी उपस्थित गर्व का एहसास करा रही है। मेरठ की बेटियों का एशियाड में शानदार प्रदर्शन से स्वर्ण पदक हासिल करने के बाद पढ़ाई में भी स्वर्ण पदक जीतने का जश्न जारी है। सीसीएसयू के विभिन्न पाठ्यक्रमों में मिलने वाले 259 गोल्ड मेडल में से 178 स्वर्ण पदक पदकों पर बेटियों के नाम होंगे। सर्वोच्च कुलाधिपति और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल भी बेटियों को मिलेगा।
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अगस्त में पीसीएस-जे में मेरठ के सफल 11 प्रतिभागियों में से नौ बेटियां रहीं। चीन में हुए एशियन गेम्स में भाला फेंक में अन्नू रानी और दौड़ में पारुल चौधरी ने स्वर्ण पदक जीता। शॉटपुट में किरण बालियान ने कांस्य पदक जीता। इन बेटियों की जीत का जश्न अभी जारी है। इसी बीच सीसीएसयू में उपलब्धि हासिल कर बेटियों ने शाबित किया कि वह हर क्षेत्र में आगे हैं। 18 अक्तूबर को सीसीएसयू के 35वें दीक्षांत समारोह में बेटियां अपनी प्रतिभा के दम पर स्वर्णमयी उपस्थिति दर्ज कराने जा रही हैं। विवि के अनुसार दीक्षांत समारोह का सर्वोच्च पुरस्कार कुलाधिपति गोल्ड मेडल हैं, जो एमडीएस की छात्रा प्रियंका मिश्रा को मिलेगा। पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल भी एमकॉम की छात्रा आरजू को मिलेगा। प्रायोजित 64 गोल्ड मेडल में से छात्राओं ने 80 फीसदी यानी 51 मेडल जीते हैं। कुलपति 190 पुरस्कारों में से भी 125 करीब 67 फीसदी गोल्ड मेडल भी छात्राओं को मिलेंगे।
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कड़ी मेहनत और लगन ही सफलता की कुंजी : प्रियंका
आईटीएस डेंटल कॉलेज ग्रेटर नोएडा की छात्रा प्रियंका मिश्रा का मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी में सीसीएसयू का कुलाधिपति गोल्ड मेडल तय हो गया है। मूलरूप से गोहावटी निवासी प्रियंका ने बताया कि उनके पिता भावेश मिश्रा एक कंपनी में कार्यरत हैं और मां चंदना मिश्रा लेक्चरर हैं। उनका कहना है कि क्लास में पढ़ाई के दौरान औसतन आठ घंटे और छट्टी के दिन औसतन 12 घंटे की सेल्फ स्टडीज से गोल्ड मेडल मिला है। बिना कड़ी मेहतन और लगन के किसी भी क्षेत्र सम्मानजनक सफलता नहीं मिलती है। अच्छी किताब या ट्यूटर तभी लाभकारी होते हैं, जब खुद भी गहनता से अध्ययन करें। गोल्ड मेडल मिलने से मैं काफी खुश हूं। क्लीनिकल के साथ-साथ एकेडमिक क्षेत्र में भी काम करना चाहती है।
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