गुदड़ी बाजार तिहरा हत्याकांड: मेरठ की सबसे खाैफनाक थी ये वारदात, 16 साल चला मुकदमा, आज फैसला टला
कोतवाली गुदड़ी बाजार तिहरे हत्याकांड में 16 साल बाद आज फैसला टल गया। इस मुकदमे में बहस पूरी हो चुकी है। अदालत ने सारे दस्तावेज सुरक्षित कर लिए हैं। वहीं हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत से मुकदमे का स्टेटस मांगा है। आज फैसला टल गया है। अब 31 जुलाई को फैसला आएगा।
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मेरठ कोतवाली गुदड़ी बाजार तिहरे हत्याकांड में 16 साल बाद 24 जुलाई को फैसला आएगा। इस मुकदमे में बहस पूरी हो गई है। अदालत ने सारे दस्तावेज सुरक्षित कर लिए हैं। आज निर्णय सुनाया जाएगा। वहीं हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत से मुकदमे का स्टेटस मांगा है और फैसले को टाल दिया है। हाई कोर्ट ने 30 जुलाई तक रिपोर्ट मांगी है। अब 30 जुलाई के बाद की तारीख लगेगी।
23 मई 2008 को मेरठ कॉलेज के छात्र सुनील ढाका (27) निवासी जागृति विहार, पुनीत गिरि (22) निवासी परीक्षितगढ़ रोड और सुधीर उज्जवल (23) निवासी गांव सिरसली, बागपत के शव बागपत के बलैनी में नदी किनारे पड़े मिले। तीनों को गोलियां मारने के बाद गला काटकर मारा गया था। पुलिस की जांच में सामने आया कि 22 मई की रात तीनों का गुदड़ी बाजार में हाजी इजलाल कुरैशी के साथ झगड़ा हुआ था।
इस घटना का खुलासा होने के बाद मेरठ में हजारों युवाओं ने गैर-राजनीतिक संगठन बनाकर 25 मई को मेरठ बंद का एलान कर दिया था। पूरा मेरठ बंद हुआ था। तत्कालीन कोतवाली इंस्पेक्टर और सीओ की भूमिका पर सवाल उठने के बाद जांच सदर बाजार थाने के इंस्पेक्टर डीके बालियान को दी गई थी।
धाराओं में फांसी तक की सजा का प्रावधान
इस मामले में पहले बागपत में रिपोर्ट दर्ज हुई थी, लेकिन बाद में इजलाल समेत बाकी आरोपियों के खिलाफ (अपराध संख्या 190/08)के तहत धारा 147, 148, 149, 364, 302, 201, 404, 411 और 3/2 गैंगस्टर एक्ट के तहत थाना कोतवाली में मुकदमा दर्ज है।
एडवोकेट प्रमोद त्यागी बताते हैं कि इन धाराओं में उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा का प्रावधान है। अब इस मामले में सिर्फ एक आरोपी शम्मी जेल में है। बाकी सभी आरोपियों की जमानत हो चुकी है। मुकदमे में बहस पूरी हो गई है। आज हाई कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत से मुकदमे का स्टेटस मांगने के बाद फैसले को टाल दिया। वहीं मेरठ में फैसले को लेकर पुलिस प्रशासना चाैकन्ना रहा।
गुदड़ी बाजार ट्रिपल मर्डर केस में अभियुक्त गण की ओर से न्यायालय में प्रार्थना की गई कि ट्रांसफर से संबंधित प्रार्थना पत्र उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और 30 जुलाई की तिथि नियत है, इसलिए कोई निर्णय पारित न किया जाए।
अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता प्रमोद त्यागी ने कोर्ट को बताया था कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रोसीडिंग्स को स्टे नहीं किया गया है तथा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिन प्रतिदिन सुनवाई किए जाने के आदेश दिए हुए हैं। प्रार्थना पत्र के संबंध में न्यायालय को अपनी रिपोर्ट उच्च न्यायालय को प्रस्तुत करनी है।
मुख्य न्यायालय अपर जिला स्पेशल भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट संख्या दो पवन शुक्ला ने हाईकोर्ट की 30 जुलाई को तारीख लगने के चलते फैसले को अब 31 जुलाई की तिथि नियत की है।