यूपी: जेल की पाठशाला में तैयार हो रहे हाईटेक किसान, सीख रहे सीड प्रोडेक्शन
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मेरठ जिला कारागार में सजा काट रहे कई बंदी इन दिनों उन्नत कृषि की तकनीक सीख रहे हैं। बंदियों को सीड प्रोडक्शन से लेकर सीजनल खेती तक की जानकारी दी जा रही है। ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद वह बतौर किसान खेती कर अच्छी पैदावार ले सकें।
चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में वर्तमान में 2400 से अधिक बंदी मौजूद हैं। शहरी क्षेत्र की तुलना में यहां ग्रामीण बंदियों की संख्या अधिक है। इसको देखते हुए जेल प्रशासन ने ग्रामीण बंदियों के लिए उन्नत कृषि तकनीक प्रशिक्षण की व्यवस्था की है।
इच्छुक ग्रामीण बंदियों को कृषि की महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है। इसमें रवि, खरीफ और जायद की फसलों का अंतर समझाने के साथ-साथ किस फसल को किस सीजन में शुरू करना लाभप्रद होगा, यह बताया जा रहा है। इसके अलावा अच्छी पैदावार के लिए पोषक तत्वों का महत्व, बुवाई से पहले खेत की तैयारी, फसल के अनुसार नमी निर्धारण, पौधों के बीच की दूरी, सिंचाई, कीटनाशक आदि महत्वपूर्ण बिंदुओं से रूबरू कराया जा रहा है।
तैयार किए जा रहे हैं सीड एक्सपर्ट
जिला कारागार के अंदर 52 एकड़ कृषि भूमि है। 12 एकड़ भूमि पर सीड प्रोडक्शन होता है। बाकी भूमि पर फसल होती है। यहां उन्नत किस्म के बीज तैयार करने के लिए बीज निगम सहयोग प्रदान करता है। इसके तहत बंदियों को सीड एक्सपर्ट बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्हें जैविक खेती और जैविक खाद बनाने की जानकारी भी दी जा रही है। एक्सपर्ट बंदियों को सीजनल खेती का प्रशिक्षण दे रहे हैं। खासकर साग-भाजी और औषधि फसलों पर ध्यान दिया जाता है।
कारागार की कृषि भूमि पर बंदियों का भविष्य तैयार किया जा रहा है। सीड प्रोडक्शन, सीजनल खेती की बारीकियां उन्हें सिखाई जा रही हैं। ताकि बाहर निकलकर वह कृषि को अपनाएं और भविष्य संवारें। - बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जिला कारागार
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