यूपी: गांव-गांव जाकर खिलाड़ियों का भविष्य संवार रहा ये लड़का, उठाता है पूरा खर्च
मूलरूप से अंकित पंवार पुत्र महेश वीर सिंह सेक्टर 82 नोएडा के रहने वाले हैं, लेकिन अभी वे बड़ौत स्थिति प्रीत विहार कॉलोनी में रहकर युवाओं में खेलों के प्रति अलख जगाने का काम कर रहे हैं। इस अभियान में अंकित इतने डूब गए हैं कि उन्हें न दिन का पता है और न ही रात का। क्षेत्र के गांव-गांव घूमकर अंकित खिलाड़ियों में छिपी उनकी प्रतिभा को देख रहे हैं।
खेल चाहे क्रिकेट का हो या फिर कबड्डी, वॉलीबाल, बैडमिंटन या फिर कुश्ती का जरा सी प्रतिभा देखते ही वे खिलाड़ी को परिजनों से बातचीत कर अपने साथ ले जाते हैं और अपने स्वयं के खर्च पर बागपत, जयपुर, खेकड़ा, शामली, सहारनपुर, गाजियाबाद, दिल्ली, उत्तराखंड, सोनीपत व हरियाणा समेत अन्य जगहों पर स्थित स्पोर्ट्स स्कूल और एकेडमी में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का दाखिला करा देते हैं। इससे जहां युवाओं में खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ रही हैं, वहीं अंकित को इस काम को करने में शांति मिलती है।
बालिकाओं के लिए भी कर रहे महत्वपूर्ण काम
अंकित केवल बालकों के लिए ही नहीं, लड़कियां के खेलों पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं। मलकपुर गांव की पूजा, बावली की संगीता, किरठल की अंजली, बड़ौत की सोनम, लुहारी की ज्योति आदि सहित दर्जनों गांव से लड़कियां से उनके परिजनों से बातचीत कर स्पोर्ट्स स्कूल में दाखिला करा चुके हैं।
लुहारी गांव के एक अभिभावक सुधीर ने बताया कि उनकी बेटी होनहार है, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते न तो सही ढंग से पढ़ा सके और न ही सही ढंग से खेलकूद में भाग ले सके। बड़ौत के वनस्थली पब्लिक स्कूल की छात्रा रही ज्योति कई बार तहसील व स्कूल स्तरीय प्रतियोगिताओं में दमखम दिखा चुकी है, लेकिन तंगी के चलते पढ़ाई व खेल दोनों छोड़ने पडे़। अब अंकित सर की बदौलत ज्योति दिल्ली की एक स्पोर्ट्स एकेडमी पर कबड्डी का अभ्यास कर रही है।
खेलों पर हो रही सिर्फ राजनीति, खिलाड़ियों पर नहीं दिया जा रहा ध्यान
अंकित पंवार ने बताया कि चाहे कोई सी भी पार्टी हो अधिकांश खेल व खिलाड़ियों पर राजनीति करने का काम करती है। यहीं कारण है कि भारत में होने वाली अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय व नेशनल लेवल की चैंपियनशिप में विदेशी खिलाड़ी दमदार प्रदर्शन करते हैं, क्योंकि विदेशों में खिलाड़ियों पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया जाता है। जबकि हमारे यहां मात्र राजनीति की जाती है।
मानवी से मिली प्रेरणा
अंकित बताते हैं कि जिस समय वह पढ़ते थे, उस समय कई साथी व अन्य बच्चे इसलिए प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाते थे कि उनके पास खेल के नाम पर वसूली जाने वाली रकम नहीं थी। उनकी सबसे अच्छी दोस्त मानवी ऐसे बच्चों को चुनकर उन्हें स्वयं के खर्च पर प्रतियोगिता में शामिल कराती थी, तभी से मानवी से प्रेरणा लेकर उन्हें यह अभियान शुरू किया और अब तक सैकड़ों युवाओं का भविष्य खेलों में बना चुके हैं। उनके द्वारा भेजे गए खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर दमदार प्रदर्शन कर उनकी मेहनत को सफल बनाने का काम कर रहे हैं।
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