यूपी का 'अन्ना' देगा कश्मीर के सेब को टक्कर, ये है प्रजाति की खासियत
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यूपी का अन्ना प्रजाति का सेब अब कश्मीर और हिमाचल के सेब को टक्कर देगा। इसके लिए भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (आईआईएफएसआर) मेरठ द्वारा इस प्रजाति पर किया गया परीक्षण सफल रहा है। इसकी खेती के लिए जहां स्थानीय मौसम अनुकूल है तो इस फसल की रोग प्रतिरोधी क्षमता भी काफी अधिक है। यूपी समेत उत्तर भारतीय मैदानी क्षेत्रों में इसकी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
गन्ना, धान, आलू और गेहूं के अलावा यूपी के किसानों और बागवानी उत्पादकों को सेब की खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है। मोदीपुरम स्थित भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दुष्यंत मिश्रा के अनुसार यहां अन्ना प्रजाति पर काम किया जा रहा है। इस प्रजाति को ट्रायल के तौर पर संस्थान के फार्म पर लगाया गया था, जहां पर यह सफल रही और एक साल में ही इस प्रजाति पर अच्छा फूल आने के बाद फल भी आ गया। यूपी समेत उत्तर भारतीय मैदानी क्षेत्रों के लिए इसकी खेती पर देश के एकमात्र सेंटर भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान के वैज्ञानिक ही काम कर रहे हैं।
इजराइल की है प्रजाति
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मिश्रा के अनुसार सेब की अन्ना प्रजाति इजराइल की है। यहां के वातावरण के लिए उन्होंने इस प्रजाति को अपने फार्म पर लगाया, जिस पर उसका परीक्षण सही रहा। यह प्रजाति 44-45 डिग्री तापमान में भी हो सकती है। अभी तक के जो फल उस पर आए हैं, उनका आकार भी सही है और जून के अंतिम सप्ताह तक पक जाएंगे। इससे किसानों की आय में इजाफा होगा।
ये है प्रजाति की खासियत
अन्ना प्रजाति यहां के मौसम के लिए अनुकूल है
इस प्रजाति में कोई भी बीमारी नहीं लगती है।
अन्ना प्रजाति में कोई केमिकल डालने की जरूरत नहीं है।
पहले साल फल थोड़ा कम, दूसरे साल अच्छे फल आते हैं।
इस प्रजाति के सेब अन्य प्रजातियों से कम लाल रहते हैं।
अन्ना प्रजाति का स्वाद भी अलग है, सेहत के लिए अच्छा है।
यह प्रजाति जून में पककर बाजार में आती है।
जून में आना वाला कश्मीर वाला फल महंगा होता है।
अन्ना प्रजाति के फल के दाम भी कम रहेंगे।
चिड़िया से है खतरा
सेब की अन्ना प्रजाति की खास बात यह है कि उसमें कोई बीमारी नहीं लगती है। हालांकि जब फल आ जाता है तो इसे चिड़ियां खाती हैं। वैज्ञानिक चिड़िया से फल को बचाने के लिए भी काम कर रहे है।
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