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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वकीलों की डिग्रियों का वेरिफिकेशन जारी, सीसीएसयू को लेकर खुलासा

Fri, 12 May 2017 02:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Fri, 12 May 2017 02:56 PM IST
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Verification of attorneys' degrees on the order of the Supreme Court, revealing about CCSU
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वकीलों की डिग्रियों का वेरिफिकेशन

मेरठ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन दिनों वकीलों की डिग्रियों का वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। इससे देश भर से प्रति सप्ताह चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में तकरीबन पांच सौ से एक हजार के बीच मामले पहुंच रहे हैं। वेरिफिकेशन के दौरान फर्जी डिग्री से वकील बने लोगों की पकड़ भी होने लगी है। अब तक दो वकीलों की डिग्री फर्जी निकल चुकी है। इन फर्जी वकीलों पर अब बार काउंसिल के स्तर से कार्रवाई की जाएगी। 

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वेरिफिकेशन के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिलों को आदेश जारी किया है कि कचहरी में प्रैक्टिस करने वाले सभी वकीलों की डिग्रियों जांच कराई जाए। वेरिफिकेशन क्लियर होने वाले वकीलों को ही प्रैक्टिस की अनुमति होगी। ऐसे में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में बडे़ पैमाने पर वेरिफिकेशन के मामले पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, पश्चिम बंगाल की बार काउंसिलों ने कई वकीलों की एलएलबी और बीए एलएलबी की डिग्रियां सत्यापन के लिए भेजी हैं। 
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नहीं मिला कोई रिकॉर्ड
वेरिफिकेशन में दो वकीलों की डिग्री फर्जी निकली है। पहले मामले में, जिस वकील की डिग्री फर्जी निकली है, उसे पश्चिम बंगाल बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भेजा है। यह डिग्री बीए एलएलबी 2015 की है। स्टूडेंट का नाम शादत हुसैन है। उसका रोल नंबर बीएल 9958265 है। सत्यापन में पता चला कि ऐसा कोई रिकार्ड विवि के पास नहीं है। दूसरे मामले में विवि ने इस केस में अपनी रिपोर्ट संबंधित बार काउंसिल को भेज दी है। एक और केस में डिग्री फर्जी निकली है। उस पर विवि ने अभी फाइनल रिपोर्ट नहीं लगाई है।

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फर्जी डिग्री के तार विवि से जुड़े

Verification of attorneys' degrees on the order of the Supreme Court, revealing about CCSU
वकीलों की फर्जी डिग्रियों का मामला

सत्यापन में डिग्री फर्जी मिलने का सीसीएसयू में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार अन्य कोर्स में डिग्रियां फर्जी मिल चुकी हैं। ऐसे में कहीं न कहीं की तार विवि से जुडे़ हुए हैं। फर्जी डिग्रियां बनाने वाले गिरोह ने जो डिग्रियां और मार्कशीट बनाई गई हैं, वह हू-ब-हू असली जैसी हैं। खास बात यह है कि सीसीएसयू के नाम पर डिस्टेंस मोड की डिग्री भी फर्जी तैयार करने के केस पकड़े गए हैं। जबकि विवि डिस्टेंस मोड में कोई कोर्स नहीं चलाता है। 

लॉ के कॉलेजों में सेंचुरी 
मेरठ और सहारनपुर मंडल में लॉ कॉलेजों की संख्या 100 का आंकड़ा पार कर चुकी है। विवि के मान्यता विभाग के मुताबिक 101 कॉलेजों के पास बीए एलएलबी, एलएलबी और एलएलएम के कोर्स चलाने की मान्यता है। हाल ही में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें बताया था कि 2014 से 2016 के बीच देश में सर्वाधिक नए 54 कॉलेजों की मान्यता सीसीएसयू विवि से मिली है। इनमें अधिकांश प्राइवेट कॉलेज हैं। 

उत्तराखंड और दिल्ली के केस ज्यादा 
वेरिफिकेशन में सबसे ज्यादा केस उत्तराखंड और दिल्ली से आ रहे हैं। लॉ की पढ़ाई करने वालों में इन दोनों राज्यों के काफी छात्र रहे हैं। लॉ की पढ़ाई में सीटों की संख्या और पुराने कॉलेजों के मामले में सीसीएसयू बड़ा संस्थान है। दिल्ली में ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्होंने नौकरी के दौरान लॉ की पढ़ाई की। निजी कॉलेजों ने मनमर्जी की फीस वसूल कर उन्हें घर बैठे डिग्री करा दी। इन्हीं कारणों की वजह से भी फर्जी डिग्री को बढ़ावा मिलता है। बीसीआई ने कुकुरमुत्तों की तरह बढ़ रहे लॉ कॉलेजों की संख्या पर नाराजगी जताई है। सीसीएसयू के कॉलेज उसमें शामिल हैं। नोएडा और गाजियाबाद में प्राइवेट लॉ कॉलेजों की भरमार है।  

रिपोर्ट भेज दी है
विजिलेंस ऑफिसर प्रो. एसके भारद्वाज का कहना है कि लॉ कोर्सेज के वेरिफिकेशन के केस बढ़े हैं। संख्या अधिक होने पर काम को तेजी से किया जा रहा है। लॉ डिग्री वेरिफिकेशन में अचानक यह इजाफा हुआ है। फर्जी केस पर विवि ने रिपोर्ट भेज दी है।

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