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बच्चों का नहीं हो रहा टीकाकरण, किसान-मजदूर की हालत खराब
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बच्चों का नहीं हो रहा टीकाकरण, किसान-मजदूर की हालत खराब
मेरठ। रालोद नेताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन में कहा कि कोरोना संकट के दौरान बच्चों पर खतरा मंडरा रहा है। बच्चों का टीकाकरण बंद है। किसान और मजदूर की हालत खराब है। प्राइवेट अस्पतालों के बंद होने से लोगों को परेशानी हो रही है।
उप जिलाधिकारी चंद्रेश कुमार को दिए ज्ञापन में रालोद नेताओं ने कहा कि अभी तक गन्ने का भुगतान नहीं किया गया है। जल्द से जल्द ब्याज के साथ भुगतान किया जाए। किसानों के कर्ज माफ करने के साथ ही केसीसी की लिमिट दोगुनी की जाए और उस पर ब्याज एक प्रतिशत किया जाए। बिजली के बिल माफ किए जाएं। लॉकडाउन के दौरान हर तरह की रिकवरी पर रोक लगाई जाए। रालोद नेताओं ने कहा कि सरकार किसानों को दी जाने वाली सम्मान राशि छह हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार करे। ओलावृष्टि में फसलों के नुकसान की भरपाई की जाए। प्रवासी मजदूरों, ऑटो चालकों, रिक्शा चालकों, रेहड़ी वाले, ठेला लगाने वाले, फड़ लगाने वाले, छोटे दुकानदार को हर महीने नकद कम से कम 10 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाए।
रालोद नेताओं ने कहा कि कोरोना की वजह से प्राइवेट डाक्टरों व नर्सिंग होम को सभी बीमारियों का इलाज करने की इजाजत दी जाए। कोरोना की वजह से नवजात बच्चों का टीकाकरण अभियान नहीं चल रहा है, जिससे उन्हें गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। गेहूं की खरीद का अभी तक किसानों को भुगतान नहीं हुआ है। सरकार द्वारा जो ईएमआई जमा करने की छूट दी गई है, उस पर ब्याज माफ करें। लॉकडाउन के दौरान मकान मालिकों के किराये की व्यवस्था भी सरकार स्वयं करे। सरकार स्कूलों की तीन महीने की फीस का वहन खुद करे। आम की फसल सरकार खुद खरीदे, जिससे आम की फसल को बेचने के लिए किसान को दर-दर भटकना न पड़े।
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ज्ञापन देने वालों में रालोद के प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. राजकुमार सांगवान, जिलाध्यक्ष राहुलदेव, नरेंद्र खजूरी, कमलजीत सिंह, चौधरी इंद्रपाल सिंह, वीरेंद्र तोमर, वरुण करनावल, संजना ठाकुर, बृजपाल सिंह, आरिफ आदि मौजूद रहे।
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मेरठ। रालोद नेताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन में कहा कि कोरोना संकट के दौरान बच्चों पर खतरा मंडरा रहा है। बच्चों का टीकाकरण बंद है। किसान और मजदूर की हालत खराब है। प्राइवेट अस्पतालों के बंद होने से लोगों को परेशानी हो रही है।
उप जिलाधिकारी चंद्रेश कुमार को दिए ज्ञापन में रालोद नेताओं ने कहा कि अभी तक गन्ने का भुगतान नहीं किया गया है। जल्द से जल्द ब्याज के साथ भुगतान किया जाए। किसानों के कर्ज माफ करने के साथ ही केसीसी की लिमिट दोगुनी की जाए और उस पर ब्याज एक प्रतिशत किया जाए। बिजली के बिल माफ किए जाएं। लॉकडाउन के दौरान हर तरह की रिकवरी पर रोक लगाई जाए। रालोद नेताओं ने कहा कि सरकार किसानों को दी जाने वाली सम्मान राशि छह हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार करे। ओलावृष्टि में फसलों के नुकसान की भरपाई की जाए। प्रवासी मजदूरों, ऑटो चालकों, रिक्शा चालकों, रेहड़ी वाले, ठेला लगाने वाले, फड़ लगाने वाले, छोटे दुकानदार को हर महीने नकद कम से कम 10 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाए।
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रालोद नेताओं ने कहा कि कोरोना की वजह से प्राइवेट डाक्टरों व नर्सिंग होम को सभी बीमारियों का इलाज करने की इजाजत दी जाए। कोरोना की वजह से नवजात बच्चों का टीकाकरण अभियान नहीं चल रहा है, जिससे उन्हें गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। गेहूं की खरीद का अभी तक किसानों को भुगतान नहीं हुआ है। सरकार द्वारा जो ईएमआई जमा करने की छूट दी गई है, उस पर ब्याज माफ करें। लॉकडाउन के दौरान मकान मालिकों के किराये की व्यवस्था भी सरकार स्वयं करे। सरकार स्कूलों की तीन महीने की फीस का वहन खुद करे। आम की फसल सरकार खुद खरीदे, जिससे आम की फसल को बेचने के लिए किसान को दर-दर भटकना न पड़े।
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ज्ञापन देने वालों में रालोद के प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. राजकुमार सांगवान, जिलाध्यक्ष राहुलदेव, नरेंद्र खजूरी, कमलजीत सिंह, चौधरी इंद्रपाल सिंह, वीरेंद्र तोमर, वरुण करनावल, संजना ठाकुर, बृजपाल सिंह, आरिफ आदि मौजूद रहे।