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झकझोर देंगी ये कहानियां: ...वो मंजर याद आते ही कंपकंपाने लगते हैं लब, रुला देता है इनकी आपबीती का दर्द, गई थी 65 लोगों की जान

Wed, 13 Apr 2022 08:57 AM IST
कपिल kapil आशुतोष भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
आशुतोष भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 13 Apr 2022 08:57 AM IST
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Victoria Park Meerut Kand: Read full panic story of victim families with see photos
विक्टोरिया पार्क मेरठ अग्निकांड। - फोटो : amar ujala

दिल को झकझोर देने वाले विक्टोरिया पार्क अग्निकांड के पीड़ितों के जख्म आज करीब 16 साल बाद भी हरे हैं। उस मनहूस मंजर का जिक्र आते ही पीड़ित परिवारों की आंखें नम हो जाती हैं, लब कंपकंपाने लगते हैं और वो खौफनाक शाम जहन में ताजा हो जाती है। चेहरे पर अपनों से बिछड़ने का गम साफ झलकता है। दर्द बयां करने के लिए अल्फाज कम पड़ने लगते हैं। ...फिर गहरी सांस लेते हैं और खुद की हिम्मत बढ़ाते हुए उस हृदयविदारक घटना के बारे में बताते हैं। अपनों को खोने की सबकी अपनी-अपनी कहानियां और अपनी-अपनी चुभन है। 



भगदड़ में छूट गया पत्नी का हाथ... शव ले गया ड्राइवर 
गढ़ रोड निवासी राकेश गिरधर पत्नी वंदना के साथ खरीदारी कर रहे थे, तभी अचानक कुछ लोग आग-आग चिल्लाते हुए गेट की तरफ दौड़ने लगे। देखते ही देखते छत से प्लास्टिक जलकर टपकने लगी। पंडाल के पिलर पिघलकर गिरने लगे। जमीन पर करंट था। भगदड़ में पत्नी का हाथ छूट गया। तेज धमाकों के साथ एक के बाद एक एसी के कंप्रेशर फटने लगे। चारों तरफ अंधेरा छा गया। किसी तरह निकलकर बाहर आए। बाद में पता चला कि वंदना का शव एक ड्राइवर ले गया था। उस ड्राइवर ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी और वह दिखाना चाहता था कि उसकी मौत विक्टोरिया पार्क हादसे में हो गई। राकेश बताते हैं कि मोर्चरी जाकर आभूषणों से वंदना की पहचान की।

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विपिन और मनोज मिश्रा। - फोटो : amar ujala

धुंआ छंटते ही हर तरफ दिखे जले हुए शव 
सैनिक विहार निवासी मनोज मिश्रा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में कार्यरत हैं। मनोज ने बताया कि मेले में उनका भी स्टॉल था। पंडाल को पूरी तरह एसी बनाया गया था। इसके लिए लोहे के फ्रेम में भारी प्लास्टिक शीट को कसा गया। मजबूत और मोटे कपड़े के साथ प्लास्टिक व रबर लगाई गई, जिसके हवा बाहर न निकाल पाए। वायरिंग जमीन पर बिछाई गई। उसके ऊपर प्लास्टिक की शीट थीं। शॅार्ट सर्किट से पूरा पंडाल आग के शोलों में बदल गया। ऊपर से प्लास्टिक जलकर टपक रही थी और नीचे वायरिंग से करंट फैल गया। जिसके ऊपर जलती हुई प्लास्टिक गिरी वो फिर उठ नहीं पाया। निकास द्वार बहुत छोटा था और बाहर निकलने के लिए कोई मार्ग नहीं था। मनोज ने बताया कि उसके साथ उनके साथी प्रदीप कोहली और फहीम महराज खान भी गंभीर रूप से जल गए थे। 

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विक्टोरिया पार्क अग्निकांड का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

अग्निकांड में चला गया भाई का परिवार 
सदर लक्ष्मी स्टोर के संचालक विपिन ने बताया कि विक्टोरिया पार्क अग्निकांड में उनके भाई आजेश, पत्नी सुमन गर्ग और बेटी प्राची गर्ग की मृत्यु हो गई। बेटे की मृत्यु की सूचना से पूरा परिवार टूट गया। पिता रमेश चंद्र को बड़ा धक्का लगा। आजेश सदर में किराना की दुकान चलाते थे जो बंद हो गई। प्राची एमपीएस गर्ल्स विंग में पढ़ती थी। अग्निकांड में उनकी बहन सविता भी घायल हो गईं थीं। आग लगने की बात काफी देर बाद पता लगी थी। तब पूरा परिवार एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में घूमता रहा।

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राकेश खट्टर। - फोटो : amar ujala

आग की लपटों में झुलस गया पूरा शरीर
बांबे बाजार पॉपुलर इलेक्ट्रानिक्स के संचालक राकेश खट्टर ने बताया कि वह अपने भाई मनोज और बेटी मनीषा के साथ विक्टोरिया पार्क मेले में गए थे। आग लगने पर मेला स्थल से बाहर निकल आए। अग्नि का ताप इनता अधिक था पूरा शरीर झुलस गया। पूरे शरीर के बाल जल गए। बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। चार से पांच साल ठीक होने में लग गए। पंडाल में अंदर आने और बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक छोटा सा ही मार्ग था। जब आग लगी तो पंडाल में लगभग 1500 के आसपास लोग थे। बाहर निकालने के प्रयास में बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए।

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फराह जाफरी - फोटो : amar ujala

चार दिन तक मौत से लड़ते रहे मेरे शौहर, मगर हार गए : फराह
वैली बाजार में रहने वालीं फराह जाफरी इन दिनों ऋषभ एकेडमी में पढ़ाती हैं। उनकी दो बच्चियां हैं, बड़ी बेटी जहरा इंजीनियरिंग कर रही हैं और छोटी अलीना दसवीं में है। फराह ने विक्टोरिया पार्क अग्निकांड में अपने पति अतहर जाफरी (40) को खोया था।

वह बताती हैं कि अतहर एक निजी शिक्षण संस्थान चलाते थे, वह अपने दोस्त के साथ विक्टोरिया पार्क मेले में गए थे। शाम को पता चला कि उनका एक्सीडेंट हो गया है और वह लोकप्रिय अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें यह नहीं बताया गया था कि वह इस हादसे का शिकार हो गए हैं। अस्पताल पहुंची तो देखा बुरी तरह से जले हुए थे। तीन दिन तक वह यहां भर्ती रहे, इसके बाद उन्हें दिल्ली के अस्पताल में शिफ्ट किया गया, लेकिन 14 अप्रैल 2006 को उन्होंने दम तोड़ दिया। तब दोनों बच्चियां छोटी थीं। बड़ी बेटी को थोड़ा याद है, छोटी बेटी को कुछ याद नहीं। मेरे और परिवार के लिए बहुत बड़ा गम है, जिसे अल्फाजों में बयां नहीं किया जा सकता। फराह कहती हैं कि विक्टोरिया पार्क अग्निकांड की लड़ाई लड़ रहे लंदन स्पोर्ट्स वाले संजय गुप्ता ने सगे भाई से ज्यादा उनकी मदद की है। अपनी बहन की तरह उनका और उनके परिवार का ख्याल रखा है। वह और उनका परिवार संजय गुप्ता का शुक्रगुजार हैं।

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