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मिलावट के खेल में हम इतना आगे निकल गए : हुक्का बिजनौरी
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अन्नपूर्णा मंदिर में देर रात आयोजित कवि सम्मेलन।
वेस्ट एंड रोड अन्नपूर्णा चैरिटेबल में होली के अवसर पर हास्य कवि सम्मेलन हुआ। कवि हुक्का बिजनौरी ने कहा कि मिलावट के खेल में हम इतना आगे निकल गए, कीड़े मारने की दवा में भी कीड़े पड़ गए। प्रदेश के चर्चित कवियों ने अपनी पंक्तियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में अनिरूद्ध गोयल ने फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आरके वेलफेयर ट्रस्ट प्रतिनिधि अभिमन्यु ने दीप प्रज्ज्वलित किया। सरस्वती वंदना सुनाते हुए सुदेश यादव दिव्य ने कहा कि तेरे चरणों से नहीं दूर मां, पग धूल सा तेरा दास है। कविता पाठ करते हुए सरधना से आए कवि वीरेंद्र अबोध ने कहा कि मैं फूल बेचता हूं फुटपाथ पर अब भी, कौम का नेता बन गया शराब बेचने वाला।
कार्यक्रम में योगेश मोहन, कवि सौरभ सुमन और बीजेपी नेता विवेक रस्तौगी का सम्मान हुआ। कासगंज से आए कवि डॉ. अजय अटल ने कहा नयन में सागर है वरना अश्रु नमकीन नहीं होते, कंठ में करुणा है वरना, गीत गमगीन नहीं होते। एक के बाद एक कवियों ने कविता पाठ किया। गाजियाबाद से आए डा. स्वदेश यादव ने सुनाया हौसला टूटा बांधने के लिए आया हूं मैं, फूल कांटों में खिलाने के लिए आया हूं मैं। कवयित्री डॉ. निवेदिता शर्मा ने सुनाया खुश्बू सी है कुछ हवाओं में, रंग घुल सा गया फिजाओं में। लौट आया है प्यार का मौसम, फूल खिलते हैं अब निगाहों में।
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इस दौरान डॉ. सुदेश यादव दिव्य, डॉ. ईश्वर चंद्र गंभीर, सौरभ जैन सुमन, प्रदीप अग्रवाल ने भी कविता पाठ किया। कार्यक्रम में अनिरुद्ध गोयल, रवि विश्नोई, अंकित, ऋचा सिंह, रजनीश शर्मा, लता बंसल, अभिमन्यू वशिष्ठ आदि रहे।
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कार्यक्रम में अनिरूद्ध गोयल ने फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आरके वेलफेयर ट्रस्ट प्रतिनिधि अभिमन्यु ने दीप प्रज्ज्वलित किया। सरस्वती वंदना सुनाते हुए सुदेश यादव दिव्य ने कहा कि तेरे चरणों से नहीं दूर मां, पग धूल सा तेरा दास है। कविता पाठ करते हुए सरधना से आए कवि वीरेंद्र अबोध ने कहा कि मैं फूल बेचता हूं फुटपाथ पर अब भी, कौम का नेता बन गया शराब बेचने वाला।
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कार्यक्रम में योगेश मोहन, कवि सौरभ सुमन और बीजेपी नेता विवेक रस्तौगी का सम्मान हुआ। कासगंज से आए कवि डॉ. अजय अटल ने कहा नयन में सागर है वरना अश्रु नमकीन नहीं होते, कंठ में करुणा है वरना, गीत गमगीन नहीं होते। एक के बाद एक कवियों ने कविता पाठ किया। गाजियाबाद से आए डा. स्वदेश यादव ने सुनाया हौसला टूटा बांधने के लिए आया हूं मैं, फूल कांटों में खिलाने के लिए आया हूं मैं। कवयित्री डॉ. निवेदिता शर्मा ने सुनाया खुश्बू सी है कुछ हवाओं में, रंग घुल सा गया फिजाओं में। लौट आया है प्यार का मौसम, फूल खिलते हैं अब निगाहों में।
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इस दौरान डॉ. सुदेश यादव दिव्य, डॉ. ईश्वर चंद्र गंभीर, सौरभ जैन सुमन, प्रदीप अग्रवाल ने भी कविता पाठ किया। कार्यक्रम में अनिरुद्ध गोयल, रवि विश्नोई, अंकित, ऋचा सिंह, रजनीश शर्मा, लता बंसल, अभिमन्यू वशिष्ठ आदि रहे।