UP: गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे के लिए जमीन देने से किसानों का इनकार, दे डाली ये चेतावनी
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे के लिए जमीन देने से किसानों ने साफ इनकार कर दिया है। किसानों ने साफ कह दिया है कि यदि जमीन देने के लिए दबाव बनाया गया तो वे धरने प्रदर्शन और आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
विस्तार
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे के लिए जमीन देने से किसानों ने इनकार कर दिया। किसानों ने बुधवार को डीएम को ज्ञापन दिया। चेतावनी दी कि अगर किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहण की गई तो 4 नवंबर से चार गांव के किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। बताया गया है कि चारों गांव के किसानों को उनकी जमीन का जिला प्रशासन उचित मुआवजा नहीं दे रहा है, जिसके चलते किसान नाराज है और वह जमीन देने से मना कर रहे है।
खरखौदा क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा यूपीडा द्वारा विकसित हो रहा है, जिसमें किसानों की जमीन दिलाने का काम जिला प्रशासन का है। एसडीएम सदर कमल किशोर और तहसीलदार शैलेंद्र सिंह ने औद्योगिक गलियारे के लिए 200 हेक्टेयर जमीन खरखौदा और बिजौली के किसानों की दिलवा दी।
दोनों गांव में जमीन के सर्किल रेट 98 लाख हेक्टेयर है। सर्किल रेट से चार गुना ज्यादा पैसा प्रशासन ने किसानों को दिला दिया। यूपीडा ने 300 हेक्टेयर जमीन की मांग प्रशासन से की, जोकि गोविंदपुर, खड़खड़ी, छतरी गांव के किसानों की है।
उक्त तीनों गांव में 38 लाख रुपये हेक्टेयर जमीन के सर्किल रेट है। किसान खरखौदा और बिजौली के किसानों से ज्यादा मुआवजे की मांग कर रहे है। जिसको दिलाने में जिला प्रशासन तैयार नहीं है।
इसको लेकर बुधवार को तीनों गांव के किसानों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर हंगामा किया। किसानों ने कहा कि किसी भी हालत में जमीन नहीं देंगे। प्रशासन जबरन जमीन लेना चाहता है। चेतावनी दी है कि अगर जमीन का अधिग्रहण किया गया तो तीनों गांव के लोग चार नवंबर से कोल गांव मार्ग खड़खड़ी से धरना प्रदर्शन करेंगे।
किसानों का कहना कि उनकी पूरी भूमि समतल व उपजाऊ है। सभी किसानों के पास जीवन यापन करने के लिए एकमात्र यही सहारा है। किसान भूमि देने के लिए इच्छुक नहीं है। डीएम दीपक मीणा ने बताया कि किसानों से बातचीत चल रही है। सहमति से ही जमीन ली जाएगी। जबरन जमीन लेने की कोई बात ही नहीं।