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विक्टोरिया पार्क अग्निकांड: 16 साल पहले का वो खौफनाक मंजर... जब तड़प-तड़पकर मर गए थे लोग, छिन गईं थीं 230 परिवारों की खुशियां

Wed, 13 Apr 2022 01:26 AM IST
कपिल kapil अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 13 Apr 2022 01:26 AM IST
सार

इस खौफनाक अग्निकांड को 16 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इन 230 परिवारों की आंखों के सामने आज भी वह खौफनाक मंजर तैरता है। किसी ने पत्नी को खोया तो किसी के सिर से माता-पिता का साया उठ गया। अपनों को याद कर हर कोई भावुक हो जाता है।

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Victoria Park Fire Case: when 65 people were burnt to death read full story
विक्टोरिया पार्क अग्निकांड का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में विक्टोरिया पार्क में 10 अप्रैल 2006 को कंज्यूमर मेला गुलजार था। दिन ढलने लगा था। लोग घरों की तरफ निकलने वाले थे, तभी शाम 5:40 बजे  पंडाल में आग लगी और बदहवास लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ने लगे। देखते ही देखते करीब 1500 वर्ग मीटर में लगा पंडाल शोलों में बदल गया। लोहे के मजबूत फ्रेम मोम की तरह पिघलकर गिरने लगे। इस भीषण अग्निकांड में 64 जिंदगियां चलीं गईं। करीब 81 लोग गंभीर रूप से झुलस गए और 85 अन्य आग की चपेट में आए।  



इस खौफनाक अग्निकांड को 16 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इन 230 परिवारों की आंखों के सामने आज भी वह खौफनाक मंजर तैरता है। किसी ने पत्नी को खोया तो किसी के सिर से माता-पिता का साया उठ गया। अपनों को याद कर हर कोई भावुक हो जाता है। उम्मीद है कि इंसाफ जरूर मिलेगा। शरीर के जख्म तो भर गए पर अपने से बिछड़ने का गम आज भी ताजा है। पत्नी के साथ मेले में गए मनोज मिश्रा, राकेश गिरधर और राकेश खट्टर बताते हैं कि प्लास्टिक का पंडाल पिघलकर आग का गोला बनकर गिर रहा था। लोग जान बचाने मेन गेट की तरफ भाग रहे थे। आग की लपटों में घिरे कुछ लोग किसी तरह बाहर निकल आए और जमीन पर गिर पड़े। कुछ खुद को बचाने के लिए पास ही पड़े गोबर के ढेर में घुस गए। मेला परिसर के बाहर शहर के लोग भी इकट्ठा हो गए। जिससे जितनी मदद हो सकती थी, सबने की, लेकिन कुछ के लिए बहुत देर हो चुकी थी। मनोरंजन पार्क निवासी नरेश तायल बताते हैं कि शवों की पहचान करना मुश्किल था, जले हुए शरीर देखकर यह अंतर नहीं कर पा रहे थे कि वे पुतले हैं या फिर इंसान।

Victoria Park Fire Case: when 65 people were burnt to death read full story
राकेश गिरधर और वंदना गिरधर परिवार के साथ। - फोटो : amar ujala

नहीं मिली मदद, लोग तड़पकर मर गए 
मेला परिसर के पास पुलिस लाइन की दूरी 200 मीटर से ज्यादा नहीं है। वहां से मदद आने में इतना समय लग गया कि कई लोग तड़पकर मर गए। जो बच पाए, उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पतालों में भी गंभीर रूप से जले हुए मरीजों के लिए बर्न मेडिकल सेंटर नहीं थे। इस वजह से इलाज भी ठीक से नहीं हो पा रहा था। मेले की आग पर काबू पाया गया तो अंदर भी कई लोगों के शव पड़े मिले।

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Victoria Park Fire Case: when 65 people were burnt to death read full story
मेरठ विक्टोरिया पार्क अग्निकांड। - फोटो : amar ujala

बर्बाद हो गए परिवार 
अग्निकांड पीड़ितों की लड़ाई लड़ रहे लंदन स्पोर्ट्स के मालिक संजय गुप्ता के परिवार के पांच सदस्यों की मौत इस हादसे में हो गई थी। यह अग्निकांड दुनिया की नजर में एक हादसा हो सकता है, लेकिन संजय गुप्ता जैसे कई परिवारों की पूरी जिंदगी ही इससे बिखर गई।

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Victoria Park Fire Case: when 65 people were burnt to death read full story
राकेश खट्टर। - फोटो : amar ujala

सरकार और प्रशासन पर लोगों का फूटा गुस्सा
घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी। जनता आक्रोशित थी। तत्कालीन सरकार समाजवादी पार्टी, तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और पुलिस के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। हर जगह विरोध शुरू हो गए थे। मलबा हटाने आए बुलडोजर से लोगों ने कलेक्ट्रेट में तोड़फोड़ कर दी थी। 

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विक्टोरिया पार्क मेरठ अग्निकांड। - फोटो : amar ujala

विक्टोरिया पार्क हादसा : एक नजर
6 अप्रैल 2006- विक्टोरिया पार्क में कंज्यूमर मेले का उद्घाटन।
10 अप्रैल 2006- शाम को विक्टोरिया पार्क में अग्निकांड।
64 लोग मारे गए।
81 लोग गंभीर रूप से झुलसे। 
85 अन्य आग की चपेट में आए। 
6 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में संजय गुप्ता की रिट हुई थी स्वीकार
4 मई 2012 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा उपहार की तर्ज पर मुआवजा दे सरकार।
9 मई 2012 को सरकार ने मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी दो महीने की मोहलत।
वर्ष 2016 : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया।
22 मार्च 2022: सुप्रीम कोर्ट में मुआवजे को लेकर लगातार सुनवाई के आदेश।

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