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परिवार में संस्कार, संवाद और समरसता जरूरी : डॉ. प्रशांत
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अखिल भारतीय वैदिक शोध संगोष्ठी में देशभर के विद्वानों ने किया मंथन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। टीकरी भोला झाल गुरुकुल प्रभात आश्रम में स्वामी समर्पणानंद वैदिक शोध संस्थान एवं संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय वैदिक शोध संगोष्ठी के दूसरे दिन रविवार को पंच परिवर्तन सिद्धांतों पर देशभर से आए विद्वानों ने गंभीर मंथन किया।
सीसीएसयू परिसर के संस्कृत एवं प्राच्य भाषा विभाग के सहविभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत शर्मा ने कुटुंब प्रबोधन विषय पर संस्कृत में वैदिक प्रमाणों के साथ अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने आधुनिक समय में परिवारों में बढ़ रहे विघटन की समस्या का वैदिक समाधान बताते हुए कहा कि परिवार में संस्कार, संवाद और समरसता को मजबूत करना ही कुटुंब प्रबोधन का मूल उद्देश्य है।
संगोष्ठी में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडेय, दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर भारतेंदु पांडेय, जेएनयू के प्रोफेसर बृजेश पांडेय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजेश्वर प्रसाद मिश्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. विनोद कुमार, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर योगेंद्र धामा एवं प्रोफेसर बृहस्पति मिश्र, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय के डॉ. विश्वेश वाग्मी, गोधरा विश्वविद्यालय गुजरात के प्रोफेसर भावप्रकाश गांधी तथा गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के डॉ. वेदव्रत सहित अनेक वैदिक विद्वानों एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विचारकों ने सहभागिता की।
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डॉ. प्रशांत शर्मा ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से विभाग भविष्य में भी इस प्रकार की शैक्षिक एवं शोधपरक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहेगा।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के डॉ. रविप्रभात ने सीसीएसयू परिसर के संस्कृत विभाग के दल की सराहना की। मुख्य संयोजक प्रोफेसर वाचस्पति मिश्र ने सभी विद्वानों का आभार व्यक्त किया। शोध शैक्षिक प्रवास में विभाग के अतिथि प्रवक्ता डॉ. विजय बहादुर, डॉ. राजबीर तथा कार्यालय सहायक साहिल तरीका ने सहयोग किया।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। टीकरी भोला झाल गुरुकुल प्रभात आश्रम में स्वामी समर्पणानंद वैदिक शोध संस्थान एवं संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय वैदिक शोध संगोष्ठी के दूसरे दिन रविवार को पंच परिवर्तन सिद्धांतों पर देशभर से आए विद्वानों ने गंभीर मंथन किया।
सीसीएसयू परिसर के संस्कृत एवं प्राच्य भाषा विभाग के सहविभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत शर्मा ने कुटुंब प्रबोधन विषय पर संस्कृत में वैदिक प्रमाणों के साथ अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने आधुनिक समय में परिवारों में बढ़ रहे विघटन की समस्या का वैदिक समाधान बताते हुए कहा कि परिवार में संस्कार, संवाद और समरसता को मजबूत करना ही कुटुंब प्रबोधन का मूल उद्देश्य है।
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संगोष्ठी में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडेय, दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर भारतेंदु पांडेय, जेएनयू के प्रोफेसर बृजेश पांडेय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजेश्वर प्रसाद मिश्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. विनोद कुमार, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर योगेंद्र धामा एवं प्रोफेसर बृहस्पति मिश्र, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय के डॉ. विश्वेश वाग्मी, गोधरा विश्वविद्यालय गुजरात के प्रोफेसर भावप्रकाश गांधी तथा गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के डॉ. वेदव्रत सहित अनेक वैदिक विद्वानों एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विचारकों ने सहभागिता की।
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डॉ. प्रशांत शर्मा ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से विभाग भविष्य में भी इस प्रकार की शैक्षिक एवं शोधपरक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहेगा।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के डॉ. रविप्रभात ने सीसीएसयू परिसर के संस्कृत विभाग के दल की सराहना की। मुख्य संयोजक प्रोफेसर वाचस्पति मिश्र ने सभी विद्वानों का आभार व्यक्त किया। शोध शैक्षिक प्रवास में विभाग के अतिथि प्रवक्ता डॉ. विजय बहादुर, डॉ. राजबीर तथा कार्यालय सहायक साहिल तरीका ने सहयोग किया।