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55 सौ रुपये लेकर वेब कंपनी ने किया फर्जी वेरीफिकेशन

Sat, 16 Mar 2019 03:51 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Sat, 16 Mar 2019 03:51 AM IST
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Web company has taken Rs 55 hundred rupees for fake verification
मेरठ - फोटो : अमर उजाला

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बीडीएस की छात्रा के प्रमाण पत्रों का फर्जी तरह से वेरीफिकेशन एक वेब कंपनी की तरफ से कराया गया था। छात्रा से 55 सौ रुपये लेकर इस कंपनी ने बिना सीसीएसयू में वेरीफिकेशन कराए खुद रजिस्ट्रार और दूसरे अफसरों के हस्ताक्षर करके कागजात कनाडा भेज दिए। यूनिवर्सिटी वर्ल्ड एजूकेशन सर्विसेज कनाडा ने दोबारा से इन प्रमाण पत्रों की जांच कराई तो विजिलेंस विभाग की पकड़ में पूरा मामला आ गया। यूनिवर्सिटी ने ऐसी कई कंपनियों को ब्लैक लिस्टिड करने की तैयारी कर ली है। यूनिवर्सिटी ने छात्र-छात्राओं से कहा है कि मार्कशीट, डिग्री या ट्रांसक्रिप्ट बनवाने केलिए खुद ही आवेदन करें।
जांच के बाद सामने आया है कि बीडीएस की छात्रा श्वेता को कनाडा में पढ़ाई करने जाना था। इसके लिए उसने कनाडा में ऑनलाइन फार्म भरकर रेफरेंस आईडी लेकर फॉर्म डाउनलोड कर लिया। इस फॉर्म के साथ मार्कशीट, डिग्री और ट्रांसक्रिप्ट को प्रमाणित करके स्पीड पोस्ट से भेजा जाता है। छात्रा ने यूनिवर्सिटी आने की बजाय चौधरी चरण सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफिशयल वेबसाइट पर जाकर ट्रांसक्रिप्ट बनवाने के लिए आवेदन कर दिया। वेब कंपनी की तरफ से उनको फोन कर फीस जमा करने की बात कही गई। एक प्रमाण पत्र के वेरीफिकेशन की फीस सीसीएसयू तीन सौ रुपये ली जाती है लेकिन वेब कंपनी ने कई गुना फीस बताते हुए छात्रा से 55 सौ रुपये जमा करा लिए।
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इसके बाद छात्रा की ट्रांसक्रिप्ट और प्रमाण पत्रों पर कंपनी ने ही खुद रजिस्ट्रार समेत दूसरे कर्मचारियों-अफसरों के भी फर्जी हस्ताक्षर करके बिना सीसीएसयू में आए प्रमाण पत्र कनाडा भिजवा दिए। कनाडा से डब्लूईएस ने सीसीएसयू को छात्रा के प्रमाण पत्रों को ऑनलाइन वेरीफिकेशन के लिए भेजा तो यहां पर फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। दरअसल छात्रा के प्रमाण पत्र तो यहां से सही बताए गए, लेकिन वेरीफिकेशन के सारे हस्ताक्षर फर्जी थे। इसके चलते डब्लूईएस ने छात्रा का फार्म रिजेक्ट कर दिया। छात्रा का कहना है कि चौधरी चरण सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफिसयल लिखकर छात्रों को ठगने वाली कंपनियों पर यूनिवर्सिटी कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है।
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पकड़ में आया मामला
कार्यवाहक रजिस्ट्रार वीपी कौशल का कहना है कि छात्रा ने मौखिक शिकायत की है। यूनिवर्सिटी की चौकसी से यह मामला पकड़ में आ गया है। गूगल पर सीसीएसयू के नाम से कौन-कौन कंपनी इस तरह से वेरीफिकेशन कराने के विज्ञापन दे रही हैं। उनकी लिस्ट निकलवाकर उनको ब्लैक लिस्ट की सूची में डाला जाएगा। इससे पहले भी कई छात्र-छात्राओं के फार्म इन वेब कंपनियों के चक्कर में पड़कर विदेश से कैंसिल हो चुके हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि छात्र-छात्राएं सीधे आकर यूनिवर्सिटी से प्रमाण पत्रों का वेरीफिकेशन कराएं।


ऑनलाइन नहीं होता वेरीफिकेशन
सीसीएसयू में मार्कशीट, डिग्री और ट्रांसक्रिप्ट का वेरीफिकेशन ऑनलाइन नहीं होता है। ऐसे में छात्र-छात्राएं इसको लेकर जागरूक रहें। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के नाम से जो मिलते जुलते नाम गूगल पर हैं, उन पर कतई भी आवेदन न करें। वहां पर अगर कोई छात्र आवेदन करता है तो उसमें यूनिवर्र्सिटी की कोई जिम्मेदारी नहीं होती है। यूनिवर्सिटी प्रति प्रमाण पत्र उसका वेरीफिकेशन करने की महज 300 रुपये ही फीस लेती है। यह फीस कैंपस स्थित बैंक में जमा होती है।
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