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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   UP News: There have been many big scams in PVVNL department and no major action is taken against the accused officers

यूपी: पीवीवीएनएल विभाग में बड़े घोटाले, अफसरों पर नहीं होती ठोस कार्रवाई, फिर आसानी से पा लेते हैं कुर्सी

Fri, 29 Oct 2021 01:52 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 29 Oct 2021 01:52 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश में पीवीवीएनएल विभाग में कई बार बड़े घाटालों में अधिकारी फंसे हैं लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है। जांच ठंडी पड़ते ही फिर से अपनी कुर्सी पा लेते हैं।

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UP News: There have been many big scams in PVVNL department and no major action is taken against the accused officers
एसई देवेंद्र पचौरिया - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ में एसई देहात देवेंद्र पचौरिया के रिश्वत प्रकरण से पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम (पीवीवीएनएल) की साख को एक बार फिर दाग लगा है। गड़बड़झालों पर यहां ठोस कार्रवाई नहीं होती। हापुड़ में वर्ष 2002 में किसानों के बिल जमा करके लिपिक फर्जी रसीद जारी करते रहे। 20 करोड़ से ज्यादा के इस घपले में बर्खास्त लिपिक की शिकायत पर भी कई अभियंताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। इस मामले की जांच एसआईटी के हवाले है।  

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बताया गया कि दो साल पहले हापुड़ में तैनात अधिशासी अभियंता जो वर्तमान में मेरठ में तैनात हैं, की रिश्वत मांगे जाने की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। डीएम हापुड़ की नाराजगी के बाद अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया गया था। लेकिन कुछ दिन बाद ही उक्त अधिशासी अभियंता को मेरठ के एक बड़े डिविजन का चार्ज दे दिया गया। जिस लाइन शिफ्टिंग मामले में रिश्वत लेने के आरोप में अधीक्षण अभियंता पकड़े गए है, ये मामला भी इसी अधिशासी अभियंता के क्षेत्र से संबंधित है। 
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वहीं गाजियाबाद में भी पांच करोड़ रुपये का बिल घोटाला हुआ था। इसमें भी बिलिंग लिपिकों ने बिल का पैसा सरकारी खातों में जमा न करके अपने पास रख लिया था। जेवर, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भारी संख्या में अस्थायी कनेक्शन देकर करोड़ों रुपये की बिजली चोरी कराने के मामले में पकड़े गए 10 से ज्यादा अभियंताओं पर गाज गिरी थी। जिसके विरोध में उत्तर प्रदेश विद्युत परिषद अभियंता संघ ने करीब एक महीने तक आंदोलन किया था। इस तरह के मामलों की एक लंबी फेहरिस्त है। घपलेबाज पकड़े जाते है, निलंबित होते हैं और कुछ दिन बाद मामला ठंडा होते ही फिर से कुर्सी पा लेते हैं।

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