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मानव जाति के कल्याण के लिए स्थापित हुआ आर्य समाज : राजेश सेठी
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- थापरनगर के आर्य समाज मंदिर में हुआ साप्ताहिक सत्संग
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। थापरनगर स्थित आर्य समाज मंदिर में रविवार को हुए साप्ताहिक सत्संग में आर्य समाज के प्रधान राजेश सेठी ने कहा कि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना मानव जाति का कल्याण के लिए की थी।
राजेश सेठी ने कहा कि इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए आर्य समाज के दस नियम बनाए गए। यह संपूर्ण मानवता के हित को देखते हुए तय किए गए। इन नियमों में ईश्वर के गुण, कर्म, स्वभाव और वेदों द्वारा प्रदत्त सार्वजनिक कल्याणकारी ज्ञान शामिल है। उन्होंने बताया कि परस्पर व्यवहार कैसा होना चाहिए। व्यक्तिगत और सामाजिक कर्तव्यों का पालन कैसे करना चाहिए। इसका पूर्ण मार्गदर्शन इन नियमों से मिलता है।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति बिना जाति मत संप्रदाय के भेदभाव के इन नियमों का पालन कर सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है। इसके साथ ही हमें समस्त मानवता के कल्याण की कामना करनी चाहिए। कार्यक्रम में धर्मवीर सिंह, प्रीति सेठी, सुमन आनंद, चांद ग्रोवर, सुभाष एवं विमल मरवाहा ने भजन प्रस्तुत किए।
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इस दौरान आचार्य सत्यप्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान मनोज सिंघल रहे। कार्यक्रम में करुणा सागर बाली, धर्मवीर, चंद्र वासुदेवा, प्रमोद कुमार सिंह, कृष्ण कुमार वर्मा रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। थापरनगर स्थित आर्य समाज मंदिर में रविवार को हुए साप्ताहिक सत्संग में आर्य समाज के प्रधान राजेश सेठी ने कहा कि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना मानव जाति का कल्याण के लिए की थी।
राजेश सेठी ने कहा कि इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए आर्य समाज के दस नियम बनाए गए। यह संपूर्ण मानवता के हित को देखते हुए तय किए गए। इन नियमों में ईश्वर के गुण, कर्म, स्वभाव और वेदों द्वारा प्रदत्त सार्वजनिक कल्याणकारी ज्ञान शामिल है। उन्होंने बताया कि परस्पर व्यवहार कैसा होना चाहिए। व्यक्तिगत और सामाजिक कर्तव्यों का पालन कैसे करना चाहिए। इसका पूर्ण मार्गदर्शन इन नियमों से मिलता है।
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उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति बिना जाति मत संप्रदाय के भेदभाव के इन नियमों का पालन कर सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है। इसके साथ ही हमें समस्त मानवता के कल्याण की कामना करनी चाहिए। कार्यक्रम में धर्मवीर सिंह, प्रीति सेठी, सुमन आनंद, चांद ग्रोवर, सुभाष एवं विमल मरवाहा ने भजन प्रस्तुत किए।
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इस दौरान आचार्य सत्यप्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान मनोज सिंघल रहे। कार्यक्रम में करुणा सागर बाली, धर्मवीर, चंद्र वासुदेवा, प्रमोद कुमार सिंह, कृष्ण कुमार वर्मा रहे।