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UP Election Results 2022: गठबंधन के सामने फेल हुआ भाजपा का ये बड़ा चेहरा, दिनेश खटीक ने कायम रखा हस्तिनापुर का इतिहास

Thu, 10 Mar 2022 06:59 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 10 Mar 2022 06:59 PM IST
सार

Uttar Pradesh Election Result 2022: पश्चिमी यूपी की तीन सीटों पर मंत्रियों और विपक्षी नेताओं के बीच दिलचस्प मुकाबला रहा। इनमें भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा सुरेश राणा चुनाव हार गए, जबकि मेरठ में हस्तिनापुर सीट से दिनेश खटीक ने जीत दर्ज की तो वहीं मुजफ्फरनर में शहर सीट से कपिव देव अग्रवाल ने जीत हासिल की है।

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UP Election Result 2022 Three Seats of Western UP Competition Between Minister and Opposition Leaders Who Leading
दिनेश खटीक, कपिल देव अग्रवाल, सरेश राणा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

पश्चिमी यूपी की तीन विधानसभाओं पर मंत्रियों और विपक्षी नेताओं के बीच कांटे का मुकाबला रहा। जहां मेरठ में हस्तिनापुर सीट से मंत्री दिनेश खटीक और गठबंधन प्रत्याशी योगेश वर्मा के बीच बड़ा मुकाबला रहा तो वहीं शामली में थानाभवन सीट से मंत्री सुरेश राणा चुनाव हार गए। गठबंधन के प्रत्याशी अशरफ अली ने उन्हें हराया है। उधर, मुजफ्फरनगर की शहर सीट से भाजपा प्रत्याशी व राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने गठबंधन के सौरभ को हराकर जीत दर्ज की है।  

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गन्ना मंत्री सुरेश राणा नहीं हुए पास
यह चुनाव गन्ना मंत्री सुरेश राणा के लिए एक इम्तिहान था लेकिन, वह पास नहीं हो सके। वहीं रालोद-सपा गठबंधन के अशरफ अली खान ने इस सीट से जीत दर्ज कर नया रिकॉर्ड बना दिया है। बसपा के जहीर मलिक और कांग्रेस के सत्यम सैनी काफी पीछे रहे।
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सुरेश राणा और अशरफ अली खान इससे पहले 2012 के चुनाव में भी आमने-सामने थे। तब दोनों के बीच कांटे मुकाबला हुआ था और महज 265 वोटों के अंतर से सुरेश राणा ने जीत दर्ज की थी। सुरेश राणा को 53,719 वोट मिले थे। उस समय दो मुस्लिम प्रत्याशियों में रालोद के अशरफ अली को 53,454 और बसपा के अब्दुल वारिस को 50 हजार वोट मिली थी। 2017 में सुरेश राणा ने फिर जीत दर्ज की थी।
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जातीय समीकरणों में उम्मीदवारों के फिट बैठने की चुनौती
थानाभवन सीट ऐसी है कि जहां जातीय समीकरण सभी दलों का इम्तिहान लेते हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या यहां करीब 98 हजार है। अन्य जातियों में अनुसूचित जातियां करीब 60 हजार, जाट 40 हजार, सैनी 35 हजार, कश्यप 30 हजार, ठाकुर 22 हजार, ब्राह्मण 14 हजार, वैश्य 10 हजार, अन्य मतदाता 18 हजार हैं। इस सीट के जातिगत समीकरण की बदौलत मुस्लिम, वैश्य, ठाकुर, सैनी, कश्यप भी विधायक बन चुके हैं।

मुजफ्फरनगर सीट
मुजफ्फरनगर शहर सीट भाजपा की सबसे मजबूत सीट मानी जाती है। लेकिन इस बार शहर सीट यहां रालोद प्रत्याशी से कांटे के मुकाबले में फंस नजर आ रही थी। लेकिन आखिर में मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने जीत दर्ज की।

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के कपिलदेव अग्रवाल यहां सपा के गौरव स्वरूप से जीते थे। कपिलदेव का चितरंजन स्वरूप के परिवार से चौथा मुकाबला रहा। इस बार रालोद प्रत्याशी के रूप में सौरभ स्वरूप मैदान में थे। सौरभ ने कपिल को चुनाव दी है। इस सीट पर 3,56,283 वोट है, जिनमें से 2,21,982 ने अपने मत का प्रयोग किया था। चुनाव में बीजेपी और रालोद के बीच कांटे का मुकाबला रहा है। इस सीट पर बसपा से पुष्पांकर पाल और कांग्रेस से सुबोध शर्मा मैदान में थे।


हस्तिनापुर सीट
मेरठ जनपद में हस्तिनापुर विधानसभा सीट का अपना इतिहास है। अभी तक इस क्षेत्र की जनता ने जिस पार्टी के उम्मीदवार को विधायक चुना उसी पार्टी की सरकार प्रदेश में आती है। 2017 में भाजपा उम्मीदवार दिनेश खटीक ने चुनावी मैदान में बाजी मारी थी। इस बार भी हस्तिनापुर सीट से भाजपा उम्मीदवार दिनेश खटीक ने गठबंधन के प्रत्याशी योगेश वर्मा का हराकर जीत दर्ज की है। सुबह से ही इस सीट पर सभी की निगाहें टिकी थीं।

एक बार फिर से हस्तिनापुर का इतिहास कायम रहा। दिनेश खटीक इतिहास को कायम रखने में कामयाब रहे।

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