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UP: मेरठ पहुंचा मेजर शुभम सैनी का पार्थिव शरीर, 50 मीटर गहरी खाई में कार गिरने से हुई थी मौत

Sun, 18 Jan 2026 01:41 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Sun, 18 Jan 2026 01:41 PM IST
सार

Meerut News: यूपी के मेरठ स्थित घसौली गांव निवासी मेजर शुभम सैनी की देहरादून में सड़क हादसे में मौत हो गई। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद उनका पार्थिव शरीर घर लाया गया, तो परिजनों में चीख-पुकार मच गई।

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UP: Dead body of Major Shubham Saini reached Meerut, he died after his car fell into a 50 meter deep ditch.
घसौली गांव पहुंचा मेजर का पार्थिव शरीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देहरादून सड़क हादसे में जान गंवाने वाले मेजर शुभम सैनी का पार्थिव शरीर रविवार को पैतृक गांव घसौली पहुंच गया। उनके परिजनों का रोकर बुरा हाल है। अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं। 
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UP: Dead body of Major Shubham Saini reached Meerut, he died after his car fell into a 50 meter deep ditch.
हादसे में मेजर की मौत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
मेरठ के घसौली गांव निवासी मेजर शुभम सैनी (27) की कार शनिवार सुबह साढ़े नौ बजे देहरादून-चकराता मार्ग पर 50 मीटर गहरी खाई में गिर गई थी। चकराता के छावनी क्षेत्र में बंगला नंबर 10 के पास हुए हादसे के बाद सैन्यकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे और घायल मेजर को खाई से निकाला। सिर पर गंभीर चोटें आने के कारण उन्हें तुरंत सैनिक अस्पताल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
 
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मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र स्थित उनके गांव घसौली निवासी परिजनों का कहना है कि शुभम सैनी किसी कार्य से चकराता से देहरादून जा रहे थे। रास्ते में किसी वाहन को बचाने के प्रयास में उन्होंने अपनी कार से नियंत्रण खो दिया। इससे उनकी कार खाई में जा गिरी। 2-2 बटालियन के चकराता स्थित मुख्यालय में तैनात मेजर सैनी वर्ष 2019 में लेफ्टिनेंट के पद पर सेना में शामिल हुए थे। बाद में उन्हें मेजर पद पर पदोन्नति मिली थी। हादसे की खबर मिलते ही उनके गांव में शोक की लहर दौड़ गई। 
उनका विवाह नहीं हुआ था। उनके बड़े भाई तुषार व बहन निधि भी अविवाहित हैं। परिवार के सदस्य सिविल सेवाओं की तैयारी कर रहे हैं। पोस्टमार्टम के बाद मेजर का पार्थिव शरीर रविवार सुबह गांव लाया गया। श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों का आना शुरू हो गया है और अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है।  
 
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पापा, जल्द ही छुट्टी लेकर घर आ रहा हूं...भैया की शादी की तैयारी करेंगे
पापा, बहुत जल्द छुट्टी लेकर घर आ रहा हूं। इसके बाद तुषार भईया की शादी की तैयारी करेंगे। ये बातें मेजर शुभम सैनी ने शुक्रवार को अपने पिता से फोन पर कही थीं। 18 फरवरी को शुभम के बड़े भाई तुषार की शादी है। परिवार में खुशी का माहौल है, मगर शनिवार दोपहर देहरादून से आई एक कॉल ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। मेजर शुभम की मौत की सूचना मिलने के बाद पिता सत्येंद्र, मां रीता, बहन व अन्य परिजनों का रोकर बुरा हाल हो गया। रिश्तेदार किसी तरह मेजर के परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।


 

रोहटा रोड स्थित घसौली गांव निवासी सत्येंद्र सैनी आर्मी से सूबेदार के पद से रिटायर्ड हैं। परिवार में शुभम के अलावा अब सत्येंद्र की पत्नी रीता बड़ा बेटा तुषार और एक बेटी है। तुषार नोएडा एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर हैं। शुभम सेना में मेजर थे। बेटी आर्मी स्कूल में शिक्षिका है। पिता ने बताया कि शुभम ने 2015 में आर्मी स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास की थी। इसके बाद एनडीए में सलेक्शन हो गया था। तीन साल तक पुणे में ट्रेनिंग की थी। पासिंग आउट परेड 2019 में देहरादून में हुई थी। शुभम को पहली पोस्टिंग पंजाब के भटिंडा में मिली थी। तीन साल से शुभम मेजर के पद पर देहरादून के चकराता में तैनात थे।
 

शुक्रवार को शुभम ने फोन कर पिता व अन्य परिजनों से बात की थी और जल्द ही छुट्टी लेकर घर आने का वादा किया था लेकिन पिता व भाई रोते हुए बोले कि उन्हें क्या पता था कि वह शुभम से आखिरी बार बात कर रहे हैं। सत्येंद्र ने कहा कि वह तुषार के बाद शुभम के के सिर पर शादी का सेहरा देखने का सपना संजोए थे लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि बेटा तिरंगे में लिपटकर वापस आएगा।
 

बचपन से था सेना में जाने का जुनून
पिता सत्येंद्र ने बताया कि शुभम बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। इसके लिए वह स्कूल के समय से ही पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक व मानसिक रूप से तैयारी करता था। शुभम आर्मी में सेवा देकर देश का मान बढ़ा रहा था। कभी कल्पना भी न की थी कि ऐसा दिन आएगा। तुषार ने नम आंखों से कहा कि उन्हें शुभम की मौत पर यकीन नहीं हो रहा। गांव में भी शोक माहौल व्याप्त है। लोग उनके घर पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं। मेजर शुभम ने आर्मी जॉइन कर गांव का नाम रोशन किया था। वह गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी थे। 

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