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मखदुमपुर मेले को भव्य बनाने में जुटे जिला पंचायत के अधिकारी
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सुरक्षा के लिए बनाए वॉच टावर, पांच को होगा उद्घाटन
हस्तिनापुर। मखदूमपुर गंगा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले चार दिवसीय मेले की तैयारियों का जिला पंचायत के अधिकारियों ने जायजा लिया। उन्होंने तैयारियां अगले दो दिनों में पूर्ण करने और पांच नवंबर को मेले का उद्घाटन कराने की बात कही है।
मेले के लिए पिछले एक सप्ताह से दिन-रात काम चल रहा है। बुधवार को जिला पंचायत के अभियंता के साथ कई अधिकारी गंगा घाट पहुंचे। उन्होंने स्नान घाट, पेयजल व्यवस्था, विद्युत व्यवस्था और रास्ते का निरीक्षण किया। ठेकेदार को सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि इस बार गंगा की अलग-अलग तीन धाराएं प्रवाहित हो रही हैं। पहली धारा पर मेला आयोजित किया जा रहा है। बीते तीन दिनों में जलस्तर कम हो गया है। और पानी कम हुआ तो श्रद्धालुओं को स्नान करने में दिक्कत आ सकती है। श्रद्धालु को गहरे पानी में जाना पड़ेगा। ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से भारी पुलिस बल और पीएसी की मांग की गई है। मेला प्रशासन ने घाट पर दस फीट ऊंचा वॉच टावर बनाया है। मेला परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इंस्पेक्टर ओमप्रकाश चौधरी को मेला प्रभारी बनाया गया है।
फ्लड कंपनी और गोताखोर भी रहेंगे
हस्तिनापुर। मेला स्थल पर पेयजल व्यवस्था विद्युत व्यवस्था और सड़कों को दुरुस्त करने का काम करीब पूर्ण हो चुका है। मुख्य द्वार भी बना दिया गया है। गंगा की रेती में तंबुओं की नगरी बसा दी गई है। दो बड़ी हाइलोजन लाइट गंगा की ओर लगाई गई हैं। जिससे गहरे पानी में जाने वाले श्रद्धालुओं पर नजर रखी जा सके। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पीएसी की फ्लड कंपनी और स्थानीय गोताखोरों की टीमें तैयार की जा रही हैं।
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खेती छोड़ गंगा स्नान को जा रहे किसान
सरधना-सरूरपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए किसानों का कारवां मखदूमपुर के लिए बढ़ने लगा है। बुधवार को भैसा-बुग्गियों और बैलगाड़ियों की लाइन लगी रही। किसानों ने अपने भैंसों और बैलों की जोड़ी को सजा रखा था। क्षेत्र के गांव छुर, छबड़िया, ईकड़ी, पाथौली, भलसोना, दबथुवा आदि गांव के लोग अपने भैंसा बुग्गी से गंगा स्नान मेले के लिए बढ़ते नजर आए। किसानों द्वारा अपने भैंसों और बैलों के ऊपर डाली गई झूल और स्पेशल बुग्गी आकर्षण का केंद्र रही। पेराई सत्र शुरू होने के बाद भी किसान गन्ना छिलाई रोकर गंगा मईया के दर्शन को निकल रहे हैं।
हस्तिनापुर में प्रदूषित जल में स्नान करेंगे श्रद्धालु
हस्तिनापुर। कर्ण घाट स्थित पौराणिक बूढ़ी गंगा पर भी मेले का आयोजन होता है। यहां पर श्रद्धालुओं के स्नान करने के लिए नगर पंचायत ने पर्याप्त व्यवस्था नहीं कराई है। श्रद्धालुओं को यहां महीनों से भरे बारिश के गंदे पानी में ही स्नान करना होगा। नगर पंचायत ने बूढ़ी गंगा पर आयोजित होने वाले मेले के ठेके की नीलामी करीब चार लाख 82 हजार रुपये में की थी। इसके बाद भी मेला स्थल पर पेयजल की व्यवस्था तक नहीं है। कर्ण घाट पर सफाई कार्य नहीं कराया गया है। प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ के आचार्य मुकेश शांडिल्य के अनुसार, कौरवों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने इसी स्थान पर दीपदान किया था। उसके बाद से यहां पर दीपदान की परंपरा चली आ रही है।
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हस्तिनापुर। मखदूमपुर गंगा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले चार दिवसीय मेले की तैयारियों का जिला पंचायत के अधिकारियों ने जायजा लिया। उन्होंने तैयारियां अगले दो दिनों में पूर्ण करने और पांच नवंबर को मेले का उद्घाटन कराने की बात कही है।
मेले के लिए पिछले एक सप्ताह से दिन-रात काम चल रहा है। बुधवार को जिला पंचायत के अभियंता के साथ कई अधिकारी गंगा घाट पहुंचे। उन्होंने स्नान घाट, पेयजल व्यवस्था, विद्युत व्यवस्था और रास्ते का निरीक्षण किया। ठेकेदार को सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि इस बार गंगा की अलग-अलग तीन धाराएं प्रवाहित हो रही हैं। पहली धारा पर मेला आयोजित किया जा रहा है। बीते तीन दिनों में जलस्तर कम हो गया है। और पानी कम हुआ तो श्रद्धालुओं को स्नान करने में दिक्कत आ सकती है। श्रद्धालु को गहरे पानी में जाना पड़ेगा। ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से भारी पुलिस बल और पीएसी की मांग की गई है। मेला प्रशासन ने घाट पर दस फीट ऊंचा वॉच टावर बनाया है। मेला परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इंस्पेक्टर ओमप्रकाश चौधरी को मेला प्रभारी बनाया गया है।
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फ्लड कंपनी और गोताखोर भी रहेंगे
हस्तिनापुर। मेला स्थल पर पेयजल व्यवस्था विद्युत व्यवस्था और सड़कों को दुरुस्त करने का काम करीब पूर्ण हो चुका है। मुख्य द्वार भी बना दिया गया है। गंगा की रेती में तंबुओं की नगरी बसा दी गई है। दो बड़ी हाइलोजन लाइट गंगा की ओर लगाई गई हैं। जिससे गहरे पानी में जाने वाले श्रद्धालुओं पर नजर रखी जा सके। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पीएसी की फ्लड कंपनी और स्थानीय गोताखोरों की टीमें तैयार की जा रही हैं।
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खेती छोड़ गंगा स्नान को जा रहे किसान
सरधना-सरूरपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए किसानों का कारवां मखदूमपुर के लिए बढ़ने लगा है। बुधवार को भैसा-बुग्गियों और बैलगाड़ियों की लाइन लगी रही। किसानों ने अपने भैंसों और बैलों की जोड़ी को सजा रखा था। क्षेत्र के गांव छुर, छबड़िया, ईकड़ी, पाथौली, भलसोना, दबथुवा आदि गांव के लोग अपने भैंसा बुग्गी से गंगा स्नान मेले के लिए बढ़ते नजर आए। किसानों द्वारा अपने भैंसों और बैलों के ऊपर डाली गई झूल और स्पेशल बुग्गी आकर्षण का केंद्र रही। पेराई सत्र शुरू होने के बाद भी किसान गन्ना छिलाई रोकर गंगा मईया के दर्शन को निकल रहे हैं।
हस्तिनापुर में प्रदूषित जल में स्नान करेंगे श्रद्धालु
हस्तिनापुर। कर्ण घाट स्थित पौराणिक बूढ़ी गंगा पर भी मेले का आयोजन होता है। यहां पर श्रद्धालुओं के स्नान करने के लिए नगर पंचायत ने पर्याप्त व्यवस्था नहीं कराई है। श्रद्धालुओं को यहां महीनों से भरे बारिश के गंदे पानी में ही स्नान करना होगा। नगर पंचायत ने बूढ़ी गंगा पर आयोजित होने वाले मेले के ठेके की नीलामी करीब चार लाख 82 हजार रुपये में की थी। इसके बाद भी मेला स्थल पर पेयजल की व्यवस्था तक नहीं है। कर्ण घाट पर सफाई कार्य नहीं कराया गया है। प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ के आचार्य मुकेश शांडिल्य के अनुसार, कौरवों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने इसी स्थान पर दीपदान किया था। उसके बाद से यहां पर दीपदान की परंपरा चली आ रही है।