मेरठ: कताई मिल पर टिकी सबकी आस, कैसे होंगे चार प्रस्ताव पास
सालों से बंद पड़ी परतापुर कताई मिल की जमीन को लेकर शासन और प्रशासन पसोपेश में है। इसके परिसर का इस्तेमाल अभी तक लोकसभा और विधानसभा चुनावों की मतगणना के लिए होता रहा है। जब से राज्य शासन ने बंद पड़ी कताई मिलों को दूसरे प्रयोजन में लेने और रूपांतरण का आदेश दिया, तब से इस जमीन पर हर किसी की नज़र है।
लगभग एक साल पहले उद्यमियों की मांग पर यहां नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई गई। उद्यमियों की मांग को वाजिब मानते हुए उद्योग विभाग ने 89 एकड़ भूमि में इसका प्रस्ताव तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार के माध्यम से शासन को भेजा।
इसे हरी झंडी मिलने से पहले ही पूर्व विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने यहां स्पोर्ट्स कॉलेज व हॉस्टल बनाने की मांग खेल निदेशक के समक्ष रखी थी। तर्क दिया था कि खिलाड़ियों की सुविधा के लिए यह जरूरी है। इसका प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया गया।
80 एकड़ भूमि को लेकर छिड़ा हुआ है विवाद
बुनकर यहां अपना अधिकार चाहते हैं। बुनकर एसोसिएशन का कहना है कि यह कताई मिल है और इसके बंद होने से हजारों बुनकरों से आय का जरिया छिन गया, लिहाजा इस पर पहला हक बुनकरों का है, जिनके लिए यहां क्लस्टर विकसित होना चाहिए। दूसरी तरफ एमडीए ने प्रधानमंत्री आवासस योजना का लक्ष्य पूरा करने के लिए इस जमीन को चिन्हित किया है। एमडीए फ्लैट बनाना चाहता है, जिसका शासन को प्रस्ताव भी भेज दिया है।
आवास, औद्योगिक क्षेत्र, कलस्टर और स्पोर्ट्स हॉस्टल बनाने की मांगें
हमने कताई मिल में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवास बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। यदि कताई मिल में ही आवास बनाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है तो एक ही परिसर में कई हजार आवास बन सकेंगे। - साहब सिंह, एमडीए वीसी
होती है मतगणना
कताई मिल में अभी तक जिला निर्वाचन कार्यालय इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन रखता है। मतगणना की जगह तलाशनी पड़ेगी। कताई मिल की जमीन पर पहले से ही औद्योगिक क्षेत्र विकसित कराने की बात चल रही है। उद्योग विभाग के माध्यम से प्रस्ताव भी शासन को जा चुका है। शहर में और कोई जमीन उद्योगों को नहीं मिल रही। इसलिए कताई मिल पर औद्योगिक क्षेत्र ही बनना चाहिए। -अतुल भूषण गुप्ता, आईआईए अध्यक्ष।
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