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75 वर्षों में हमने खो दिया अपना नैतिक चरित्र : न्यायमूर्ति अजित सिंह
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मेरठ। मेरठ कॉलेज के मूट कोर्ट हॉल में संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में न्यायमूर्ति अजित सिंह ने कहा कि संविधान में राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक स्वतंत्रता दी गई है, लेकिन अब तक नागरिकों को आर्थिक स्वतंत्रता नहीं मिल पाई है। आजादी के 75 वर्षों में हमने अपना नैतिक चरित्र खो दिया है। उन्होंने कहा कि देश की 50 प्रतिशत संपत्ति एक प्रतिशत लोगों के पास है। बाकी 50 प्रतिशत 99 प्रतिशत लोगों के पास है। गांव में रहने वाला दूरस्थ व्यक्ति आज भी आर्थिक एवं अन्य अधिकारों से वंचित है। हमें अपने नैतिक मूल्यों पर बल देना होगा। उन्होंने कहा कि संविधान बनाने वालों ने ऐसा सपने में भी नहीं सोचा होगा कि देश की 80 करोड़ आबादी सरकारी राशन पर निर्भर है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान को समझने के लिए हमें इसकी पृष्ठभूमि में जाना चाहिए। जनवरी 1946 में संविधान सभा का निर्माण हुआ जिसके सदस्यों का चयन चुनाव द्वारा किया गया। कुल 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में अनेक तर्क विर्तकों के पश्चात संविधान बनकर तैयार हुआ। जिसे 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा स्वीकृत किया गया। इस संविधान में भारत के लोगों को ऐसे अनेक अधिकार दिए गए हैं, जो अमेरिका के नागरिकों को भी नहीं मिले थे।
कॉलेज प्राचार्य प्रो. मनोज कुमार रावत ने कहा कि आज का दिन मेरठ कॉलेज के इतिहास में गौरवमयी है। दो न्यायमूर्ति एवं पुरातन छात्र हमारे बीच उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि संविधान से ही हमारे देश का संचालन हो रहा है। आधारभूत संरचना इसका मुख्य गुण है, जिसे बदला नहीं जा सकता। अवैतनिक सचिन विवेक गर्ग ने कहा कि संविधान में हमारे अधिकारों के साथ-साथ दायित्व भी दिए गए हैं। अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल, समन्वयक प्रो. एचएस राय ने भी अपने विचार रखे।
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संविधान में कमजोर वर्ग के लिए है विशेष प्रावधान
संविधान लागू होने के बाद जमींदारी उल्मूलन एवं जोतदारों को भूमि का स्वामित्व देना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे प्रथम संविधान संशोधन के द्वारा पूरा किया गया। संपत्ति के आधार को मौलिक अधिकारों की श्रेणी से निकालकर संवैधानिक अधिकार बना दिया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक आदर्शों के अनुरूप किया है। अंत में निबंध, आशु भाषण और चित्रकला प्रतियोगिता में विजेता छात्र-छात्राओं को ट्रॉफी एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। निबंध प्रतियोगिता में रीतिका एवं मुक्ता भारद्वाज संयुक्त रूप से प्रथम रही। प्रार्थना त्यागी एवं रिंकी निर्मल संयुक्त रूप से द्वितीय और प्रियंका सबरवाल एवं बुसरा अंसारी संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रही।
संचालन प्रो. एमपी वर्मा ने किया। इस दौरान डॉ. कौशल प्रताप सिंह, कृष्ण कुमार गुप्ता, प्रो. धर्मराज राम, प्रो. राजकुमार उपाध्याय, प्रो. संगीता उपाध्याय, प्रो. अनुराग सिंह, प्रो. द्वारिका प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान को समझने के लिए हमें इसकी पृष्ठभूमि में जाना चाहिए। जनवरी 1946 में संविधान सभा का निर्माण हुआ जिसके सदस्यों का चयन चुनाव द्वारा किया गया। कुल 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में अनेक तर्क विर्तकों के पश्चात संविधान बनकर तैयार हुआ। जिसे 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा स्वीकृत किया गया। इस संविधान में भारत के लोगों को ऐसे अनेक अधिकार दिए गए हैं, जो अमेरिका के नागरिकों को भी नहीं मिले थे।
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कॉलेज प्राचार्य प्रो. मनोज कुमार रावत ने कहा कि आज का दिन मेरठ कॉलेज के इतिहास में गौरवमयी है। दो न्यायमूर्ति एवं पुरातन छात्र हमारे बीच उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि संविधान से ही हमारे देश का संचालन हो रहा है। आधारभूत संरचना इसका मुख्य गुण है, जिसे बदला नहीं जा सकता। अवैतनिक सचिन विवेक गर्ग ने कहा कि संविधान में हमारे अधिकारों के साथ-साथ दायित्व भी दिए गए हैं। अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल, समन्वयक प्रो. एचएस राय ने भी अपने विचार रखे।
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संविधान में कमजोर वर्ग के लिए है विशेष प्रावधान
संविधान लागू होने के बाद जमींदारी उल्मूलन एवं जोतदारों को भूमि का स्वामित्व देना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे प्रथम संविधान संशोधन के द्वारा पूरा किया गया। संपत्ति के आधार को मौलिक अधिकारों की श्रेणी से निकालकर संवैधानिक अधिकार बना दिया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक आदर्शों के अनुरूप किया है। अंत में निबंध, आशु भाषण और चित्रकला प्रतियोगिता में विजेता छात्र-छात्राओं को ट्रॉफी एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। निबंध प्रतियोगिता में रीतिका एवं मुक्ता भारद्वाज संयुक्त रूप से प्रथम रही। प्रार्थना त्यागी एवं रिंकी निर्मल संयुक्त रूप से द्वितीय और प्रियंका सबरवाल एवं बुसरा अंसारी संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रही।
संचालन प्रो. एमपी वर्मा ने किया। इस दौरान डॉ. कौशल प्रताप सिंह, कृष्ण कुमार गुप्ता, प्रो. धर्मराज राम, प्रो. राजकुमार उपाध्याय, प्रो. संगीता उपाध्याय, प्रो. अनुराग सिंह, प्रो. द्वारिका प्रसाद आदि मौजूद रहे।